श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की देवभूमि सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक नगरी गढ़वाल की प्राकृतिक छटा,समृद्ध लोक-संस्कृति,पारंपरिक अतिथि सत्कार और आधुनिक तकनीकी विकास से पश्चिम बंगाल के युवा प्रतिनिधि रूबरू हो रहे हैं। एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित युवा संगम के सातवें चरण में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के तत्वावधान में उत्तराखंड भ्रमण पर पहुंचे पश्चिम बंगाल के युवा प्रतिनिधिमंडल ने गढ़वाल मंडल के प्रमुख पर्यटन,सांस्कृतिक और तकनीकी स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच आपसी समझ,सांस्कृतिक आदान-प्रदान,राष्ट्रीय एकता और विविधता में एकता की भावना को मजबूत करना है। युवा प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण की शुरुआत पौड़ी गढ़वाल जनपद के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खिर्सू से हुई। यहां पहुंचने पर स्थानीय ग्रामीणों और बासा होमस्टे के प्रबंधन ने पश्चिम बंगाल से आए अतिथियों का रोली-तिलक,तुलसी की माला और पारंपरिक ढोल-दमाऊ की मधुर थाप के बीच आत्मीय स्वागत किया। उत्तराखंड की पारंपरिक स्वागत संस्कृति से अभिभूत प्रतिनिधियों ने स्थानीय लोगों के स्नेह और आतिथ्य का अनुभव किया। खिर्सू की शांत वादियों,हरियाली,प्राकृतिक सौंदर्य और पर्वतीय जनजीवन ने प्रतिनिधिमंडल को गढ़वाल की विशिष्ट पहचान से परिचित कराया। इस अवसर पर अतिथियों को दोपहर के भोजन में पारंपरिक गढ़वाली व्यंजन परोसे गए। स्थानीय खानपान और पहाड़ी संस्कृति से जुड़े अनुभवों को प्रतिनिधियों ने सराहा। यह भ्रमण केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसके माध्यम से युवाओं को उत्तराखंड की लोक-परंपराओं,ग्रामीण जीवनशैली,स्थानीय आतिथ्य और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर भी मिला। सांस्कृतिक अनुभवों के साथ-साथ प्रतिनिधिमंडल ने आधुनिक तकनीकी विकास और ऊर्जा उत्पादन से जुड़ी व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के युवा प्रतिनिधि टिहरी बांध पहुंचे,जहां उन्होंने बांध परिसर और संग्रहालय का भ्रमण कर परियोजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। जलविद्युत परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों और अभियंताओं ने प्रतिनिधियों को टिहरी बांध के निर्माण,उसकी कार्यप्रणाली,तकनीकी विशेषताओं तथा जलविद्युत उत्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दीं। प्रतिनिधियों ने परियोजना की तकनीकी संरचना और ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को समझने में विशेष रुचि दिखाई। इस शैक्षणिक भ्रमण ने युवाओं को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर देश की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं,आधुनिक अभियंत्रण और ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान किया। युवा संगम के भ्रमण कार्यक्रम में लेखक गांव का अवलोकन भी शामिल रहा। इस भ्रमण के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल को साहित्य,रचनात्मकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से जुड़े परिवेश को देखने का अवसर मिला। प्राकृतिक सौंदर्य और लोक-संस्कृति के साथ साहित्यिक विरासत का यह अनुभव कार्यक्रम को व्यापक आयाम प्रदान करता है। खिर्सू की लोक-परंपराओं से लेकर टिहरी बांध की आधुनिक तकनीक और लेखक गांव के साहित्यिक परिवेश तक की यात्रा ने प्रतिनिधियों को उत्तराखंड के विविध स्वरूपों से परिचित कराया। युवा संगम के राज्य नोडल अधिकारी प्रो.महाबीर सिंह नेगी के साथ आयोजन दल के सदस्य डॉ.हिमशिखा गुसाईं,डॉ.नरेंद्र कुमार और डॉ.सर्वेश उनियाल भ्रमण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहे। पश्चिम बंगाल से आए पांच संकाय सदस्यों के मार्गदर्शन में युवा प्रतिनिधि विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सशस्त्र सीमा बल एसएसबी श्रीनगर इकाई के जवान भी तत्परता से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। शैक्षणिक भ्रमण,आवास,भोजन और यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं के समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है,ताकि प्रतिनिधियों को सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में उत्तराखंड को जानने-समझने का अवसर मिल सके। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति स्वयं इस अंतरराज्यीय सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। वे प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा,आवास,भोजन और शैक्षणिक भ्रमण से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ले रहे हैं। विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर समन्वय किया जा रहा है। युवा संगम जैसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को देश के विभिन्न क्षेत्रों की सामाजिक,सांस्कृतिक,भौगोलिक और तकनीकी विशेषताओं को समझने का अवसर मिलता है। पश्चिम बंगाल से आए युवा प्रतिनिधियों ने गढ़वाल की प्राकृतिक सुंदरता,समृद्ध लोक-संस्कृति,पारंपरिक मेहमाननवाजी और तकनीकी विकास की सराहना की। पर्वतीय जीवन की सादगी,स्थानीय लोगों का अपनापन और सांस्कृतिक परंपराओं की जीवंतता उनके लिए विशेष अनुभव रहे। युवा संगम का सातवां चरण विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति,परंपराओं और जीवनशैली से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे कार्यक्रम क्षेत्रीय दूरियों को कम करने,आपसी संवाद को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गढ़वाल की वादियों में पश्चिम बंगाल के युवाओं का यह प्रवास इस संदेश को सशक्त करता है कि भारत की विविध भाषाएं,संस्कृतियां,परंपराएं और भौगोलिक विशेषताएं मिलकर राष्ट्रीय एकता की मजबूत नींव तैयार करती हैं। युवा संगम इसी भावना को अनुभव के स्तर पर साकार करने का प्रयास है।