भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस कर्मियों को चिन्हित कर कार्रवाई करे विजिलेंस: DGP

-लैंड फ्रॉड मामलों की CO करेंगे जांच-अपराध और कानून व्यवस्था को लेकर डीजीपी दीपम सेठ ने…

भाजपा किसान मोर्चा की बैठक में हुई जनहित के बजट पर चर्चागदरपुर। भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष राजेश बजाज की अध्यक्षता में एक परिचयात्मक बैठक जिला कार्यालय पर संपन्न हुई । उक्त बैठक में प्रदेश स्तरीय कार्यकर्ता एवं नव मंडल स्तरीय पदाधिकारियों का स्वागत/अभिनंदन किया गया। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा जारी बजट के संबंध में चर्चा हुई और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा जारी बजट की लाभकारी योजनाएं,जो किसान,मजदूर व आम जनमानस के लिए हैं, उनकी जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचें,इस संबंध में चर्चा की गई। केंद्र की सरकार को धन्यवाद दिया गया । उपरोक्त कार्यक्रम में सम्मानित किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री नरेश हुड़िया,जिला महामंत्री तरुण दत्ता,कुमाऊ संयोजक जे सी बेदी, प्रदेश सोशल मीडिया अधिकारी प्रदीप अधिकारी, पूर्व महामंत्री ईश्वर दत्त पांडे,गजेंद्र सिंह भुल्लर,पूर्व जिला मंत्री धीरज सिंह,प्रदेश मंत्री धीरेंद्र मिश्रा एवं समस्त मंडल अध्यक्ष व कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।

समाजसेवी शानू उर्फ़ शानू चोपड़ा ने तिरंगा लेकर बच्चों सहित किया शांति मार्चगदरपुर । विभिन्न संगठनों द्वारा उत्तराखंड में सौहार्दपूर्ण वातावरण में फैलाए जा रहे मानसिक द्वेष भावनाओं के कार्यों पर जागृति अभियान चलाते हुए समाजसेवी शानू और शानू चोपड़ा द्वारा अपने बेटे मोहम्मद सुफियान और बेटी महामायजा के साथ तिरंगा लेकर नगर में शांति मार्च किया गया। उनका कहना था,उत्तराखंड में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं,वैसे-वैसे राजनीति का स्वर बदलता जा रहा है। विकास,रोज़गार,शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे बुनियादी मुद्दों से हटकर सियासत अब नफरत और ध्रुवीकरण की राह पर बढ़ती दिख रही है। राजनीतिक बयानबाज़ी,सोशल मीडिया अभियानों और सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे भाषणों में ऐसी भाषा का इस्तेमाल बढ़ा है, जो समाज को जोड़ने के बजाय बाँटने का काम कर रही है।राज्य की राजनीति में इन दिनों धर्म,जाति और पहचान के नाम पर माहौल गरमाया हुआ है। आरोप-प्रत्यारोप का स्तर इतना नीचे गिर गया है कि अब वैचारिक असहमति की जगह एक-दूसरे को देशद्रोही, असंस्कारी या धर्मविरोधी ठहराने की कोशिशें की जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति मतदाताओं को वास्तविक मुद्दों से भटकाने के लिए अपनाई जा रही है ।अपुष्ट वीडियो,आधे-अधूरे तथ्य और भ्रामक संदेशों के ज़रिये लोगों की भावनाओं को उकसाया जा रहा है। खास तौर पर युवाओं को निशाना बनाकर ऐसे कंटेंट फैलाए जा रहे हैं, जो समाज में अविश्वास और डर का माहौल पैदा करते हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगी,तो इसके सामाजिक परिणाम लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं।देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड की पहचान लोगों की भावनाओं को उकसाया जा रहा है। खास तौर पर युवाओं को निशाना बनाकर ऐसे कंटेंट फैलाए जा रहे हैं,जो समाज में अविश्वास और डर का माहौल पैदा करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगी,तो इसके सामाजिक परिणाम लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं।देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड की पहचान हमेशा से ये सहिष्णुता,आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक संतुलन की रही है। लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में यह पहचान खतरे में दिख रही है। आम जनता के बीच भी इस माहौल को लेकर बेचैनी बढ़ रही है। जागरूक लोगों ने शानू चोपड़ा के उक्त प्रदर्शन को सराहा ।

नेशनल हाईवे पर अवैध विज्ञापन पड़े भारी, एफआईआर से मचा हड़कंपहरिद्वार। नेशनल हाईवे की दीवारों, पिलरों और फ्लाईओवर पर बिना अनुमति पोस्टर-बैनर लगाने और अवैध रूप से लिखकर प्रचार करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। जिला प्रशासन के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कनखल थाने में नौ फर्म स्वामियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर साफ संदेश दिया है कि सार्वजनिक संपत्ति से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजमार्ग की संरचना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में की गई। एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि नेशनल हाईवे-334 पर निर्माण पूरा होने के बाद कुछ निजी संस्थानों द्वारा अवैध रूप से विज्ञापन और प्रचार सामग्री प्रदर्शित की जा रही थी, जो कानूनन दंडनीय अपराध है।प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद डॉ. करन, सांची क्लीनिक, सदाशिव इंफ्रा, डॉ. भारत, भगंदर क्लीनिक, डॉ. सिंघला, गुरु कृपा, एएफआई पशु आहार और जेके मैक्स ने अपना प्रचार बंद नहीं किया। इसके बाद एनएचएआई ने सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोप में नौ फर्म स्वामियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।एफआईआर दर्ज होते ही नेशनल हाईवे पर अवैध विज्ञापन लगाने वालों में हड़कंप मच गया है। एनएचएआई के अनुसार, एफआईआर के तुरंत बाद डॉ. करन ने अपने विज्ञापन हटाने शुरू कर दिए हैं, जबकि अन्य को भी अपने-अपने प्रचार तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बाकी अवैध विज्ञापनदाताओं की भी पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय है।एनएचएआई ने लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि इस तरह की अवैध लिखावट और प्रचार न केवल शहर की सुंदरता और स्वच्छता को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि वाहन चालकों का ध्यान भटकाकर दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकता है। नियमों के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर एक वर्ष तक की कैद और दस हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।प्रशासन और एनएचएआई ने आमजन और व्यापारियों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का विज्ञापन राष्ट्रीय राजमार्ग या सार्वजनिक संपत्ति पर न लगाएं, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

​चंडीगढ़ के स्वास्थ्य बजट में कटौती से स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार थमने और नए हॉस्पिटल निर्माण व छोटे हॉस्पिटलों के अक्सटैंन की आशंका: राजबीर सिंह भारतीय

काशीपुर -चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा पेश किए गए नए बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित राशि…

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चार फरवरी को नैनीताल जनपद के दौरे पर, विकास कार्यों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम में सहभाग

नैनीताल।उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चार फरवरी को जनपद नैनीताल के भ्रमण पर आ रहे…

एस0 एस0 पब्लिक स्कूल, गदरपुर का छात्र अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित

गदरपुर। एस0 एस0 पब्लिक स्कूल,गदरपुर के दसवीं कक्षा के छात्र नवनीत सिंह बिधूड़ी पुत्र श्री मगन…

हल्द्वानी के रामपुर रोड में जनता के निशाने पर विधायक, सांसद और मेयर…सड़कों की हालत पर फूटा आक्रोशहल्द्वानी। शहर के रामपुर रोड क्षेत्र स्थित पर्वतीय मोहल्ला, गली नंबर-11, फेस-2 में सड़क व नालियों की बदहाल स्थिति को लेकर क्षेत्रवासियों ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वर्ष 2014 के बाद से आज तक सड़क और नालियों का कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ, जिससे बरसात के दिनों में नालियों का गंदा पानी घरों के भीतर घुस रहा है और जर्जर सड़कों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।समाजसेवी व पूर्व पार्षद प्रत्याशी अंजलि वर्मा ने बताया कि दुर्भाग्यवश अब तक सड़क एवं नालियों के पुनर्निर्माण के लिए कोई धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक सुमित हृदयेश, सांसद अजय भट्ट, मेयर गजराज बिष्ट और पार्षद राजेंद्र अग्रवाल केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं और उसके बाद पांच वर्षों तक क्षेत्र की सुध नहीं लेते।पिछले दस वर्षों में कोई भी जनप्रतिनिधि क्षेत्रवासियों की स्थिति देखने नहीं आया, जिससे जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। समाजसेवी विशाल वर्मा ने बताया कि पूर्व में वर्ष 2014 में पर्वतीय मोहल्ले के लिए आठ महीने तक आंदोलन और संघर्ष के बाद 37 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत कराई गई थी।इसके अलावा 7 दिसंबर 2024 को रामपुर रोड में पानी की टंकी पर चढ़कर आंदोलन करने के बाद वर्ष 2025 में तीन वर्षों के कठिन संघर्ष के पश्चात 28 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत हुई, जिसके बाद सड़कों और नालियों का पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण हो सका था।अंजलि वर्मा ने चेतावनी दी कि पर्वतीय मोहल्ला फेस-2 की मातृशक्ति, बुजुर्ग, बहनें और स्थानीय निवासी सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। यदि शीघ्र ही सड़क व नालियों के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं की गई और पुनर्निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो क्षेत्रवासी मातृशक्ति और बुजुर्गों के साथ संबंधित अधिकारियों का घेराव करेंगे।

नवनियुक्त मंडल अध्यक्ष शाहनावाज आलम का भव्य स्वागत।

स्थान। सितारगंज उधम सिंह नगर उत्तराखंडभाजपा हाईकमान के निर्देश पर भाजपा जिला अध्यक्ष कमल जिंदल द्वारा…

काशीपुर : भोजन माताओं की मांगों के समर्थन में कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया। महानगर कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष अलका पाल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भोजन माताओं को नियमित ना करना सरकार का नारी विरोधी चेहरा दिखाता है। भोजन माताओ को मिलने वाला मानदेय उनकी मेहनत और जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं है। वर्षों से भोजन माताएं सीमित आय में कार्य कर रही है, इससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने जैसे संवेदनशील कार्य के बावजूद भोजन माताओ को ऐसा मानदेय दिया जा रहा है, जिससे परिवार का न्यूनतम खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा। कांग्रेस नेत्री अलका पाल ने कहा कि वर्तमान मानदेय महंगाई के अनुरूप में अत्यंत कम है। खाद्य पदार्थ, ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चे में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि मानदेय में कोई स्थाई सुधार नहीं दिख रहा। इससे भोजन माताओ को कर्ज लेने और उधार पर जीवन व्यतीत करने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। शासन की ओर से घोषित मानदेय को व्यवहार में लागू न किए जाने से आर्थिक अस्थिरता और बढ़ गई है। भुगतान की कोई निश्चित तिथि न होने से बार-बार महीना तक मानदेय तक नहीं मिल पाता और घर का बजट बिगड़ जाता है। बच्चों की पढ़ाई व इलाज जैसी जरूरी खर्च भी प्रभावित होते हैं, यदि मानदेय सम्मानजनक स्तर पर तय किया जाए तो वह अपने परिवार का भरण_ पोषण आत्म सम्मान के साथ कर सकती हैं। अलका पाल ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब शासन से पांच हजार मासिक मानदेय घोषित है तो तीन हजार रूपए उनको क्यों दिए जा रहे हैं, यह दो हजार रूपए आखिर कहां जा रहे हैं ? यह जांच का विषय है। शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होने का बावजूद उन्हें ना तो चतुर्थ कर्मचारी तक का दर्जा दिया गया, ना ही स्थायित्व की कोई नीति बनाई गई। कांग्रेस भोजन माताओ को न्याय दिलाने तक उनके हकों की लड़ाई रहेगी।