श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की देवभूमि के शैक्षणिक केंद्र हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों,ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के अंतर्गत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र एवं निःशुल्क सिविल सेवा प्रशिक्षण योजना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भ्रष्टाचार मुक्त समाज के निर्माण,प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे गए। कार्यक्रम की मुख्य संकल्पना केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा निर्धारित सत्यनिष्ठा से समृद्धि रही। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी राष्ट्र और समाज की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं,बल्कि ईमानदारी,पारदर्शिता,न्याय और नैतिक मूल्यों की मजबूत नींव से सुनिश्चित होती है। कार्यक्रम में वक्ता सूर्य प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि भ्रष्टाचार महज आर्थिक अनियमितता नहीं है,बल्कि यह सामाजिक न्याय,मानवीय गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था स्थापित करने के लिए शासन-प्रशासन के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी और नैतिक प्रतिबद्धता जरूरी है। प्रो.महेंद्र बाबू ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती से जोड़कर समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में अनुशासन,ईमानदारी तथा नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। कार्यक्रम के मुख्य संबोधन में विश्वविद्यालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी प्रो.एम.एम.सेमवाल ने सत्यनिष्ठा से समृद्धि की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि वास्तविक समृद्धि का अर्थ केवल आर्थिक संपन्नता नहीं,बल्कि ऐसा समाज है जहां प्रत्येक व्यक्ति को न्याय,समान अवसर और सम्मान मिले तथा शासन व्यवस्था के प्रति आम नागरिक का विश्वास बना रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्यनिष्ठा का दायरा केवल रिश्वत न लेने और न देने तक सीमित नहीं है,बल्कि अपने प्रत्येक दायित्व का निर्वहन निष्पक्षता,ईमानदारी और जवाबदेही के साथ करना भी इसका अभिन्न हिस्सा है। प्रो.सेमवाल ने उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता का सबसे अधिक खामियाजा समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को भुगतना पड़ता है। दूरस्थ गांवों में बुजुर्गों को पेंशन जैसी सामान्य सुविधाओं के लिए भी बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे न केवल उनका समय और सम्मान प्रभावित होता है,बल्कि सरकारी व्यवस्था के प्रति उनका भरोसा भी कमजोर पड़ता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी पर विशेष जोर देते हुए कहा कि प्रवेश प्रक्रिया,परीक्षा व्यवस्था,छात्रवृत्ति वितरण,शोध कार्यों और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने डिजिटल प्रशासन को भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि ऑनलाइन आवेदन,डिजिटल भुगतान और ई-कार्यालय जैसी व्यवस्थाओं के साथ नैतिक प्रतिबद्धता का होना भी उतना ही जरूरी है। कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र एवं निःशुल्क सिविल सेवा प्रशिक्षण योजना के विद्यार्थियों के लिए लिखित एवं मौखिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें केंद्रीय सतर्कता आयोग,भ्रष्टाचार निवारण कानून,भारतीय संविधान,नैतिकता,सुशासन,डिजिटल प्रशासन और साइबर स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित प्रश्न पूछे गए। लिखित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में अनूप नौटियाल ने प्रथम स्थान हासिल किया,जबकि साक्षी वर्मा एवं राधिका संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहीं। वहीं मौखिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भव्या पांडे ने प्रथम तथा साक्षी वर्मा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों सहित अन्य प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं समन्वय में डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र एवं निःशुल्क सिविल सेवा प्रशिक्षण योजना के संकाय सदस्यों और सहयोगियों डॉ.आशीष बहुगुणा,डॉ.प्रकाश कुमार सिंह,डॉ.शैलेन्द्र चमोला,डॉ.मुकेश सहाय,डॉ.अरविंद सिंह रावत,डॉ.वीर सिंह,गौरव सिंह पड़ियार,चमन एवं अमन पंत का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन सत्यनिष्ठा,नैतिक जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार मुक्त समाज के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि देश की समृद्धि और विकास की असली कसौटी केवल आर्थिक आंकड़े नहीं,बल्कि व्यवस्था में ईमानदारी,कार्यसंस्कृति में पारदर्शिता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय एवं विकास का लाभ पहुंचना है। निश्चित रूप से युवाओं में इन मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करना एक जवाबदेह,पारदर्शी और सशक्त राष्ट्र के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।