देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित युवा संगम के सातवें चरण का वैलिडेटरी सेशन एवं समापन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए पश्चिम बंगाल से उत्तराखंड पहुंचे युवा प्रतिनिधियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को राष्ट्रीय एकता,सांस्कृतिक समरसता और विकसित भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण वाहक बताते हुए कहा कि युवा संगम जैसे आयोजन देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को एक सूत्र में पिरोने का सशक्त माध्यम हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के नोडल संस्थान के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के युवा प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड के विभिन्न भौगोलिक,सांस्कृतिक,सामाजिक,शैक्षिक एवं आध्यात्मिक पहलुओं को करीब से जाना। इस आयोजन में पश्चिम बंगाल की ओर से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने नोडल एजेंसी की भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के मार्गदर्शन एवं निरंतर निगरानी में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समापन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं,बल्कि देश की अखंडता,सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकात्मता को मजबूत करने का अनुपम अभियान है। पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड के बीच यह सांस्कृतिक साझेदारी भारत की विविधता में एकता की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि हजारों आवेदनों की लंबी प्रक्रिया के बाद चयनित होकर आए युवा प्रतिनिधि सौभाग्यशाली हैं। आज देश की निगाहें युवाओं पर टिकी हैं,क्योंकि आने वाले समय में विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर होगी। डॉ.निशंक ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता,आध्यात्मिक चेतना,देव संस्कृति और समृद्ध ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट पहचान है,जो पूरे विश्व को आकर्षित करती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे उत्तराखंड प्रवास के दौरान प्राप्त अनुभवों और यहां की सांस्कृतिक विरासत को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तथा अपने-अपने राज्यों में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता के दूत बनकर लौटें। समारोह में वक्ताओं ने डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक के केंद्रीय शिक्षा मंत्री के कार्यकाल के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के निर्माण एवं इसके क्रियान्वयन की दिशा में उनके नेतृत्व और प्रयासों का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय परिवार ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा,संस्कृति,कला और युवा आदान-प्रदान के माध्यम से एक भारत श्रेष्ठ भारत की अवधारणा को धरातल पर उतारने की दूरदर्शी सोच आज युवा संगम जैसे आयोजनों में दिखाई दे रही है। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद ने भी युवाओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि युवा संगम जैसे अंतरराज्यीय कार्यक्रम देश के युवाओं को अलग-अलग राज्यों की भाषा,संस्कृति,खान-पान,रहन-सहन और परंपराओं को नजदीक से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड के युवाओं के बीच विकसित हुआ आत्मीय संबंध दोनों राज्यों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक रिश्तों को और अधिक मजबूत करेगा। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ युवा संगम के नोडल अधिकारी एवं अर्थ साइंस संकाय के डीन प्रो.महावीर सिंह नेगी के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ.निशंक को पुष्पगुच्छ,शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों ने भी अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। अपने स्वागत संबोधन में प्रो.नेगी ने युवा संगम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत,साहसिक पर्यटन,पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला है। इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान युवाओं के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युवा संगम के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय की टीम के सदस्यों डॉ.नरेंद्र कुमार,डॉ.हिमशिखा गोस्वामी एवं डॉ.सर्वेश उनियाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संपूर्ण संयोजन डॉ.सर्वेश उनियाल ने किया। वहीं आईआईटी खड़गपुर की ओर से पांच फैकल्टी सदस्य भी पूरे भ्रमण कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधिमंडल के साथ जुड़े रहे। समारोह का प्रभावी संचालन डॉ.हिमशिखा गोस्वामी ने किया,जबकि अंत में डॉ.नरेंद्र कुमार ने मुख्य अतिथि डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक,विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद,विश्वविद्यालय प्रशासन,आईआईटी खड़गपुर की टीम तथा पश्चिम बंगाल से आए सभी युवा प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। युवा संगम का यह आयोजन केवल एक शैक्षणिक भ्रमण अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसने दो राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की परंपराओं,संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। निश्चित रूप से ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने के साथ ही भावी पीढ़ी में एक भारत,श्रेष्ठ भारत के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।