पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति,पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों को एक सूत्र में पिरोने वाला समलौण आन्दोलन अपनी स्थापना के 26 वें वर्ष में भी जन-जन को प्रकृति संरक्षण का प्रेरक संदेश दे रहा है। आन्दोलन की वर्षगांठ पर जनपद पौड़ी के विभिन्न क्षेत्रों में जन्मदिन,गृहप्रवेश और सामुदायिक आयोजनों को वृक्षारोपण से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण का अनूठा अभियान चलाया गया। इस दौरान सैकड़ों लोगों ने पौधारोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया तथा पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें परिवार के सदस्य की तरह सुरक्षित रखने का प्रण लिया। विकासखंड कल्जीखाल की पट्टी पटवालस्यूं के ग्राम नलई में उपेंद्र बिष्ट एवं उनकी धर्मपत्नी पूजा देवी ने अपनी पुत्री श्रेया के जन्मदिवस को यादगार बनाते हुए घर के आंगन में आम का समलौण पौधा रोपा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बच्चों के जन्मदिन पर पौधारोपण आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने का सबसे सुंदर माध्यम है। पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी श्रेया की माता पूजा देवी ने स्वयं ली। परिवार ने समलौण संस्था के इस अभिनव अभियान की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की प्रभावी जन-जागरूकता पहल बताया। इसी क्रम में विकासखंड थलीसैंण की पट्टी कण्डारस्यूं के ग्राम पैलार में पूजा देवी के गृहप्रवेश अवसर पर मौसमी का समलौण पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया गया। पौधे की देखरेख की जिम्मेदारी उनकी सास कबोतरी देवी ने ली। कार्यक्रम का संचालन गांव की समलौण सेना नायिका सतेश्वरी देवी ने किया। उन्होंने कहा कि वृक्ष मानव जीवन का आधार हैं और ऑक्सीजन के सबसे बड़े स्रोत होने के कारण उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने ग्रामीणों से जंगलों को आग से बचाने तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान किया। इस अवसर पर लक्ष्मी देवी,कुसमा देवी,पीतांबरी देवी,अनीता देवी,रिया,ऋषभ सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे। समलौण आन्दोलन की वर्षगांठ का मुख्य आयोजन विकासखंड थलीसैंण के ग्राम नौगांव पज्याणा स्थित जय मां काली समलौण वन में आयोजित किया गया। गांव की समलौण सेना नायिका कुमारी कंचन रावत के नेतृत्व में सम्पूर्ण ग्रामवासियों ने 100 बांज के पौधों का सघन वृक्षारोपण किया तथा सभी पौधों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर समलौण आन्दोलन के संस्थापक वीरेंद्र दत्त गोदियाल ने बताया कि 15 जुलाई 2000 को जनता जूनियर हाई स्कूल पाटुली में एक छात्रा के जन्मदिवस पर पहला पौधा रोपकर इस आन्दोलन की शुरुआत की गई थी। आज यह पहल उत्तराखण्ड के अनेक जनपदों में जनआन्दोलन का स्वरूप ले चुकी है। उन्होंने बताया कि जय मां काली समलौण वन की स्थापना वर्ष 2011 में तत्कालीन सेना नायिका प्रियंका रावत एवं ग्रामीणों के सहयोग से हुई थी,जहां आज 3000 से अधिक बांज,काफल,तिलोज,सिल्वर ओक,बांस,देवदार,सुराही सहित अनेक प्रजातियों के वृक्ष विकसित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि बांज के वृक्ष जल संरक्षण,भू-कटाव रोकने,चारापत्ती उपलब्ध कराने तथा सूखते जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज गांव के लोग इन पौधों की अपने बच्चों की तरह देखभाल कर रहे हैं और उन्हें पशुओं तथा अन्य नुकसान से बचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। यही समलौण आन्दोलन की सबसे बड़ी सफलता है कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल अभियान नहीं,बल्कि लोगों की जीवनशैली और सामाजिक परंपरा बनता जा रहा है। कार्यक्रम में कुमारी रीना,मीनाक्षी,सोनाली,मीना,साक्षी,नीमा,करिश्मा,अंजली,वर्षा,हिमानी,दिव्या,प्रिया,तनु,कविता,आरती,रचना सहित बड़ी संख्या में समलौण सेना के सदस्य एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में प्रकृति संरक्षण,लोक संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का अद्भुत संगम देखने को मिला। समलौण आन्दोलन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यदि जीवन के प्रत्येक संस्कार को एक पौधे से जोड़ दिया जाए तो आने वाली पीढ़ियों को हरित,समृद्ध और सुरक्षित पर्यावरण सहज ही उपलब्ध कराया जा सकता है।








