श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार केंद्र में मीडिया साक्षरता विषय पर आयोजित अतिथि व्याख्यान ने विद्यार्थियों के बीच गहरी बौद्धिक हलचल पैदा कर दी। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य छात्रों में मीडिया के प्रति समालोचनात्मक दृष्टि विकसित करना और डिजिटल युग की जटिल चुनौतियों के प्रति उन्हें सजग बनाना रहा। मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में प्रो.के.जी.सुरेश,निदेशक इंडिया हैबिटैट सेंटर ने अपने विचारों से विद्यार्थियों को न केवल प्रेरित किया,बल्कि मीडिया की बदलती प्रकृति को समझने का सशक्त दृष्टिकोण भी प्रदान किया। अपने प्रभावशाली संबोधन में प्रो.सुरेश ने कहा कि मीडिया साक्षरता केवल जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं,बल्कि जानकारी को परखने,विश्लेषित करने और जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की एक महत्वपूर्ण क्षमता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के दौर में सूचना की बाढ़ के बीच सत्य और असत्य के बीच अंतर करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने भ्रामक समाचार,दुष्प्रचार और डिजिटल मंचों पर फैल रही अविश्वसनीय सूचनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि बिना सत्यापन के किसी भी सूचना को स्वीकार करना समाज और लोकतंत्र दोनों के लिए घातक हो सकता है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने सजग,जिम्मेदार और तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। प्रो.सुरेश ने यह भी रेखांकित किया कि एक मजबूत लोकतंत्र की नींव जागरूक और मीडिया-साक्षर नागरिकों पर टिकी होती है। यदि नागरिक सूचना के प्रति संवेदनशील और विवेकशील होंगे,तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था सुदृढ़ बनी रह सकती है। कार्यक्रम का संचालन और संयोजन केंद्र की सहायक आचार्य डॉ.अमिता के नेतृत्व में हुआ,जबकि सह-आयोजक के रूप में डॉ.दिनेश भट्ट एवं डॉ.अंकित घिल्डियाल ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर केंद्र के छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही,जिन्होंने विषय को लेकर उत्साहपूर्वक जिज्ञासाएं भी प्रस्तुत की। व्याख्यान के अंत में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि बदलते डिजिटल परिवेश में केवल उपभोक्ता बनकर नहीं,बल्कि सजग विश्लेषक बनकर ही मीडिया का सही उपयोग संभव है और यही साक्षरता भविष्य के समाज को दिशा देगी।








