पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बच्चों की सुरक्षा केवल जिम्मेदारी नहीं,बल्कि समाज के भविष्य को सुरक्षित रखने का संकल्प है। इसी संवेदनशील सोच के साथ जिला निरीक्षण समिति ने जनपद पौड़ी गढ़वाल की बाल देखरेख संस्थाओं का त्रैमासिक निरीक्षण कर वहां रह रहे बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं,सुरक्षा व्यवस्था और समग्र विकास के इंतजामों की जमीनी हकीकत परखी। जिला निरीक्षण समिति ने राजकीय संप्रेक्षण गृह किशोर गड़ोली एवं राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण का निरीक्षण किया। इस दौरान समिति ने बच्चों की सुरक्षा,स्वास्थ्य,भोजन,स्वच्छता,शिक्षा,खेलकूद,मनोरंजन तथा देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। राजकीय संप्रेक्षण गृह किशोर गड़ोली के निरीक्षण के दौरान संस्थान में कुल 5 विधि-विवादित किशोर निवासरत पाए गए। समिति के सदस्यों ने किशोरों से व्यक्तिगत रूप से संवाद कर उनकी दिनचर्या,समस्याओं,आवश्यकताओं तथा संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। समिति ने सुरक्षा,स्वास्थ्य,भोजन,स्वच्छता,शिक्षा और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए निर्देश दिए कि किशोरों के साथ संवेदनशील एवं बाल-अनुकूल व्यवहार सुनिश्चित किया जाए और उनकी आवश्यकताओं को गंभीरता से लिया जाए। खेल और रचनात्मक गतिविधियों पर जोर संस्थान के क्रीड़ा कक्ष के निरीक्षण में टेबल टेनिस टेबल उपलब्ध पाई गई। समिति ने किशोरों को नियमित रूप से खेलकूद एवं शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। समिति का मानना रहा कि खेलकूद बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक एवं भावनात्मक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मनोरंजन कक्ष एवं पुस्तकालय का निरीक्षण करते हुए समिति ने उपलब्ध संसाधनों की भी जानकारी ली। पुस्तकालय में कक्षा 6 से 12 तक की पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध पाई गईं। समिति ने बच्चों को अध्ययन,पठन-पाठन और रचनात्मक गतिविधियों के लिए पुस्तकों का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। भवन की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के दिए निर्देश
समिति ने संप्रेक्षण गृह के भवन एवं परिसर का भी निरीक्षण किया। इस दौरान आवश्यक सुदृढ़ीकरण एवं मरम्मत कार्यों की जरूरत महसूस होने पर संबंधित स्तर पर कार्यवाही के निर्देश दिए गए। समिति सचिव एवं जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद भवन के सुदृढ़ीकरण एवं आवश्यक मरम्मत से संबंधित कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। निरीक्षण के दौरान समिति ने बच्चों से भोजन को लेकर भी बातचीत की और उनकी पसंद एवं रुचि जानी। समिति ने निर्देश दिए कि भोजन की व्यवस्था करते समय बच्चों की पसंद,आवश्यकता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखा जाए। इसके साथ ही खाना बनाने में रुचि रखने वाले बच्चों को उचित मार्गदर्शन एवं निगरानी में भोजन तैयार करने का अवसर देने को कहा गया,ताकि उनमें आत्मनिर्भरता,सहभागिता और सकारात्मक जीवन-कौशल विकसित हो सके। इसके बाद जिला निरीक्षण समिति ने राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संस्थान में कोई बच्चा निवासरत नहीं पाया गया। समिति ने परिसर में साफ-सफाई एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बच्चों की देखभाल से संबंधित संस्थानों में हर समय स्वच्छ,सुरक्षित,स्वस्थ एवं बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध रहे और दैनिक स्वच्छता व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए। फर्स्ट एड किट की भी जांच निरीक्षण के दौरान डॉ.आशीष गुसाईं एवं डॉ.पुनीत भट्ट द्वारा संस्थान में उपलब्ध फर्स्ट एड किट का परीक्षण किया गया। इस दौरान प्राथमिक उपचार सामग्री की उपलब्धता,उपयोगिता एवं आवश्यकता का जायजा लिया गया। जिला निरीक्षण समिति ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा,सम्मान,स्वास्थ्य,शिक्षा और समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बच्चों की समस्याओं और आवश्यकताओं को संवेदनशीलता के साथ समझते हुए उनके सर्वोत्तम हित में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। निरीक्षण के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अरुण खुकशाल,बाल कल्याण समिति की सदस्य गंगोत्री नेगी एवं सुनीता भट्ट तथा संरक्षण अधिकारी सागर लिंगवाल उपस्थित रहे। निरीक्षण का मूल संदेश साफ रहा-बाल देखरेख संस्थाएं केवल बच्चों को आश्रय देने का स्थान नहीं,बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य,आत्मविश्वास और बेहतर जीवन की नींव तैयार करने की जिम्मेदारी भी निभाती हैं।








