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भाग्य बड़ा या कर्म,देश के उच्च स्तर के ट्रस्ट द्वारा मानवता व आध्यात्मिक प्रसार

gvartanews by gvartanews
December 8, 2025
Reading Time: 1 min read
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काशीपुर -आई एस ए ए एस ट्रस्ट द्वारा सर्व संसार मे आध्यात्मिक के रास्ते पर चलने का सदमार्ग और राष्ट्र सेवा, मानवता के प्रति जागरूकता का भी एक विशेष अभियान!एक जंगल के दोनों ओर अलग-अलग राजाओं का राज्य था। और उसी जंगल में एक महात्मा रहते थे जिन्हे दोनों राजा अपना गुरु मानते थे। उसी जंगल के बीचो-बिच एक नदी बहती थीं। अक्सर उसी नदी को लेकर दोनों राज्यों के बिच झगड़े-फसाद होते रहते थे। एक बार तो बात बिगड़ते बिगड़ते युद्ध तक आ पहुंची।कोई भी राजा सुलह को तैयार नहीं था, सो युद्ध तो निश्चय हीं था। दोनों राजाओं ने युद्ध से पहले महात्मा का आशीर्वाद लेने की सोची और पहुंच गए जंगल की उस कुटिया में जहाँ महात्मा रहते थे।पहले एक राजा आया और उसने महात्मा से युद्ध में विजय का आशीर्वाद माँगा। महात्मा ने कुछ देर उस राजा को निहारा और कहा की राजन तुम्हारे भाग्य में जीत नहीं दिखती, आगे ईश्वर की मर्जी। यह सुनकर पहला राजा थोड़ा विचलित तो हुआ, फिर उसने सोचा कि यदि हारना हीं है तो पूरी ताकत से लड़ेंगे परन्तु यूँ हीं हार नहीं मानेंगे। और अगर हार भी गए तो हार को भी औरों के लिए उदाहरण बना देंगे, परन्तु आसानी से हार नहीं मानेंगे। यह निश्चय कर वह वहां से चला गया। दूसरा राजा भी जीत का आशीर्वाद लेने महात्मा के पास आया, उनके पैर छुए और विजय श्री का आशीर्वाद माँगा। महात्मा ने उसे भी कुछ देर निहारा और कहा कि बेटा भाग्य तो तुम्हारे साथ हीं है। यह सुनकर राजा तो खुशी से भर गया और वापस जा कर निश्चिन्त हो गया, जैसे कि उसने युद्ध तो जीत ही लिया हो।
अंततः युद्ध का दिन आया, दोनों सेना एक दूसरे के आमने-सामने थे और युद्ध का बिगुल बज गया, युद्ध प्रारम्भ हो चूका था। एक तरफ कि सेना यह सोच कर लड़ रही थीं कि चाहे किस्मत में हार हो पर हम हार नहीं मानेंगे। हम अपना सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे, अपना सर्वस्व झोंक देंगे। और वहीं दूसरी तरफ की सेना एक निश्चिन्त मानसिकता के साथ लड़ रही थी की जितना तो हमें हीं है तो घबराना कैसा।
लड़ते लड़ते दूसरी सेना के राजा के घोड़े के पैर का नाल भी निकल गया और घोड़ा लड़खड़ाने लगा पर राजा ने ध्यान हीं नहीं दिया। क्योंकि उसके दिमाग़ में एक हीं बात चल रहा था की जब जीत मेरे भाग्य में है हीं फिर किस बात की चिंता।
कुछ ही क्षण बाद दूसरे राजा का घोड़ा लड़खड़ा कर गिर गया जिससे राजा भी ज़मीन पे गिर पड़ा और घायल हो गया और वह दुश्मनों के बिच घिर गया। पहले राजा के सैनिको ने उसे बंधक बना लिए एवं उसे अपने राजा को सौंप दिया। युद्ध का निर्णय हो चूका था, युद्ध का परिणाम बिलकुल महात्मा के भविष्यवाणी के उलट था। निर्णय के बाद महात्मा भी वहाँ पहुंच गए, अब दोनों राजाओं को बड़ी जिज्ञासा थी कि आखिर भाग्य का लिखा बदल कैसे गया।
दोनों ने महात्मा से प्रश्न किया कि गुरुवर आखिर ये कैसे संभव हुआ? महात्मा ने मुस्कुराते हुये उत्तर दिया, राजन भाग्य नहीं बदला वो बिलकुल अपने जगह सही है पर तुम लोग बदल गए हो। उन्होंने विजेता राजा की ओर इशारा करते हुये कहा कि अब आपको हीं देखो राजन, आपने संभावित हार के बारे में सुनकर दिन रात एक कर दिया। सबकुछ भूल कर आप जबरदस्त तैयारी में जुट गए, यह सोच कर कि परिणाम चाहे जो भी हो पर हार नहीं मानूँगा। खुद हर बात का ख्याल रखा, खुद हीं हर रणनीति बनाई जबकि पहले आपकी योजना सेनापति के भरोसे युद्ध लड़ने कि थी।अब महात्मा ने पराजित राजा कि ओर इशारा करते हुये कहा कि राजन आपने तो युद्ध से पहले ही जीत का जश्न मानना शुरू कर दिया था। आपने तो अपने घोड़े कि नाल तक का ख्याल नहीं रखा फिर आप इतनी बड़ी सेना को कैसे सँभालते और कैसे उनको कुशल नेतृत्व देते। और हुआ वही जो होना लिखा था। भाग्य नहीं बदला पर जिनके भाग्य में जो लिखा था उन्होंने हीं अपना व्यक्तित्व बदल लिया फिर बेचारा भाग्य क्या करता।
दोस्तों हमें इस कहानी से यह सिख मिलती है कि भाग्य उस लोहे कि तरह वहीं खींचा चला जाता है जहाँ कर्म का चुम्बक हो। हम भाग्य के आधीन नहीं हैं हम तो स्वयं भाग्य के निर्माता हैं।
यह सत्य है कि भाग्य भी उन लोगों का साथ देता है जो कर्म करते हैं। किसी खुरदरे पत्थर को चिकना बनाने के लिए हमें उसे रोज घिसना पड़ेगा। ऐसा ही जिंदगी में समझें हम जिस भी क्षेत्र में हों, स्तर पर हों हम अपना कर्म करते रहें बिना फल की चिंता किए।*

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गु.श्री गुरु हरगोबिंदसर में 350 वें श्री गुरु तेग बहादुर शहीदी समागम में विशिष्ट विद्वानों का हुआ वार्तालापगदरपुर । गुरुद्वारा श्री गुरु हरगोबिंद सर नवाबगंज/रतनपुरा उत्तराखंड/उत्तर प्रदेश में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी समागम को उच्च स्तर पर मनाए जाने के लिए देश के महान विद्वानों को आमंत्रित किया गया। शहीदी कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अखंड पाठ के भोग के पश्चात रागी भाई हरजीत सिंह द्वारा गुरबाणी कीर्तन के साथ किया गया। गुरुद्वारा सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पटियाला से आए स्वामी ब्रह्मानंद गिरी ने कहा कि सनातन धर्म के मतावलंबियों की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया । उन्होंने कहा,हरिद्वार स्थित ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारा सिख समाज की अमानत है जो कि उन्हें सौंपा जाना चाहिए । वहीं सिख पंथ के महान प्रचारक हरप्रीत सिंह मक्खू ने कहा कि गुरु तेग बहादुर को हिंद की चादर तो कहा जाता है परंतु वह असल में मानवता की चादर थे जिन्होंने अपनी शहादत से देश के पीड़ित लोगों को जागरूक करने का महान कार्य किया । उन्होंने कहा,गुरुद्वारा साहिब के मुख्य सेवादार वीर जी अनूप सिंह द्वारा सिख समाज को एकजुट करने हेतु समाज भलाई एवं धार्मिक जागरूकता के कार्यों को आगे बढ़ाया है,सिख धर्म के सिद्धांतों के प्रचार प्रसार के लिए हमें उनका मिलजुल कर सहयोग करना चाहिए। कार्यक्रम आयोजन में पहुंचे श्री गुरु ग्रंथ साहिब यूनिवर्सिटी फतेहगढ़ साहिब के डॉक्टर हरदेव सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब में वर्णित गुरु तेग बहादुर जी की वाणी एवं आदर्शों पर प्रकाश डाला वहीं डॉक्टर चमकौर सिंह डायरेक्टर गुरु चरण सिंह टौहड़ा इंस्टीट्यूट पटियाला वालों ने भी श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन एवं आदर्शों पर जानकारियां प्रदान की । विशेष तौर पर पहुंचे प्राकृतिक कृषि खेती के विद्वान वैज्ञानिक स.गुरमुख सिंह द्वारा सभी किसानों को प्राकृतिक खेती के गुण बताकर खेती की बीमारियों से निजात पाने का मंत्र दिया और सभी किसानों को ऑर्गेनिक खेती के माध्यम से अनाज,सब्जियां एवं फल आदि पैदा करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर समाजसेवियों,आमंत्रित वक्ताओं मीरी पीरी खालसा अकैडमी में विशेष सहयोग देने वालों एवं अन्य धार्मिक शख्सियतों को सिरोपा एवं शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया । कार्यक्रम का संचालन गु.श्री नानकमत्ता साहिब के डायरेक्टर प्रतपाल सिंह द्वारा किया गया । गुरुद्वारा श्री गुरु हरगोबिंद सर नवाबगंज के मुख्य सेवादार वीर जी अनूप सिंह ने शहीदी समागम में सहभागिता करने वाले वक्ताओं और संगत का धन्यवाद किया । उन्होंने बताया कि आगामी 17 दिसंबर को मीरी पीरी खालसा अकैडमी रतनपुरा में प्रातः 9:00 बजे से क्षेत्र के ग्रंथी,पाठी,रागी,ढाढी,प्रचारक,कथा वाचक एवं विद्वानों की एक लिखित एवं मौखिक धार्मिक प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है। जिसमें प्रथम रहने वाले प्रतिभागी को मोटरसाइकिल इनाम में दी जाएगी एवं अन्य प्रतिभागियों को नगद धनराशि,शील्ड,मोमेंटो एवं सिरोपा देकर सम्मानित किया जाएगा । उन्होंने अधिक से अधिक उक्त कार्यक्रम में भी पहुंचने की अपील की है । उन्होंने कहा, गुरु का लंगर अटूट जारी रहेगा । इस मौके पर नगर पालिकाध्यक्ष बिलासपुरचिंतन मित्तल ,सतनाम सिंह खंडा, परमजीत सिंह ,डॉक्टर जीत सिंह ,बापू स्वर्ण सिंह, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य सुनीता सैनी,सरबजीत कौर सरब,ग्रंथी जसवीर सिंह, सतनाम सिंह शौकी, करमजीत सिंह,रामपुर जिला पंचायत सदस्य ख्यालीराम लोधी,प्रीतम सिंह संधू ,लखविंदर सिंह,सुरेश गंगवार,गुरमीत सिंह सहित हजारों की संख्या में संगत शामिल रही ।

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