पौराणिक ताराकुंड को मिलेगी पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान-विकास कार्यों में धन की कमी नहीं होने देंगे–डॉ.धन सिंह रावत

 

 

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के पौराणिक एवं धार्मिक महत्व से जुड़े ताराकुंड को पर्यटन और तीर्थाटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल तेज हो गई है। प्राकृतिक सौंदर्य,धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताओं से समृद्ध इस स्थल को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार की ओर से विकास की संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा है। कैबिनेट मंत्री एवं श्रीनगर विधायक डॉ.धन सिंह रावत ने ताराकुंड को पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि इसके विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। मंगलवार को कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत सैकड़ों ग्रामीणों के साथ पदयात्रा करते हुए ताराकुंड पहुंचे। यहां उन्होंने मां तारा के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। पूजा-अर्चना का अनुष्ठान आचार्य डॉ.शिव चरण नौडियाल ने संपन्न कराया। धार्मिक आस्था और उत्साह के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में ताराकुंड के विकास, संरक्षण और यहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं जुटाने से जुड़े विषय प्रमुखता से उठाए गए। ताराकुंड मंदिर परिसर में आयोजित खुली चर्चा के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र की आवश्यकताओं और विकास की संभावनाओं को लेकर अपने सुझाव रखे। ग्रामीणों ने कहा कि ताराकुंड जैसे पौराणिक स्थल को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए,तो यह धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर सकता है। इसके लिए सड़क संपर्क को बेहतर और सुचारू बनाने,ताराकुंड झील के सौंदर्यीकरण,श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विश्राम गृह तथा साधना और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए ध्यान केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी अपेक्षा जताई कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं,ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े। स्थानीय लोगों के सुझावों पर चर्चा करते हुए डॉ.धन सिंह रावत ने ताराकुंड के समग्र विकास की दिशा में आवश्यक प्रयास किए जाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की धार्मिक पहचान को मजबूत करने और पर्यटन की संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। ताराकुंड के धार्मिक महत्व को और अधिक प्रतिष्ठित करने के लिए मां तारा के भव्य मंदिर और प्रतिमा के निर्माण की योजना को महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। मंदिर और प्रतिमा का निर्माण होने से इस पौराणिक स्थल की धार्मिक पहचान को विस्तार मिलने की उम्मीद है। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के साथ स्थानीय क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि प्रस्तावित निर्माण कार्यों को साकार करने के लिए योजना,स्वीकृति,संसाधनों की उपलब्धता और समयबद्ध क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होंगे। स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी और क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं का संरक्षण भी इस विकास प्रक्रिया के प्रमुख आधार बन सकते हैं। कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के पौराणिक मंदिरों,ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में ताराकुंड को क्षेत्र के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ तीर्थाटन सर्किट से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इस प्रस्तावित धार्मिक परिपथ में बुंखाल मंदिर,पैठाणी स्थित राहु मंदिर,भैरवनाथ मंदिर,देवलगढ़ स्थित मां राजराजेश्वरी देवी मंदिर,श्रीनगर का कमलेश्वर महादेव मंदिर तथा मां धारी देवी मंदिर जैसे प्रमुख आस्था केंद्रों को शामिल करने की दिशा में पहल की बात कही गई। इन धार्मिक स्थलों को बेहतर संपर्क और सुविधाओं के माध्यम से जोड़ने से श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा के दौरान क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिल सकता है। गढ़वाल क्षेत्र में अनेक ऐसे पौराणिक स्थल हैं,जिनका धार्मिक महत्व स्थानीय जनमानस की आस्था और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। ताराकुंड का व्यवस्थित विकास इस विरासत को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। ताराकुंड को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से आसपास के गांवों के लिए रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय,स्थानीय उत्पादों की बिक्री,आवागमन,भोजन और ठहरने जैसी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके साथ ही क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना भी आवश्यक होगा। विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण,स्वच्छता,जलस्रोतों की सुरक्षा और स्थानीय परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित किया जाना जरूरी है,ताकि पर्यटन विस्तार के साथ ताराकुंड की मूल पहचान भी बनी रहे। ताराकुंड के विकास को लेकर ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि सड़क संपर्क,झील का सौंदर्यीकरण,मंदिर एवं प्रतिमा निर्माण,विश्राम गृह और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े प्रस्तावों पर शीघ्र ठोस कार्रवाई हो। यदि प्रस्तावित योजनाओं को स्वीकृति और पर्याप्त संसाधनों के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाता है,तो ताराकुंड पौड़ी गढ़वाल के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विकास संबंधी आश्वासन किस गति से योजनाओं और निर्माण कार्यों में परिवर्तित होते हैं। ताराकुंड का समग्र विकास न केवल धार्मिक आस्था को नई पहचान दे सकता है,बल्कि स्थानीय संस्कृति,विरासत और ग्रामीण आजीविका को भी नई दिशा प्रदान कर सकता है।