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​चंडीगढ़ के स्वास्थ्य बजट में कटौती से स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार थमने और नए हॉस्पिटल निर्माण व छोटे हॉस्पिटलों के अक्सटैंन की आशंका: राजबीर सिंह भारतीय

gvartanews by gvartanews
February 4, 2026
Reading Time: 1 min read
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काशीपुर -चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा पेश किए गए नए बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित राशि में कटौती को लेकर शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। समाजसेवी और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (एडवोकेट जनरल कार्यालय) के सेवानिवृत्त अधीक्षक राजबीर सिंह भारतीय ने बजट का विश्लेषण करते हुए कहा है कि इस कटौती से शहर की स्वास्थ्य योजनाओं पर ‘ब्रेक’ लग सकता है।

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​बजट के मुख्य आंकड़े और चिंताजनक पहलू:

​बजट में कमी: चंडीगढ़ को 2026-27 के लिए ₹5720.17 करोड़ का आबंटित हुआ है। जिसमें से स्वास्थ्य क्षेत्र को इस वर्ष ₹955.41 करोड़ मिले हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹31.96 करोड़ कम हैं।
​प्रतिशत: स्वास्थ्य के लिए कुल बजट का केवल 14.60% हिस्सा ही आवंटित किया गया है।
​प्रभावित होने वाले प्रोजेक्ट: बजट में इस कटौती के कारण कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजनाएं अधर में लटक सकती हैं। जैसे विभिन्न सैक्टरों में हॉस्पिटलों का निर्माण आदि।
​इन प्रमुख योजनाओं पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर:
​राजबीर सिंह भारतीय ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि धन के अभाव में निम्नलिखित विकास कार्य पिछड़ सकते हैं:
​अस्पताल अपग्रेडेशन: 50 बिस्तरों वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को 250 बिस्तरों वाले अस्पताल में बदलने की योजना।
​बुनियादी ढांचा: पॉलीक्लीनिकों का सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण व शहरी सहायक स्वास्थ्य केंद्रों की मजबूती।
​नए निर्माण: नए अस्पतालों के निर्माण और विस्तार कार्यों पर पूरी तरह रोक लग सकती है।
​जनता की चिंता बढ़ी:
​समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने कहा, “चंडीगढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही दबाव में हैं। डाक्टरज खासकर स्पेशलिस्ट डाक्टरों की हर हॉस्पिटल में कमी है और बजट की कमी से आगे भी डाक्टर की कमी रहने की आशंका बढ़ जाती है। बजट में कटौती का सीधा असर आम आदमी की चिकित्सा सुविधाओं पर पड़ेगा। यदि बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं हुआ, तो आने वाले समय में लोगों को इलाज के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।”
​उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए बजट पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि चंडीगढ़ की स्वास्थ्य सेवाएं पिछड़ने के बजाय और अधिक आधुनिक और सुलभ बन सकें।

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