पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी पौड़ी में विजयादशमी पर्व के अवसर पर रावण दहन की परंपरा को भव्य स्वरूप देने के लिए स्थानीय कलाकारों ने अपनी कला,हुनर और अथक परिश्रम से 55 फीट ऊंचे रावण के विशालकाय पुतले को तैयार किया है। इस पुतले को तैयार करने में पौड़ी रामलीला समिति के कलाकारों एवं सदस्यों ने करीब 15 से 20 दिनों तक लगातार मेहनत की। उनकी इसी लगन, रचनात्मकता और सामूहिक सहयोग ने दशहरा पर्व की तैयारियों को विशेष आकर्षण प्रदान किया है। पौड़ी में रावण का पुतला तैयार करने की खास बात यह है कि इसके निर्माण के लिए बाहरी कारीगरों पर निर्भर रहने के बजाय रामलीला समिति के स्थानीय सदस्य स्वयं इसकी जिम्मेदारी निभाते हैं। बांस,कागज और अन्य आवश्यक सामग्रियों की सहायता से 55 फीट ऊंचे पुतले को आकार देना आसान काम नहीं है। इसके लिए अनुभव,तकनीकी समझ,धैर्य और आपसी तालमेल की आवश्यकता होती है। पुतले की संरचना को मजबूती प्रदान करने से लेकर उसके विभिन्न हिस्सों को व्यवस्थित करने और आकर्षक स्वरूप देने तक,समिति के सदस्यों ने अपनी मेहनत से इस कार्य को पूरा किया। दशहरे पर रावण दहन का दृश्य भले ही कुछ क्षणों का होता है,लेकिन उस भव्य दृश्य के पीछे कलाकारों की कई दिनों की मेहनत,लगन और समर्पण छिपा होता है। 15 से 20 दिनों तक पुतले के निर्माण में जुटे सदस्यों का प्रयास इस बात का प्रमाण है कि सांस्कृतिक आयोजनों की सफलता के पीछे स्थानीय प्रतिभाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इन कलाकारों का योगदान केवल एक पुतला तैयार करने तक सीमित नहीं है,बल्कि वे अपनी पारंपरिक कला के माध्यम से पौड़ी की सांस्कृतिक पहचान को भी आगे बढ़ा रहे हैं। पौड़ी रामलीला समिति के अध्यक्ष उमाचरण बड़थ्वाल एवं सचिव राम सिंह रावत के अनुसार समिति के सदस्य हर वर्ष स्वयं रावण का पुतला तैयार करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। इस वर्ष भी सदस्यों ने सामूहिक प्रयासों से 55 फीट ऊंचे रावण के पुतले को तैयार किया है। इस कार्य में आशुतोष नेगी,मंगल सिंह नेगी,प्रदीप रावत,गिरीश बड़थ्वाल,कुलदीप गुसाई,जसपाल रावत,सुशील बहुगुणा,विक्रम गुसाई,वीरेंद्र सिंह रावत,सुबोध रावत,राजपाल बिष्ट,आशुतोष नैथानी और नीरज नेगी सहित समिति के अन्य सदस्यों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। पौड़ी रामलीला समिति के सदस्यों द्वारा अपने स्तर पर रावण का पुतला तैयार करना स्थानीय प्रतिभा,सामूहिक श्रम और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण है। ऐसे प्रयासों से न केवल पारंपरिक आयोजनों की निरंतरता बनी रहती है,बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति,धार्मिक परंपराओं और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।विजयादशमी का पर्व हमें संदेश देता है कि अहंकार,अन्याय और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों,अंततः विजय सत्य,धर्म और सदाचार की ही होती है। पौड़ी में स्थानीय कलाकारों की 15 से 20 दिनों की मेहनत से तैयार हुआ 55 फीट ऊंचा रावण का पुतला इसी शाश्वत संदेश का प्रतीक है। दशहरे के अवसर पर रावण दहन के साथ जहां बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा,वहीं इस आयोजन के पीछे जुटे स्थानीय कलाकारों का हुनर और समर्पण भी समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।