मसूरी में कभी ठहरे थे देश के दो दिग्गज, एक ही छत के नीचे सरदार पटेल और नेहरू की यादें

 

कमला कैसल में मई 1948 में आए थे लौह पुरुष, छह साल बाद पंडित नेहरू ने भी बिताया था समय; ऐतिहासिक भवन मिटा, लेकिन परिवार के पास आज भी सुरक्षित हैं दुर्लभ पत्र और तस्वीरें

 

मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी की पहचान सिर्फ खूबसूरत वादियों और पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। शहर की कई पुरानी इमारतें देश के इतिहास से भी जुड़ी रही हैं। ऐसी ही एक ऐतिहासिक इमारत कैमल्स बैक रोड स्थित कमला कैसल एस्टेट थी, जहां देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अलग-अलग समय पर ठहरे थे। आज यह भवन अस्तित्व में नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी यादें, पत्र और तस्वीरें एक परिवार ने अब तक सहेजकर रखी हैं।

 

सरदार पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने अपने परिवार से जुड़ा यह अनसुना इतिहास साझा किया है। उनके पिता स्वर्गीय आर.जी.आर. भारद्वाज अपने समय के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य थे। उनका निवास कृष्णा निवास एस्टेट कैमल्स बैक रोड पर था, जो कमला कैसल के ठीक नीचे स्थित था। गोपाल के अनुसार, मई 1948 में सरदार पटेल अपने अंतिम मसूरी दौरे पर निजी प्रवास के लिए कमला कैसल में ठहरे थे।

 

दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने के बाद आए थे मसूरी

 

गोपाल भारद्वाज के मुताबिक, मार्च 1948 में दिल्ली में सरदार पटेल को दिल का दौरा पड़ा था। चिकित्सकों ने उन्हें पहाड़ों में आराम करने की सलाह दी। इसके बाद मई में वह अपनी पुत्री मणिबेन पटेल के साथ मसूरी पहुंचे। मणिबेन इस दौरान उनकी देखभाल कर रही थीं। मसूरी प्रवास के दौरान सरदार पटेल उनके पिता आर.जी.आर. भारद्वाज से मिलने कृष्णा निवास भी आए।

 

गोपाल बताते हैं कि सरदार पटेल अपनी पुत्री मणिबेन के विवाह को लेकर चिंतित थे। उन्होंने उनके पिता से मणिबेन की कुंडली दिखाई और इस संबंध में सलाह ली। उनके पिता ने कुंडली देखने के बाद विवाह योग नहीं होने की बात कही। सरदार पटेल के आग्रह पर विशेष पूजा-अनुष्ठान भी कराए गए। हालांकि मणिबेन ने विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन पिता की सेवा तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण में लगा दिया।

 

एक पत्र में दर्ज है सरदार पटेल की लंबी उम्र के लिए की गई प्रार्थना

 

इस मुलाकात की याद केवल मौखिक संस्मरण तक सीमित नहीं है। गोपाल भारद्वाज के पास 26 मई 1948 का एक पत्र आज भी सुरक्षित है। उनके अनुसार, उनके पिता ने 23 मई 1948 को सरदार पटेल के दीर्घ जीवन की कामना के लिए की गई पूजा और प्रार्थना के संबंध में पत्र भेजा था। इसके जवाब में उप प्रधानमंत्री के निजी सचिव गुलजार सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए पत्र भेजा।

 

पत्र में कृष्णा निवास, कैमल्स बैक रोड, मसूरी का पता दर्ज है। यह दस्तावेज उस दौर में मसूरी और देश के शीर्ष नेतृत्व के बीच बने संपर्क की एक दुर्लभ निशानी है।

 

1954 में नेहरू भी पहुंचे थे उसी ऐतिहासिक भवन में

 

कमला कैसल की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। गोपाल भारद्वाज बताते हैं कि मई 1954 में पंडित जवाहरलाल नेहरू भी इसी भवन में ठहरे थे। वह उनके पिता से मिलने कृष्णा निवास पहुंचे और अपनी जन्मकुंडली भी बनवाई। गोपाल के अनुसार, नेहरू ने उनके पिता को जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद देते हुए स्वयं पत्र लिखा था। उनके सचिव की ओर से उर्दू भाषा में भी एक पत्र भेजा गया था। दोनों पत्र परिवार के पास सुरक्षित हैं।

 

नेहरू की एक तस्वीर भी गोपाल के पास मौजूद है, जिसमें वह कमला कैसल के बाहर बगीचे में खड़े दिखाई देते हैं। इस तरह एक ही भवन देश के दो प्रमुख नेताओं की मसूरी यात्रा का साक्षी रहा।

 

इमारत चली गई, इतिहास की निशानियां बचीं

 

गोपाल भारद्वाज को सबसे अधिक दुख इस बात का है कि जिस कमला कैसल में सरदार पटेल और नेहरू ठहरे थे, वह पुरानी इमारत अब नहीं रही। भवन को ध्वस्त कर वहां आलीशान होटल बनाया जा रहा है। गोपाल बताते हैं कि उस भवन से उनकी कई व्यक्तिगत यादें जुड़ी थीं। उन्होंने इमारत को गिराए जाने से पहले उसकी कुछ तस्वीरें भी खींच ली थीं।

 

यह मामला मसूरी की ऐतिहासिक विरासत को बचाने की जरूरत पर भी सवाल खड़ा करता है। शहर में कई पुराने भवन ऐसे हैं, जिनका संबंध स्थानीय इतिहास और देश की महत्वपूर्ण घटनाओं से रहा है। लेकिन समय के साथ इनकी पहचान और महत्व खोता जा रहा है। कमला कैसल का उदाहरण बताता है कि किसी इमारत का महत्व केवल उसकी उम्र या वास्तुकला से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं और व्यक्तित्वों से भी तय होता है।

 

सरदार पटेल की जयंती पर गोपाल भारद्वाज की ओर से साझा की गईं ये यादें मसूरी के इतिहास का ऐसा अध्याय हैं, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। कमला कैसल अब भले ही नक्शे पर पुराने रूप में मौजूद न हो, लेकिन सुरक्षित पत्रों और तस्वीरों में आज भी उस दौर की कहानी जीवित है।