कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी खान-पान, स्थानीय अनाजों और पारंपरिक खाद्य संस्कृति को प्रोत्साहित करना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध खान-पान की विरासत से परिचित कराना रहा।
विषय विशेषज्ञ के रूप में संबोधित करते हुए हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने अपनी चार पीढ़ियों के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों तथा स्थानीय अनाजों से तैयार भोजन की सामूहिक परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘गढ़भोज’ दो शब्दों से मिलकर बना है—‘गढ़’ अर्थात गढ़वाल अथवा उत्तराखंड का पहाड़ी क्षेत्र और ‘भोज’ अर्थात भोजन या दावत। गढ़भोज के माध्यम से मंडुवा, झंगोरा, चौलाई, गहत, भट्ट, राजमा, कंडाली, फाणु, झोल, काफली, भांग की चटनी, पहाड़ी दालों और स्थानीय सब्जियों जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि बदलते समय और परिवेश में पारंपरिक पहाड़ी खान-पान को संरक्षित करना तथा स्थानीय अनाजों और दालों के उपयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे न केवल स्थानीय लोक-संस्कृति और खान-पान की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय किसानों और उत्पादों को प्रोत्साहन देकर रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने पौष्टिक एवं पारंपरिक भोजन के प्रति जागरूकता को भी गढ़भोज का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया।
डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में भी अंग्रेजों के बीच पारंपरिक पहाड़ी खान-पान के प्रति विशेष रुचि थी और वे अपने लिए तथा अपने अतिथियों के लिए स्थानीय व्यंजन तैयार करवाते थे। उन्होंने कहा कि आधुनिक डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते चलन के बीच स्थानीय भोज्य पदार्थों के स्वाद, पौष्टिकता और विशिष्टता को संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समय के साथ हमारी लोक परंपराओं के साथ-साथ उनसे जुड़े अनेक लोक-शब्द भी धीरे-धीरे प्रचलन से बाहर होते जा रहे हैं। कार्यक्रम में डॉ. प्रतिभा आर्य और अनुज कुमार ने भी स्थानीय व्यंजनों एवं पारंपरिक खान-पान के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. नीतू पांडे ने गढ़भोज के सफल आयोजन के लिए समन्वयक अनुज कुमार, महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. खेमकरण सोमन ने किया।
इस अवसर पर डॉ. स्मिता तिवारी, रजनी नेगी, डॉ. पुष्पा रानी, रजनीश कुमार, डॉ. सुधा राना, मनोज कुमार, डॉ. कमलेश कुमार, डॉ. जमशेद अंसारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नरेंद्र सिंह, वरिष्ठ सहायक थान सिंह, कनिष्ठ सहायक महिपाल सिंह शाह, हुकम सिंह रावत, नीतीश कुमार, मनोज देवराड़ी, दीपा रावत, गुड्डू सिंह, हिमांशी, ममता, मीनाक्षी एवं गरिमा सहित महाविद्यालय के अन्य छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।