श्रीनगर गढ़वाल। बच्चों का सुरक्षित बचपन,सम्मानपूर्ण जीवन और भयमुक्त वातावरण किसी भी सभ्य एवं सशक्त समाज की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। बच्चों को उनके अधिकारों,कानूनी संरक्षण और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के निर्देशानुसार तहसील विधिक सेवा समिति श्रीनगर के तत्वावधान में द मार्शल पब्लिक स्कूल में सुरक्षित बचपन विषय पर एक दिवसीय वृहद विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस जागरूकता शिविर की अध्यक्षता सिविल जज (कनिष्ठ खंड) एवं अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति श्रीनगर अलका ने की। शिविर में छात्र-छात्राओं को बाल अधिकारों,बाल संरक्षण कानूनों,लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) तथा व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। शिविर को संबोधित करते हुए सिविल जज अलका ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने,सम्मान के साथ जीवन जीने तथा किसी भी प्रकार के शोषण और उत्पीड़न से संरक्षण पाने का अधिकार है। उन्होंने बच्चों को सरल एवं सहज भाषा में अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझाया। साथ ही बताया कि यदि किसी बच्चे के साथ कोई अनुचित व्यवहार होता है तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए,बल्कि बिना किसी भय या संकोच के अपने माता-पिता,शिक्षकों अथवा संबंधित कानूनी एवं सुरक्षा तंत्र को तत्काल इसकी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। बच्चों में जागरूकता,आत्मविश्वास और सतर्कता विकसित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस अवसर पर उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा,व्यक्तिगत सतर्कता और एक-दूसरे की सुरक्षा के प्रति सजग रहने की शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने न्यायिक अधिकारी से अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों,बाल सुरक्षा कानूनों,न्याय व्यवस्था और किसी भी आपात स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता से संबंधित अनेक सवाल पूछे। सिविल जज सुश्री अलका ने प्रत्येक प्रश्न का सरल,स्पष्ट और आत्मीयता के साथ उत्तर देते हुए बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि कानून केवल अपराध होने के बाद न्याय दिलाने का माध्यम नहीं है,बल्कि अपराधों की रोकथाम और समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करने का भी प्रभावी साधन है। इस अवसर पर बार एसोसिएशन श्रीनगर के अध्यक्ष प्रमेश चंद्र जोशी ने कहा कि सुरक्षित एवं सशक्त समाज के निर्माण के लिए बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधिक जागरूकता बच्चों को आत्मविश्वासी बनाती है और उन्हें गलत परिस्थितियों का सामना करने का साहस प्रदान करती है। बार एसोसिएशन के संरक्षक अनूप श्री पांथरी ने कहा कि सुरक्षित बचपन प्रत्येक बच्चे का बुनियादी एवं कानूनी अधिकार है। बच्चों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना परिवार,विद्यालय,समाज और प्रशासन सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा समिति समाज के अंतिम छोर तक न्याय और कानूनी सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। वहीं पैनल अधिवक्ता देवी प्रसाद खरे ने छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों,शिक्षा के अधिकार तथा जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को बताया कि किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या या अन्याय की स्थिति में विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से सहायता प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रिया सबरवाल ने तहसील विधिक सेवा समिति,न्यायिक अधिकारी,बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के आत्मबल को बढ़ाने के साथ ही उन्हें अपने अधिकारों,सुरक्षा और सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग बनाते हैं। विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर बार एसोसिएशन श्रीनगर के संरक्षक अनूप पांथरी,अध्यक्ष प्रमेश चंद्र जोशी,पैनल अधिवक्ता देवी प्रसाद खरे,विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रिया सबरवाल,विद्यालय प्रबंधक जैलेश सबरवाल,पैरा लीगल वॉलिंटियर्स पीएलवी प्रकाश नेगी एवं मानव बिष्ट सहित विद्यालय परिवार के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिविर ने विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देकर, उन्हें अपनी बात निडरता से रखने का साहस प्रदान करना ही सुरक्षित बचपन की दिशा में सबसे प्रभावी कदम है।