श्रीनगर गढ़वाल। कहते हैं कि मुश्किल वक्त में सही इलाज और डॉक्टरों की मेहनत किसी परिवार के लिए नई उम्मीद बन जाती है। कुछ ऐसा ही रुद्रप्रयाग जिले के फाटा क्षेत्र की नौ माह की नन्ही कीर्ति के साथ हुआ। फ्लू एन्सेफैलोपैथी जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही कीर्ति को जब रुद्रप्रयाग जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार के बाद भी राहत नहीं मिली तो परिजन उसे श्रीनगर स्थित एचएनबी बेस चिकित्सालय श्रीनगर लेकर पहुंचे। यहां बाल रोग विशेषज्ञों की टीम ने चुनौतीपूर्ण स्थिति में बच्ची का उपचार शुरू किया। करीब 14 दिनों तक चले उपचार के बाद कीर्ति पूरी तरह स्वस्थ हो गई। मंगलवार को परिजन उसे खुशी-खुशी घर ले गए। अपनी नन्ही बेटी को स्वस्थ देखकर माता-पिता ने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताया। रुद्रप्रयाग जिले के फाटा निवासी नितिन चंद्र जमलोकी और मेघा की नौ माह की बेटी कीर्ति की तबीयत बिगड़ने पर परिजन काफी चिंतित थे। विभिन्न अस्पतालों में दिखाने के बावजूद जब बच्ची की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो उसे बेस चिकित्सालय श्रीनगर में भर्ती कराया गया। यहां बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ.सीएम शर्मा की निगरानी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी,सीनियर रेजिडेंट डॉ.अजय गोस्वामी तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ.ज्योति,डॉ.दीपांशु,डॉ.जाहिद और डॉ.आशीष की टीम ने बच्ची का उपचार किया। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी ने बताया कि बच्ची फ्लू एन्सेफैलोपैथी से ग्रसित थी। यह फ्लू से जुड़ी एक दुर्लभ और गंभीर जटिलता है,जिसमें मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। बच्ची के मस्तिष्क में सूजन आने के कारण उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी और वह बेहोशी की अवस्था में थी। ऐसी स्थिति जानलेवा भी हो सकती है,इसलिए समय पर विशेषज्ञ उपचार बेहद जरूरी था। उन्होंने बताया कि फ्लू वायरस के कारण बच्ची की बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हुई थी। बोन मैरो हड्डियों के भीतर मौजूद वह हिस्सा है,जहां रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके प्रभावित होने से बच्ची के खून में प्लेटलेट्स सहित अन्य रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो गई थी। ऐसे में बच्ची का उपचार करना चिकित्सकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बाल रोग विभाग की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में रखा गया,जहां करीब 9-10 दिनों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार चला। चिकित्सकों की टीम ने लगातार बच्ची की स्थिति पर नजर रखी और आवश्यक उपचार किया। उपचार के करीब 7-8 दिनों बाद बच्ची की हालत में उल्लेखनीय सुधार दिखाई देने लगा। धीरे-धीरे उसे पूरी तरह होश आ गया और वह अपने माता-पिता को पहचानने लगी। बच्ची की स्थिति में सुधार होने पर परिजनों की चिंता भी कम होने लगी। इसके बाद उपचार जारी रखते हुए उसकी सेहत में लगातार सुधार हुआ और करीब 14 दिनों के बाद वह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर जाने की स्थिति में पहुंच गई। बेटी स्वस्थ हुई तो परिजनों ने जताया डॉक्टरों का आभार
नन्ही कीर्ति की मां मेघा और पिता नितिन चंद्र जमलोकी ने बताया कि बेटी की गंभीर हालत को देखकर वे बेहद परेशान थे। रुद्रप्रयाग में उपचार कराने के बाद जब उसे श्रीनगर बेस चिकित्सालय लाया गया तो शुरुआत में उन्हें इस बात की चिंता थी कि बच्ची ठीक हो पाएगी या नहीं। हालांकि यहां बाल रोग विभाग के चिकित्सकों ने उन्हें हौसला दिया और भरोसा दिलाया कि बच्ची के उपचार के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। परिजनों के मुताबिक,डॉक्टरों के मार्गदर्शन और उपचार के बाद बच्ची की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। करीब 14 दिनों तक चले उपचार के बाद उनकी बेटी स्वस्थ हो गई। अपनी नौ माह की बच्ची को फिर से सामान्य अवस्था में देखकर माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने बच्ची के उपचार में जुटे सभी चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया। डॉ.अंकिता गिरी ने अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि छह माह से अधिक और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को फ्लू से बचाव के लिए हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ध्यान देना चाहिए। फ्लू को सामान्य मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि बच्चे को तेज बुखार,असामान्य सुस्ती,बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। नन्ही कीर्ति का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके परिवार के लिए राहत और खुशी का पल रहा। वहीं गंभीर अवस्था में पहुंची बच्ची के उपचार में बाल रोग विभाग की टीम के प्रयासों ने एक बार फिर समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और बेहतर देखभाल के महत्व को सामने रखा।