श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभाग में शुक्रवार को गुरु-शिष्य परंपरा का एक ऐसा प्रेरणादायी और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला,जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को भाव-विभोर कर दिया। विभाग के पूर्व छात्र-छात्राओं द्वारा अपने प्रिय गुरु एवं वरिष्ठ समाजशास्त्री प्रो.किरण डंगवाल के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा,बल्कि यह गुरु के प्रति श्रद्धा,सम्मान और आत्मीयता का जीवंत उत्सव बन गया। समारोह के मुख्य अतिथि एवं हिमालयी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.जे.पी.पचौरी ने कहा कि शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होते। उनका पद भले समाप्त हो जाए,लेकिन उनके संस्कार,विचार और शिक्षा विद्यार्थियों के माध्यम से पीढ़ियों तक जीवित रहती है। उन्होंने कहा कि प्रो.किरण डंगवाल ने हजारों विद्यार्थियों को केवल समाजशास्त्र का ज्ञान ही नहीं दिया,बल्कि उन्हें संवेदनशील,जिम्मेदार और समाज के प्रति समर्पित नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी। राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो.एम.एम.सेमवाल ने कहा कि प्रो.डंगवाल का संपूर्ण शैक्षणिक जीवन अनुशासन,सादगी,ईमानदारी और उत्कृष्ट शिक्षण का अनुपम उदाहरण रहा है। वहीं पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ.अरविन्द दरमोड़ा ने कहा कि प्रो.डंगवाल ने समाजशास्त्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध कार्यों और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को नई पहचान दिलाई। समाजशास्त्र एवं समाजकार्य विभागाध्यक्ष प्रो.जे.पी.भट्ट ने कहा कि प्रो.किरण डंगवाल ने सदैव विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने जानकारी दी कि प्रो.डंगवाल ने विभाग के आर्थिक रूप से कमजोर एवं मेधावी विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से पांच लाख रुपये की छात्रवृत्ति विश्वविद्यालय को समर्पित की है। उन्होंने कहा कि यह योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और अनेक विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देगा। कार्यक्रम के दौरान प्रो.किरण डंगवाल के शैक्षणिक जीवन,शोध उपलब्धियों और सामाजिक योगदान पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। इसे देखकर सभागार में मौजूद कई पूर्व छात्र-छात्राएं भावुक हो उठे। उन्होंने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि प्रो.डंगवाल ने उन्हें केवल विषय का ज्ञान ही नहीं दिया,बल्कि जीवन में संघर्ष करना,सत्यनिष्ठा बनाए रखना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना भी सिखाया। इस अवसर पर प्रो.राकेश नेगी,डॉ.नरेंद्र चौहान,डॉ.हनुमन्त वाघमेरे,प्रो.उमा बहुगुणा,डॉ.दिनेश कुमार,प्रो.ए.आर.डंगवाल,डॉ.नितिन बिष्ट,डॉ.ऋतु,डॉ.कपिल पंवार सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक,शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह में छात्रसंघ अध्यक्ष महिपाल बिष्ट,अनुराधा पुरोहित,शिवांक नौटियाल,राज प्रकाश,देवकांत देवराड़ी,बीरेंद्र सिंह,आयुष भारद्वाज,सारांश बड़थ्वाल सहित बड़ी संख्या में पूर्व छात्र-छात्राओं एवं गणमान्य नागरिकों ने प्रो.किरण डंगवाल का शॉल,स्मृति-चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया तथा उनके स्वस्थ,दीर्घायु एवं सक्रिय जीवन की कामना की। समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुरु का सम्मान केवल परंपरा नहीं,बल्कि भारतीय संस्कृति की वह अमूल्य विरासत है,जो पीढ़ियों को ज्ञान,संस्कार और जीवन का सही मार्ग दिखाती है। गुरु और शिष्य के बीच का यह अटूट संबंध ही शिक्षा की सबसे बड़ी शक्ति है।







