देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर उत्तराखंड का कर्मचारी जगत एक बार फिर सड़कों पर उतर आया। सोमवार को देहरादून में राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के आह्वान पर आयोजित पेंशन आर-पार महारैली में प्रदेशभर से पहुंचे हजारों शिक्षक,अधिकारी और कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता का जोरदार प्रदर्शन किया। 65 से अधिक कर्मचारी एवं शिक्षक संगठनों के समर्थन से आयोजित इस महारैली ने पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को प्रदेशव्यापी आंदोलन का स्वरूप दे दिया। परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर रहे आंदोलनकारियों ने सरकार से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग उठाई। महारैली में विभिन्न विभागों के कार्मिकों के साथ निगमों एवं सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी की। कर्मचारियों के नारों और हुंकार से राजधानी का वातावरण गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुरानी पेंशन केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं,बल्कि कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य,सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है। मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरिकेड्स पर आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया। पहला बैरिकेड पार करने के बाद दूसरे बैरिकेड पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की एवं तीखी झड़प हो गई। इस दौरान कई कार्मिक चोटिल हो गए। घायलों में मोर्चे के प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल भी शामिल रहे। हालात तनावपूर्ण होने के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अडिग रहे और लंबे समय तक मौके पर डटे रहे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपने भविष्य की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। महारैली के दौरान उत्पन्न स्थिति और कर्मचारियों के लगातार प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने आंदोलन का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री के उत्तराखंड से बाहर होने के कारण उनके समन्वयक गढ़कोटी ने आंदोलनकारी प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। वार्ता में प्रतिनिधिमंडल को लिखित आश्वासन दिया गया कि 9 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस तथा मुख्यमंत्री के अन्य पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के चलते तत्काल वार्ता के लिए समय उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री और कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के बीच वार्ता यथाशीघ्र सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया गया। मोर्चे ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित वार्ता केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर नहीं रहनी चाहिए,बल्कि पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर सरकार को स्पष्ट और ठोस निर्णय की दिशा में आगे बढ़ना होगा। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन बहाली को लेकर सरकार की ओर से ठोस पहल होने तक आंदोलन जारी रहेगा। मोर्चे के अनुसार कर्मचारी पूर्व में भी लंबी हड़ताल के माध्यम से अपनी मांग और नाराजगी सरकार तक पहुंचा चुके हैं। इसके बावजूद अपेक्षित निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बना हुआ है। मोर्चे ने चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित वार्ता का कोई सकारात्मक एवं ठोस परिणाम नहीं निकलता है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार,चॉकडाउन सहित अन्य लोकतांत्रिक आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे। इस महारैली को उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन,राज्यीय शिक्षक संघ,अनुसूचित जाति एवं जनजाति शिक्षक एसोसिएशन,उत्तराखंड एनजीओ फेडरेशन,उत्तराखंड फॉरेस्ट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन,उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग संयुक्त महासंघ,प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ,अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ,उत्तरांचल प्रधानाचार्य परिषद,उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन,उत्तराखंड मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन सहित विभिन्न कर्मचारी एवं शिक्षक संगठनों ने समर्थन दिया। इसके अलावा राज्यीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी फार्मासिस्ट एसोसिएशन,राज्यीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ,नगर विकास कर्मचारी महासंघ,आयुक्त ग्रामीण विकास सेवा संगठन,आबकारी विभाग मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन,महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के सुपरवाइजर एसोसिएशन समेत अनेक विभागीय और जनपदीय संगठनों ने भी भागीदारी की। विभिन्न निगमों एवं सार्वजनिक उपक्रमों के कार्मिकों की मौजूदगी ने आंदोलन को और व्यापक आधार प्रदान किया। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने महारैली में शामिल हुए प्रदेशभर के शिक्षक,अधिकारी,कर्मचारी,मातृशक्ति,युवा साथियों,निगम कार्मिकों तथा समर्थन देने वाले सभी संगठनों के प्रति आभार व्यक्त किया। मोर्चे ने विशेष रूप से उन कर्मचारियों का अभिनंदन किया,जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान चोटिल होने के बावजूद अपनी मांग के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखी। देहरादून में आयोजित इस महारैली ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा प्रदेश के कर्मचारी संगठनों के बीच व्यापक एकजुटता का विषय बन चुका है। अब निगाहें मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित वार्ता और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। मोर्चे ने दो टूक कहा कि कर्मचारियों को केवल आश्वासन नहीं,बल्कि पुरानी पेंशन बहाली के विषय में ठोस निर्णय चाहिए। एक मंच,एक बैनर,एक आवाज-पुरानी पेंशन बहाली हमारा अधिकार है,संघर्ष जारी रहेगा।