गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में विद्यार्थियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश-ट्रेकिंग के साथ चलाया स्वच्छता अभियान

 

 

श्रीनगर गढ़वाल। प्रकृति की अनमोल धरोहर को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग के एमएससी वानिकी तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के चार दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण के दौरान सराहनीय पहल की। विद्यार्थियों ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र,जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के साथ ही स्वच्छता अभियान चलाकर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने ट्रेकिंग करते हुए रास्ते में बिखरे प्लास्टिक कचरे को एकत्रित किया और संरक्षित प्राकृतिक क्षेत्रों को स्वच्छ बनाए रखने का संदेश दिया। विद्यार्थियों की इस पहल ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ-साथ उसकी सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखना भी प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। विशेष रूप से हिमालय जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में प्लास्टिक प्रदूषण वन्यजीवों,वनस्पतियों और प्राकृतिक पर्यावास के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। ऐसे में विद्यार्थियों का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। शैक्षणिक भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर हिमालयी क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों,प्राकृतिक संसाधनों की विविधता और उनके संरक्षण की चुनौतियों से परिचित कराना था। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को संरक्षित क्षेत्रों के पारिस्थितिक महत्त्व,वन्यजीवों के प्राकृतिक पर्यावास तथा जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता को करीब से समझने का अवसर मिला। वानिकी के विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के भ्रमण विशेष महत्त्व रखते हैं,क्योंकि वन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन का अध्ययन केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रह सकता। प्राकृतिक परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अवलोकन विद्यार्थियों को पर्यावरणीय चुनौतियों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करने और संरक्षण के व्यावहारिक उपायों को समझने में सहायता प्रदान करता है। शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) का भी दौरा किया। यहां विद्यार्थियों ने जिपलाइनिंग जैसी साहसिक गतिविधि में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर रोमांचकारी अनुभव प्राप्त किया। इस गतिविधि के माध्यम से उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में साहसिक प्रशिक्षण और ऐसी गतिविधियों के व्यावहारिक पक्षों को समझने का अवसर मिला। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के प्राकृतिक परिवेश के अवलोकन और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की गतिविधियों ने विद्यार्थियों के भ्रमण को ज्ञानवर्धक और अनुभवपूर्ण बनाया। इससे उन्हें प्रकृति,पर्वतीय पर्यावरण और साहसिक गतिविधियों के बीच संबंधों को समझने का अवसर भी मिला। वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग के प्राध्यापक डॉ.एल.एस.कंडारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस चार दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण ने विद्यार्थियों को वन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण,प्रबंधन और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की विविधताओं को समझने का महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। इस भ्रमण का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष विद्यार्थियों में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी रहा।‌स्वच्छता अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि प्रकृति संरक्षण केवल सरकारी विभागों या पर्यावरण से जुड़े संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है,बल्कि इसमें प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान का यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में उपयोगी साबित हुआ। साथ ही स्वच्छता अभियान ने यह संदेश भी दिया कि हिमालय की प्राकृतिक संपदा,जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता के साथ व्यवहार में बदलाव लाना भी जरूरी है। विद्यार्थियों की यह पहल प्रकृति संरक्षण के प्रति युवाओं की भागीदारी और जिम्मेदार नागरिकता का प्रेरक उदाहरण बनी।