पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की महिलाओं के हाथ अब सिर्फ घर-गृहस्थी तक सीमित नहीं हैं,बल्कि यही हाथ स्वरोजगार के नए अवसर गढ़कर परिवार की आर्थिक तस्वीर बदल रहे हैं। कभी रोजगार के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बन रही हैं और स्वयं रोजगार हासिल करने के साथ अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के दरवाजे खोल रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल और ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण,ऋण और आजीविका के लिए आवश्यक सहयोग मिलने से पहाड़ के गांवों में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी जा रही है। पौड़ी विकास खण्ड के खांड्यूंसैंण की कलावती देवी और पौड़ी मुख्यालय के समीप ग्राम गहड़ की रामेश्वरी देवी इसी बदलाव की प्रेरणादायी मिसाल हैं। दोनों महिलाओं ने सरकारी एवं संस्थागत सहयोग से मिले अवसरों को अपनी मेहनत और हुनर से स्वरोजगार में बदला और अब अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ दूसरों को भी काम से जोड़ रही हैं। खांड्यूंसैंण निवासी कलावती देवी मां भगवती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्हें हिमोत्थान सोसाइटी की ओर से 20 हजार रुपये का अनुदान मिला,जिससे उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी। इसके साथ ही उन्होंने समूह की अन्य महिलाओं के साथ ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से 13 दिवसीय जूट बैग निर्माण प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। प्रशिक्षण और सहयोग को अवसर में बदलते हुए कलावती देवी वर्तमान में सिलाई के साथ ब्यूटी पार्लर का कार्य कर रही हैं। उनके स्वरोजगार से एक अन्य महिला को भी रोजगार मिला है। वह अब जल्द ही जूट बैग निर्माण का कार्य शुरू करने की तैयारी में हैं,जिसमें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं को भी जोड़ा जाएगा। कलावती देवी के अनुसार वर्तमान में उन्हें करीब 15 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है,जिसमें लगभग 10 से 12 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत हो जाती है। उनका कहना है कि स्वरोजगार शुरू करने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और अब उन्हें रोजगार के लिए गांव से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। पौड़ी मुख्यालय के समीप गगाड़स्यूं क्षेत्र के ग्राम गहड़ निवासी रामेश्वरी देवी भी स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। डांडा नागराजा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी रामेश्वरी देवी ने पुलिस लाइन के समीप ग्राम दुकान स्थापित की है। उनकी दुकान में मंडुवा,झंगोरा,पहाड़ी दालें,जैम,अचार,बद्री गाय का घी और स्थानीय सब्जियों सहित विभिन्न पहाड़ी उत्पाद उपलब्ध हैं। स्थानीय उत्पादों को बाजार देने के साथ-साथ यह दुकान रामेश्वरी देवी के लिए आय का स्थायी साधन बन गई है। वर्तमान में उन्हें इससे करीब छह से सात हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय हो रही है। रामेश्वरी देवी ने बताया कि वर्ष 2025 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन,नाबार्ड और हिमोत्थान सोसाइटी के सहयोग से उन्होंने तीन लाख रुपये का सामुदायिक ऋण लिया था। इसी आर्थिक सहयोग के आधार पर उन्होंने ग्राम दुकान शुरू की। आज उनकी दुकान स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी भूमिका निभा रही है। ब्लॉक मिशन प्रबंधक विजय बिष्ट ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण,ऋण एवं अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका सकारात्मक असर ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि जनपद में कई महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाओं को विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं,ताकि वे गांव में रहकर अपनी आजीविका मजबूत करने के साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर सकें। कलावती और रामेश्वरी की कहानी इस बदलाव की गवाही देती है कि यदि पहाड़ की महिलाओं को प्रशिक्षण,पूंजी और बाजार का उचित सहारा मिले तो वे रोजगार मांगने वाली नहीं,बल्कि रोजगार देने वाली बन सकती हैं। यही ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की वह तस्वीर है,जो पहाड़ के गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में नई उम्मीद जगा रही है।






