पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी में ग्राम सभा की दान की गई भूमि को लेकर एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। कथित रूप से संघ भवन निर्माण की चर्चाओं ने स्थानीय स्तर पर बहस और विरोध को जन्म दे दिया है। इस मुद्दे पर पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति खुलकर मैदान में आ गई है और साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जनता की संपत्ति पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक घुसपैठ स्वीकार नहीं की जाएगी। समिति के संयोजक नमन चन्दोला ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ग्राम सभा की दान की गई भूमि का उद्देश्य केवल और केवल लोककल्याणकारी कार्य होना चाहिए। इसे किसी संगठन विशेष या राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करना न केवल अनुचित है,बल्कि जनता की भावनाओं के साथ सीधा विश्वासघात भी है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि यदि कर्मचारियों के लिए संघ भवन की आवश्यकता इतनी ही गंभीर थी,तो पिछले 25 वर्षों में कर्मचारी संगठनों और उनके नेताओं ने इस दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं की। अब अचानक जनता की जमीन पर नजर क्यों,यह सवाल उन्होंने सीधे तौर पर उठाया। नमन चन्दोला ने स्पष्ट सुझाव भी दिया कि यदि संघ भवन का निर्माण करना ही है,तो कर्मचारी संगठन अपनी निधि से भूमि खरीदें और निर्माण कराएं। जनता की जमीन पर अधिकार जमाने की मानसिकता लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने दो टूक कहा विधायक की भूमिका पर भी उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण था,तो बीते चार वर्षों में इस पर कोई ठोस पहल क्यों नहीं दिखी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे राजनीतिक लाभ के बजाय जनहित को प्राथमिकता दें और दान की गई भूमि को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप ही उपयोग में लाया जाए। प्रशासन को भी उन्होंने सख्त संदेश दिया। खास तौर पर स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि विकास के नाम पर यदि इस भूमि का दुरुपयोग किया गया,तो इसके खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। जनता अब जागरूक है और हर निर्णय पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कर्मचारी वर्ग को संबोधित करते हुए नमन चन्दोला ने आह्वान किया कि वे ऐसे नेतृत्व को आगे लाएं जो वास्तव में उनके मुद्दों को समझे और समाधान की दिशा में कार्य करे। उन्होंने स्वास्थ्य कार्ड,प्रमोशन और स्थानांतरण जैसी लंबित समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि असली मुद्दों को दरकिनार कर कुछ लोग निजी स्वार्थ साधने में लगे हैं। अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति कर्मचारियों के हितों के खिलाफ नहीं है और संघ भवन की आवश्यकता को समझती है,लेकिन यह निर्माण जनता की भावनाओं,पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। स्पष्ट है कि ग्राम सभा की भूमि को लेकर उठी यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है,जहां जनभावनाएं,प्रशासनिक निर्णय और राजनीतिक मंशाएं आमने-सामने नजर आएंगी।







