पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के लिए गर्व का क्षण उस समय सामने आया,जब क्षेत्र के युवा शिक्षाविद् डॉ.अतुल बमराड़ा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने शोध का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण कर न केवल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया,बल्कि देवभूमि उत्तराखंड का नाम भी रोशन किया। नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सामाजिक विज्ञान संकाय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ.बमराड़ा ने अपने शोध पत्र को मजबूती के साथ प्रस्तुत किया। यह सम्मेलन समावेशी और सतत सामाजिक परिवर्तन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाएं जैसे समसामयिक और वैश्विक महत्व के विषय पर केंद्रित रहा,जिसमें दुनिया भर के विद्वानों ने सहभागिता की। इस सम्मेलन का आयोजन त्रिभुवन विश्वविद्यालय तथा एलोशियन पब्लिकेशंस के सहयोग से किया गया,जिसने इसे और अधिक वैश्विक आयाम प्रदान किया। डॉ.अतुल बमराड़ा ने एड्रेसिंग ह्यूमन वल्नेरेबिलिटीज इन साइबर सिक्यूरिटी विषय पर अपने शोध के माध्यम से यह रेखांकित किया कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी चुनौती नहीं,बल्कि मानवीय व्यवहार और जागरूकता से जुड़ा एक गंभीर विषय है। उनके शोध में यह दर्शाया गया कि कैसे मानवीय कमजोरियां-जैसे लापरवाही,जागरूकता की कमी और साइबर हाइजीन का अभाव-डिजिटल सुरक्षा को खतरे में डालती हैं और इन्हें दूर करने के लिए व्यवहारिक एवं तकनीकी दोनों स्तरों पर समाधान आवश्यक हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत इस शोध को उपस्थित विशेषज्ञों,शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं द्वारा सराहा गया। सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से सामाजिक समावेशन और सतत विकास की दिशा में संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई,जिसमें डॉ.बमराड़ा का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। डॉ.बमराड़ा ने बताया कि यह शोध कार्य विगत वर्ष छबी सेवा फाउंडेशन के सहयोग से पूर्ण किया गया था,जिसे अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस उपलब्धि पर संस्था के निदेशक पार्थ रॉय एवं अविनाश गारगोटे ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए इसे क्षेत्र और देश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। डॉ.अतुल बमराड़ा की यह सफलता न केवल युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा है,बल्कि यह भी साबित करती है कि छोटे पहाड़ी क्षेत्रों से निकलकर भी वैश्विक मंच पर उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।








