बंगाली समाज के आरक्षण और अन्य अधिकारों को लेकर आंदोलन को निर्णायक दिशा देने पर बनी सहमति, विभिन्न समाजसेवियों और युवाओं ने एकजुट होकर संघर्ष तेज करने का लिया संकल्प
रुद्रपुर। बंगाली समाज के आरक्षण एवं अन्य सामाजिक अधिकारों को लेकर चल रहे “आरक्षण हमारा अधिकार” आंदोलन के 100 दिन पूर्ण होने के अवसर पर कार्यक्रम को सफल बनाने और आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने को लेकर रुद्रपुर के सिटी क्लब में एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया। बैठक में समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि 100 दिन पूरे होने के अवसर पर बंगाली समाज की मांगों को मजबूती से सरकार तक पहुंचाने के लिए किस प्रकार का कार्यक्रम आयोजित किया जाए।
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि बंगाली समाज लंबे समय से आरक्षण, बंगला भाषा की मान्यता, शिक्षा, रोजगार तथा अन्य सामाजिक एवं संवैधानिक अधिकारों को लेकर अपनी मांग उठाता रहा है। वक्ताओं का कहना था कि अब केवल बैठकों और ज्ञापनों तक सीमित रहने के बजाय समाज को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज को मजबूती से उठाने की आवश्यकता है।
पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन ने दिया आंदोलन को समर्थन
कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन ने बंगाली समाज के आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि समाज के अधिकारों के लिए होने वाले हर लोकतांत्रिक आंदोलन के साथ खड़े होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बंगाली समाज को आरक्षण मिलना चाहिए और युवाओं द्वारा जिस पहल के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाया जा रहा है, उसमें समाज के सभी वर्गों को सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के अधिकारों की लड़ाई केवल कुछ लोगों की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
तारक बछड़ ने कहा—अब मतभेद छोड़कर एकजुट होने का समय
बंगाली कल्याण समिति के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तारक बछड़ ने कहा कि बंगाली समाज के अधिकारों की लड़ाई कोई नई लड़ाई नहीं है। समाज पिछले कई वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज के भीतर मौजूद मतभेदों को पीछे छोड़कर सभी संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता एक मंच पर आएं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विभिन्न संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर आंदोलन की व्यापक रूपरेखा तैयार की जाएगी, ताकि बंगाली समाज की मांगों को मजबूती से आगे बढ़ाया जा सके।
परिमल राय बोले—समाज को एकजुट करने की जरूरत
गदरपुर के प्रभारी एवं कांग्रेस नेता परिमल राय ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि बंगाली समाज के अधिकारों की इस लड़ाई में सभी लोगों को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं द्वारा शुरू किए गए आंदोलन की सराहना करते हुए समाज के विभिन्न संगठनों और लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समाज को लगातार केवल सभाओं तक सीमित रहने के बजाय अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं के नेतृत्व और उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि समाज एकजुट होकर अपनी मांगों को मजबूती से रखेगा तो सरकार तक उसकी आवाज प्रभावी ढंग से पहुंचेगी।
संजय आईस ने 100 दिन के बाद आंदोलन की रणनीति का किया ऐलान
बंगाली आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक संजय आईस ने कहा कि आंदोलन के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर इसकी आगामी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं और आंदोलन को अगले चरण में ले जाने पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन की रणनीति तैयार की जा सकती है। बैठक में 24 घंटे के आंदोलन सहित विभिन्न लोकतांत्रिक कार्यक्रमों की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
तरुण विश्वास बोले—2027 से पहले सरकार को देना होगा जवाब
वरिष्ठ समाजसेवी तरुण विश्वास ने कहा कि अब समय आ गया है कि बंगाली समाज आगामी राजनीतिक समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए अपनी मांगों को मजबूती से सरकार के सामने रखे। उन्होंने कहा कि बंगाली समाज लंबे समय से आरक्षण और बंगला भाषा सहित विभिन्न मांगों को लेकर अपनी आवाज उठाता रहा है।
उन्होंने समाज को जागरूक करने और गांव-गांव तक आंदोलन की जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि समाज को अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना होगा।
युवाओं ने कहा—अब सड़क पर उतरकर आंदोलन की जरूरत
बैठक में मौजूद युवाओं ने कहा कि बंगाली समाज लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से अपेक्षा करता रहा है, लेकिन अभी तक समाज को अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। युवाओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज को गांव-गांव में संगठित किया जाए और आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाए।
युवाओं ने कहा कि आंदोलन को केवल किसी एक संगठन या व्यक्ति तक सीमित न रखकर पूरे बंगाली समाज का साझा आंदोलन बनाया जाना चाहिए।
89 दिन से धरने पर बैठे सुब्रत कुमार विश्वास ने किया व्यापक एकजुटता का आह्वान
आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता एवं बंगाली आरक्षण संघर्ष समिति से जुड़े सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि वह पिछले 89 दिनों से धरने पर बैठकर समाज के अधिकारों की आवाज उठा रहे हैं और जब तक सरकार द्वारा समाज की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने बंगाली समाज के सभी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं से अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।
सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि समाज के अधिकारों के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने समाज से आह्वान करते हुए कहा—
“उठो, जागो और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करो। यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज के अधिकारों की आवाज है।”
उन्होंने कहा कि अलग-अलग संगठनों और सामाजिक समूहों के बीच जो भी मतभेद हैं, उन्हें बातचीत के माध्यम से समाप्त कर समाज के व्यापक हित में एकजुट होने की आवश्यकता है।
आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन का अगला चरण महत्वपूर्ण
गोष्ठी में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि बंगाली समाज की आरक्षण संबंधी मांग केवल राजनीतिक विषय नहीं बल्कि सामाजिक, शैक्षिक और रोजगार के अवसरों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। समाज के आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से आरक्षण की मांग उठाई जा रही है और युवाओं के भविष्य को देखते हुए इस विषय पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि आने वाले समय में बंगाली समाज के विभिन्न संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और युवाओं को एक मंच पर लाकर आंदोलन की व्यापक रणनीति तैयार की जाए।
100 दिन पूरे होने के अवसर पर प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम और आंदोलन की अगली रूपरेखा घोषित किए जाने की बात कही गई।
ये लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता परिमल राय, युवा नेता किशोर हालदार, बंगाली आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक संजय आईस, सुब्रत कुमार विश्वास, सुभाष राय, भजन राय, नितिन विश्वास, कौशल विश्वास, राजेश थाली, प्रकाश सिकदर, विद्युत, सिद्धार्थ, मोहित नारायण, विप्लव राय, विपुल राय, पंकज विश्वास, पंकज दास, रोहित विश्वास, अभिमन्यु शान सहित समाज के अनेक युवा, समाजसेवी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि बंगाली समाज के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने के लिए संगठनात्मक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुटता जरूरी है। अब सभी की नजरें आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर प्रस्तावित कार्यक्रम और उसके बाद तय होने वाली आगामी रणनीति पर टिकी हैं।
“आरक्षण हमारा अधिकार” के नारे के साथ बंगाली समाज के आंदोलनकारियों ने लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे भी जारी रखने का संकल्प दोहराया।








