श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू की जा रही नई व्यवस्था को लेकर पौड़ी जनपद में विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। मिशन प्रबंधन द्वारा एक आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से तैयार किए गए नए मोबाइल ऐप से उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देशों का एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने खुलकर विरोध करने का ऐलान किया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब पहले से ही कई स्तरों पर उनकी उपस्थिति दर्ज की जा रही है और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है,तो नई ऐप आधारित व्यवस्था लागू करने का औचित्य समझ से परे है। इसी मामले को लेकर एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे नई ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था का जनपद में विरोध करेंगे। एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि विभाग द्वारा पिछले वर्ष ही आधार आधारित बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके अलावा कर्मचारी उपस्थिति पंजिका में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं तथा कई स्थानों पर रियल टाइम बायोमैट्रिक मशीन के माध्यम से भी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जियोटैग फोटो के माध्यम से कर्मचारियों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जा रही है। ऐसे में एक कर्मचारी को प्रतिदिन तीन से चार अलग-अलग माध्यमों से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी पड़ रही है। अब इसके ऊपर एक और ऐप आधारित व्यवस्था लागू किए जाने से कर्मचारियों पर अनावश्यक अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। संघ अध्यक्ष ने कहा कि कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं,लेकिन उपस्थिति के नाम पर बार-बार नई व्यवस्थाएं लागू करना कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। 20 साल में एचआर पॉलिसी नहीं,एक माह में ऐप तैयार संघ के जिला सचिव सुनील खण्डूड़ी ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एनएचएम में कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए करीब 20 वर्षों में एक प्रभावी एचआर पॉलिसी तक लागू नहीं हो पाई है। लेकिन कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए महज एक माह में नया ऐप तैयार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जब कर्मचारी वेतन वृद्धि,समान कार्य के लिए समान वेतन तथा सेवा संबंधी अन्य मांगें उठाते हैं,तब बजट की कमी का हवाला दिया जाता है। लेकिन आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से ऐप तैयार कराने और उसके संचालन पर खर्च करने के लिए बजट की कमी सामने नहीं आती। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से कंपनियों को भुगतान किया जा रहा है,जबकि कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलने के बजाय उन पर निगरानी और प्रक्रियाओं का बोझ बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों ने यह भी सवाल उठाया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले वर्ष आधार आधारित बायोमैट्रिक मशीनों की व्यवस्था पर भारी भरकम धनराशि खर्च की गई। यदि वह व्यवस्था अभी भी प्रभावी है और कर्मचारियों को उसमें उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है,तो फिर उसी के साथ नए ऐप के माध्यम से भी उपस्थिति दर्ज कराने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें पुरानी बायोमैट्रिक मशीन,उपस्थिति पंजिका और नए ऐप सहित कई माध्यमों से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी पड़ेगी। इससे कर्मचारियों का समय भी प्रभावित होगा और फील्ड में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपलब्धता पर भी इसका असर पड़ सकता है। नए ऐप के विरोध का एक प्रमुख कारण कर्मचारियों का निजी एवं संवेदनशील डेटा भी बताया जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने चिंता जताई कि उनकी व्यक्तिगत जानकारियां एक निजी आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से संचालित ऐप में दर्ज होंगी। ऐसे में डेटा की सुरक्षा,उसके इस्तेमाल और गोपनीयता को लेकर कर्मचारियों में सवाल हैं। कर्मचारियों ने मांग की है कि किसी भी नई डिजिटल व्यवस्था को लागू करने से पहले उसकी पारदर्शिता,डेटा सुरक्षा,तकनीकी विश्वसनीयता और कर्मचारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि पौड़ी जनपद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं आउटसोर्स व्यवस्था के तहत करीब 345 कर्मचारी विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं में तैनात हैं। ये कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मूल समस्याओं-सेवा सुरक्षा,वेतन वृद्धि,समान कार्य-समान वेतन और प्रभावी एचआर नीति पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उपस्थिति की नई-नई व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि नई ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था को लेकर उनकी आपत्तियों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे इसके विरोध को और तेज कर सकते हैं। ज्ञापन देने के दौरान अनिल रावत,शरद रौतेला,सुनील सिंह,प्रदीप रावत,दीप सौरभ,सुरेन्द्र नेगी,अतुल उनियाल,शिवानी सहित अनेक कर्मचारी मौजूद रहे। अब देखने वाली बात यह होगी कि कर्मचारियों की आपत्तियों के बाद मिशन प्रबंधन नई ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था को लेकर क्या निर्णय लेता है और लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा कर्मचारियों की अन्य मांगों पर शासन एवं विभाग की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।









