श्रीनगर गढ़वाल। सावन की पावन बेला,हरियाली की अनुपम छटा और शिवभक्ति से सराबोर वातावरण के बीच किड्स वर्ल्ड स्कूल श्रीकोट में आयोजित ग्रीन कलर डे बच्चों की प्रतिभा,भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था का सुंदर संगम बन गया। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे विद्यालय परिसर को भक्ति,उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। सावन मास के शुभ अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम की थीम देवता और देवियां रखी गई थी। इस अवसर पर विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों ने हरे रंग की आकर्षक वेशभूषा धारण कर भगवान शिव,माता पार्वती,श्रीकृष्ण,राधा,गणेश,हनुमान सहित विभिन्न देवी-देवताओं का स्वरूप धारण किया। उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का सबसे आकर्षक क्षण वह रहा जब नन्हे विद्यार्थियों ने भगवान शिव के भजनों पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। ताल,लय और भावपूर्ण अभिनय से सजी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। पूरा विद्यालय परिसर शिवमय वातावरण,हरियाली और भारतीय संस्कृति की सुंदर झलकियों से जीवंत दिखाई दिया। विद्यालय की प्रधानाचार्या रेखा रावत ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं रचनात्मक आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना ही नहीं,बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति,धार्मिक परंपराओं,नैतिक मूल्यों और सामाजिक संस्कारों से भी जोड़ना है,ताकि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझते हुए जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों में संस्कार,आत्मविश्वास,रचनात्मकता और मंच पर अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करने के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों ने भी बच्चों की प्रतिभा की मुक्तकंठ से सराहना की और विद्यालय परिवार के प्रयासों की प्रशंसा की। इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक प्रदीप जोशी,निर्मला झिंकवाण,ज्योति गैरोला,प्रियंका मलेथा,दीप्ति सेमवाल,प्रतिभा रावत,सुमन कंडारी,अनीशा,रूपा थपलियाल,रंजना रावत,श्रुति रावत,अंजली रावत,केशव सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। विद्यालय परिसर में बच्चों की मासूम मुस्कान,रंग-बिरंगी वेशभूषा और भक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि यदि बचपन से ही बच्चों को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ा जाए तो वे भविष्य में एक संस्कारित,संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज का नेतृत्व कर सकते हैं।








