श्रीनगर गढ़वाल। साहित्य और कविता के प्रति समर्पित कविता कारवां श्रीनगर की अगस्त माह की बैठक अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सभाकक्ष में आयोजित की गई। साहित्यिक गोष्ठी में नगर के काव्य रसिकों,साहित्यप्रेमियों एवं रचनाकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विभिन्न प्रतिष्ठित कवियों की कालजयी एवं समसामयिक रचनाओं का भावपूर्ण पाठ किया। कविता,संवेदना और विचारों से सजी इस बैठक ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों को लंबे समय तक बांधे रखा। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ.आर.एन.गैरोला ने प्रख्यात कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की चर्चित कविता तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा एहसास हुआ है कि दिशाएं पास आ गई हैं का प्रभावशाली पाठ करते हुए कविता के भाव और संवेदनाओं को श्रोताओं तक पहुंचाया। कौशल्या नैथानी ने जुगल मिलन की समसामयिक रचना भ्रष्टाचार की लड़ाई का पाठ किया। उनकी प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत विषय पर साहित्य की भूमिका को सामने रखा गया। शिव सिंह नेगी ने प्रसिद्ध कवि बालकृष्ण शर्मा नवीन की रचना भूल-भुलैया का प्रभावशाली वाचन किया। वहीं माधुरी नैथानी ने सोशल मीडिया से उद्धृत प्रीति सृजनिका की कविता कलश का भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया। काव्य गोष्ठी में राजेन्द्र प्रसाद कपरुवाण ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की अमर कृति ‘रश्मिरथी’ के महत्वपूर्ण अंश प्रस्तुत कर वीर रस एवं ओज से वातावरण को भर दिया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने विशेष सराहना प्रदान की। सीमा मिश्रा ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रेरणादायी रचना नर हो,न निराश करो मन को का सुंदर पाठ किया। कविता की प्रेरणादायी पंक्तियों ने उपस्थित श्रोताओं में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। नगर निगम श्रीनगर के पार्षद प्रवेश चमोली ने सुप्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की रचना मेरा नया बचपन का श्रेष्ठ वाचन कर कविता के बालमन और संवेदनात्मक पक्ष को जीवंत किया। इसी क्रम में अनीता नौडियाल ने संत कवि कबीरदास के चयनित दोहों का पाठ करते हुए उनकी सामाजिक चेतना,जीवन-दर्शन और सहज भाषा की विशेषताओं को सामने रखा। नीरज नैथानी ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल की रचना मेरे उर से उमड़ रही गीतों की धारा का पाठ कर पहाड़ की संवेदनाओं और प्रकृति से जुड़े काव्य संसार को स्वर दिया। बैठक में विभिन्न रचनाओं के माध्यम से जहां सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति मिली,वहीं प्रेम,प्रकृति,राष्ट्रभावना,जीवन-दर्शन,मानवीय संवेदनाओं और सकारात्मक चिंतन जैसे विविध विषयों ने साहित्यिक वातावरण को समृद्ध किया। उपस्थित काव्य रसिकों ने एक-दूसरे की प्रस्तुतियों को ध्यानपूर्वक सुना और साहित्य के प्रति अपने जुड़ाव को साझा किया। कार्यक्रम के समापन से पूर्व अनीता नौडियाल ने प्रस्ताव रखा कि कविता कारवां की आगामी सितंबर माह की बैठक उनके आवास श्रीकोट गंगानाली में आयोजित की जाए। उनके इस आत्मीय एवं सुखद प्रस्ताव का उपस्थित सभी सदस्यों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। इससे आगामी बैठक को लेकर साहित्यप्रेमियों में उत्साह और बढ़ गया। कविता कारवां की यह बैठक इस बात का प्रमाण बनी कि आज के डिजिटल युग में भी कविता और साहित्य लोगों को जोड़ने तथा समाज में संवेदनशीलता,चिंतन और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। श्रीनगर में नियमित रूप से आयोजित हो रहा यह साहित्यिक प्रयास स्थानीय साहित्यिक वातावरण को निरंतर समृद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रहा है।








