श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन का दस्तावेज नहीं,बल्कि विकसित,आत्मनिर्भर,ज्ञान-सम्पन्न और सांस्कृतिक रूप से सशक्त भारत के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है। इसी संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने और शिक्षा को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत 1 अगस्त शनिवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : विकसित भारत @2047 की आधारशिला विषय पर अतिथि व्याख्यान एवं परिचर्चा का भव्य आयोजन किया गया। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम संकर हाइब्रिड माध्यम से संपन्न हुआ,जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक,शोधार्थी,विद्यार्थी तथा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षाविदों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों,भारतीय ज्ञान परंपरा,नवाचार,कौशल विकास,अनुसंधान तथा विकसित भारत के निर्माण में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत को ज्ञान आधारित वैश्विक महाशक्ति बनाने का दूरदर्शी रोडमैप है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 का सपना तभी साकार होगा,जब शिक्षा को केवल परीक्षा और प्रमाणपत्र तक सीमित न रखकर उसे जीवन,समाज,संस्कृति,नवाचार,कौशल और नैतिक मूल्यों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों में रचनात्मकता,वैज्ञानिक दृष्टिकोण,नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता का विकास करती है। भारतीय ज्ञान परंपरा,मातृभाषा आधारित शिक्षा,अनुसंधान संस्कृति और तकनीकी नवाचारों के समन्वय से ही भविष्य का सशक्त भारत तैयार होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर नवाचारपूर्ण पहल कर रहा है और विद्यार्थियों को वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग झारखंड के कुलपति प्रो.सी.बी.शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन का ऐतिहासिक दस्तावेज है। यह नीति विद्यार्थियों को केवल रोजगारोन्मुख नहीं,बल्कि जिम्मेदार,संवेदनशील और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित नागरिक बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा,जब विश्वविद्यालय शिक्षा,अनुसंधान,कौशल विकास,नवाचार,उद्यमिता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को एक साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से आज देश के दो करोड़ से अधिक विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,बहुविषयक अध्ययन,डिजिटल शिक्षण और कौशल विकास का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आने वाले समय में भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा सामग्री का विस्तार शिक्षा को और अधिक समावेशी तथा सुलभ बनाएगा। कार्यक्रम संयोजक डॉ.अमरजीत सिंह परिहार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना को समाज तक पहुँचाना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा,भारतीय भाषाओं और जीवन मूल्यों को शिक्षा के केंद्र में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को मूल्यपरक शिक्षा,नवाचार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित कर रहा है। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन हिंदी विभाग के डॉ.विश्वेश वाग्मी ने किया,जबकि डॉ.पुनीत वालिया ने सभी अतिथियों,प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ.प्रशांत कंडारी,डॉ.राकेश नेगी,डॉ.नागेंद्र रावत,डॉ.अनूप सेमवाल,डॉ.कपिल पंवार,डॉ.सुभाष,डॉ.चंद्रशेखर जोशी सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक,शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा,आधुनिक शिक्षा,कौशल विकास,अनुसंधान और नैतिक मूल्यों का समन्वय कर विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में विश्वविद्यालय अपनी अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।








