अजीत डोभाल का अपमान उत्तराखंड के स्वाभिमान पर चोट–विनोद कंडारी

 

 

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश को ऐसे अनेक सपूत दिए हैं,जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा,संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी ऐसे ही व्यक्तित्वों में शुमार हैं,जिनकी राष्ट्रसेवा को लेकर उत्तराखंड के लोगों में विशेष गौरव का भाव है। ऐसे में उनके संबंध में की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। देवप्रयाग के विधायक विनोद कंडारी ने इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अजीत डोभाल का अपमान केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है,बल्कि यह उत्तराखंड के गौरव और स्वाभिमान से जुड़ी भावनाओं को आहत करने वाला विषय है। विधायक विनोद कंडारी ने अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए राहुल गांधी की टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताया और कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अजीत डोभाल केवल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर आसीन व्यक्ति नहीं हैं,बल्कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित एक अनुभवी व्यक्तित्व हैं। राष्ट्रहित में उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक जीवन में उनके प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए। विनोद कंडारी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं। विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और सवाल उठाने का पूरा अधिकार है,लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान भाषा की मर्यादा और राष्ट्रसेवा में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस को देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अजीत डोभाल से इतनी परेशानी क्यों है,क्या राष्ट्रहित में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को राजनीतिक बयानबाजी का निशाना बनाना उचित है,कंडारी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को लेकर पूर्व में हुई विवादित बयानबाजी का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की पहचान देशभक्ति,सैन्य परंपरा और राष्ट्रसेवा से रही है। इस प्रदेश के अनेक वीर सपूतों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है और कई व्यक्तित्वों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में उत्तराखंड से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों पर होने वाली टिप्पणियां प्रदेशवासियों की भावनाओं से भी जुड़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए काम करने वाले लोगों के प्रति आदर बनाए रखना आवश्यक है। किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा से असहमति हो सकती है,लेकिन राष्ट्रसेवा में उसके योगदान पर चर्चा करते समय तथ्यों और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। देवप्रयाग विधायक ने कहा कि कांग्रेस को अपने नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी पर आत्ममंथन करना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी केवल एक-दूसरे की आलोचना करना नहीं,बल्कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े विषयों पर गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना भी है। विनोद कंडारी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता अपने वीर सपूतों के योगदान और सम्मान को लेकर संवेदनशील है। राष्ट्रसेवा करने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है,लेकिन सार्वजनिक संवाद में मर्यादा और राष्ट्रीय गौरव के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।