श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर स्थित मेडिकल कॉलेज एवं बेस चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक पारदर्शी,सुरक्षित और जनसुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। सामाजिक सरोकारों से जुड़े आरटीआई कार्यकर्ता कुशलानाथ ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना को एक विस्तृत सुझाव पत्र (ज्ञापन) सौंपते हुए अस्पताल व्यवस्थाओं में सुधार हेतु कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उठाया। ज्ञापन में अस्पताल की कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए गए। इसमें सबसे प्रमुख रूप से यह मांग की गई कि मेडिकल कॉलेज एवं बेस चिकित्सालय में कार्यरत सभी नियमित,संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों-विशेषकर नर्सिंग स्टाफ के लिए गले में पहचान पत्र (आई कार्ड) और वर्दी पर नाम पट्ट (नेम प्लेट) अनिवार्य किया जाए। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को संबंधित कर्मचारियों से संवाद स्थापित करने में आसानी होगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। सुरक्षा की दृष्टि से ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया कि आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराया जाए,ताकि अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। इसके साथ ही प्राचार्य से यह अनुरोध भी किया गया कि अस्पताल परिसर में स्थित जन औषधि केंद्र को 24 घंटे संचालित किया जाए,जिससे मरीजों और तीमारदारों को हर समय सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध हो सकें। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह व्यवस्था राहत प्रदान कर सकती है। ज्ञापन में अस्पताल की भीड़-भाड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए यह सुझाव भी रखा गया कि प्रत्येक मरीज के साथ रहने वाले तीमारदारों के लिए विशेष रंग के पहचान पत्र जारी किए जाएं तथा एक मरीज के साथ अधिकतम दो तीमारदारों की ही अनुमति सुनिश्चित की जाए। इससे वार्डों में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त वार्डों में स्वच्छता व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की मांग करते हुए कहा गया कि जहां तीमारदार बैठते हैं,वहां की खिड़कियों,बैठने की बेंचों और अलमारियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए,ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके और मरीजों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना ने इन सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक आश्वासन दिया। उन्होंने संबंधित विभागों एवं कार्यकारी संस्थाओं के प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि इन सुझावों पर शीघ्र कार्यवाही कर अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार लाया जाएगा। यह पहल न केवल अस्पताल की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है,बल्कि यह भी दर्शाती है कि जनसहभागिता और जागरूक नागरिकों की भूमिका से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी व जनोन्मुख बनाया जा सकता है।








