समय पर इलाज बना संजीवनी-बेस अस्पताल श्रीनगर में जटिल ऑपरेशन से बची 23 वर्षीय युवती की जान

श्रीनगर गढ़वाल। समय पर लिया गया सही चिकित्सकीय निर्णय किसी के लिए जीवनदान बन सकता है-इस कथन को श्रीनगर स्थित...

ज्योतिष की गरिमा और आध्यात्मिक स्वरूप के संरक्षण पर मंथन

श्रीनगर गढ़वाल। ज्योतिष विद्या के मूल आध्यात्मिक स्वरूप,वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक उपयोगिता को संरक्षित एवं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से...

वनाग्नि रोकथाम को लेकर जिलाधिकारी ने ली बैठक,अधिकारियों को समन्वय व सतर्कता बनाने के निर्देश

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में वनाग्नि रोकथाम को लेकर बैठक लेते हुए सभी...

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जिलाधिकारी ने की स्वरोजगार परक योजनाओं की समीक्षा,लंबित आवेदनों के शीघ्र निस्तारण और लक्ष्य पूर्ति के दिये निर्देश

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। विभिन्न स्वरोजगार परक योजनाओं के तहत गठित जिला प्राधिकृत समिति,जिला स्तरीय समीक्षा समिति तथा जिला स्वरोजगार प्रोत्साहन एवं...

उत्तराखंड के प्रसिद्ध उद्योगपति समाजसेवी एवं कुमार ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के स्वामी श्री शिवकुमार अग्रवाल जी ने आज रुद्रपुर में प्रेस को संबोधित किया उन्होंने उत्तराखंड में खनन, पर्यटन पर खुलकर अपनी बातें पत्रकारों के समक्ष रखी उन्होंने बताया कि मेरी उम्र 75 वर्ष है मुझे अपनी व्यापारिक लाइफ का 60 वर्षों यानि 1966 से आज तक का व्यावसायिक अनुभव है।हमारी कंपनी LSC Infratech Ltd पिछले 35 वर्षों से उत्तराखंड में मिनरल एवं माइनिंग सेक्टर में कार्य कर रही हैं। हमारी कंपनी एशिया की सबसे बड़ी मिनरल प्रोसेसिंग कंपनी है। हमारी 10 यूनिट्स उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में हैं तथा पूरे देश में हमारी कुल 16 व्यापारिक इकाई है व 2000 सदस्यों की हमारी पारिवारिक प्रोफेशनल पार्टनर की संस्था है।आजकल समाज में, उत्तराखंड की मिनरल पॉलिसी को लेकर जो आलोचना हो रही है, उसके संदर्भ में, मैं यह कहना चाहता हूँ कि उत्तराखंड में, हमारे 35 वर्षों के अनुभव में यह पहली बार है कि विगत डेढ़ साल में खनन से उत्तराखंड सरकार को चार गुना राजस्व प्राप्त हुआ है, जो 300 से बढ़कर 1200 करोड़ हो गया है, जिसका उपयोग विकास कार्यों में किया जाएगा।इससे पहले सरकार के विभागो/सिस्टम की कमजोरी से मिनरल की लीकेज और चोरी हो रही थी, जबकि स्टोन क्रशिंग इंडस्ट्री को कोई लाभ नहीं हो रहा था, क्योंकि उद्योगो को मुनाफा नहीं हो रहा था।उत्तराखण्ड स्टोन क्रशिंग इंडस्ट्री केवल समाज व व्यवस्था तथा बहुत सारे विभागों के लिये ही कार्य कर रहे थे। इसे ऐसे कहते हेै कि तेरे हाथों में पहनाकर चूडियाँ, मौज बंजारे ले रहे थे।लेकिन आज उत्तराखंड में स्टोन क्रशिंग की करीब 400 इकाईयां है जो राज्य का सबसे अधिक रोजगार देने वाला केवल एक मात्र ऐसा उद्योग है। जिससे लगभग 7 लाख परिवार के लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।स्टोन क्रशिंग उद्योग उत्तराखंड का सबसे बड़ा उद्योग है, इससे रॉयल्टी, फारेस्ट ट्रांजिट, जीएसटी, आयकर तथा आरटीओ टैक्स के मद में सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 10000 करोड रूपये का राजस्व, सभी विभागो जीएसटी (4500 करोड रूपये), आबकारी (2300 करोड रूपये), आरटीओ (1600 करोड रूपये) से ज्यादा 10,000 करोड मिल रहा है।टेंडर प्रक्रिया को अपनाने के लिए माईनिंग विभाग ने हमें संपर्क किया और कहा कि टेंडर प्रक्रिया में भाग लें, लेकिन हमने स्पष्ट रूप से मना कर दिया। हमने कहा कि हम इस तरह की रॉयल्टी कलेक्शन प्रणाली से नहीं जुड़ सकते, क्योंकि यह एक बहुत कठिन कार्य है।प्रदेश के मुखिया माननीय श्री पुष्कर सिंह धामी जी और खनन विभाग की टीम ने इस सेक्टर में बहुत बड़ा रिफार्म करके समाज, उद्योग, रियासत के हित में बहुत अच्छी पालिसी बनायी है, वर्तमान मिनरल पालिसी उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में भी लागू है।जिससे बहुत सारे विभागों का Corruption and irregularity दूर हुआ है तथा प्रदेश को 10 हजार करोड़ रूपये का राजस्व मिल रहा है, ग्राहको की परेशानी दूर हुई है और उन्हें मिनरल सस्ता मिल रहा है। माईनिंग सेक्टर unorganized से organized हुआ है। माईनिंग का काम systematic और professionalized हुआ है, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री के व्यवसाय की परेशानी दूर होकर उनको सुख मिला है उनका नफा बढ़ा है।उत्तराखण्ड स्टोन क्रेशर के स्वामियों ने टैक्नोलाजी में काफी रिसर्च और डेवलपमेन्ट करके कोरसैण्ड (धूला रेता) तथा एमसैण्ड (मैन्यूफैक्चरिंग सैण्ड) बनाने की तकनीकी विकसित की, आज देश के अन्य राज्यों के द्वारा हमारी कंपनी स् LSC infratech से प्रेजेन्टेशन लेकर अपने राज्य में एम-सैण्ड पालिसी बनायी है।मिनरल की मार्केट जो पहले सिकुड कर छोटी हो चुकी थी, रिफार्म होने से इसका जोन उत्तर प्रदेश में बढ़ कर 150 किमी0 तक हो गया है जो कि एक उपलब्धि है।इस इंडस्ट्री का बहुत बडा फायदा यह भी हैं कि जितना भी रेवेन्यू लगभग 10 हजार करोड़ इस इंडस्ट्री से जनरेट होता है व लेबर, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री जितना कमाती है, उनका सारा रेवेन्यू उत्तराखंड राज्य में ही खर्च होता है, बाकी अन्य इंडस्ट्री 25 साल से यहाँ लगी है, उनका सारा रेवेन्यू इस राज्य में नहीं लगता है, उनका सिर्फ सैलरी का पैसा ही यहाँ खर्च होता है, बाकी उनका प्रोफिट यहाँ इनवेस्ट नहीं होता। इसलिए खनन उद्योग उत्तराखंड के विकास के लिये बहुत महत्वपूर्ण है।उत्तराखंड सरकार को इस सेक्टर पर पूरा फोकस कर, भविष्य में भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए तथा उद्योग को पूर्ण सहयोग करना चाहिये। मैं यहाँ यह कहना चाहूँगा, कि कुछ स्टोन क्रेशर जो 40 साल पहले लगे थे, अब वह शहर के बीच में आ गये हैं। वर्तमान में शहर की आबादी के बीचों – बीच चल रहे है। उनको आबादी से बाहर ले जाने की जरूरत है।सरकार को शहर के बाहर सरकारी जमीन में स्टोन क्रेशर जोन घोषित करने चाहिये। सरकार को समाज और रियासत के हित में उचित फ्यूचर प्लानिंग करनी चाहिये।एक बार मैं पुनः दोहराता हूँ कि उत्तराखंड की जो वर्तमान मिनरल पालिसी है, वह समाज, उद्योग और प्रदेश के हित में सबसे बेहतरीन पालिसी है।धन्यवाद,

आरटीओ होते है जिम्मेदार, आखिर कब निभाएंगे यह अधिकारी अपने फर्ज के प्रति ली गईं शपथ

काशीपुर -ओवरलोड ट्रक, डम्पर, सड़को पर बखौफ दौड़ते है, सड़क पर चलते मुसाफिर अपने वाहनों से और पैदल चलते राहिगीर...

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