श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड का शैक्षणिक शहर में स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय एक बार फिर राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर बौद्धिक विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा 13 अप्रैल 2026 को बिरला परिसर के एसीएल हॉल में दोपहर 1.30 बजे से 4.30 बजे तक नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन पर एक व्यापक और विचारोत्तेजक शैक्षणिक चर्चा का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक चर्चा नहीं,बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा देने वाला एक सशक्त मंच सिद्ध होगा। इसमें छात्र-छात्राओं,शोधार्थियों और प्राध्यापकों को एक ऐसा अवसर मिलेगा,जहां वे न केवल अपने विचार रख सकेंगे,बल्कि जमीनी सच्चाइयों और नीतिगत चुनौतियों पर गहराई से मंथन भी कर सकेंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं,विशेषकर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना और इस दिशा में सार्थक संवाद को गति देना है। सत्रों के दौरान सामाजिक व सांस्कृतिक बाधाओं,संरचनात्मक चुनौतियों,राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की भूमिका तथा नीति-निर्माण में लैंगिक असमानता के प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा होगी। इस विचार-विमर्श की खास बात यह होगी कि इसमें सिमुलेटेड डिबेट और क्रिटिकल एनालिसिस के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप सोचने और समाधान प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। चयनित छात्र अपने तर्कों और दृष्टिकोण के माध्यम से समाज के समग्र उत्थान की दिशा में योगदान देंगे,जबकि अन्य प्रतिभागी पर्यवेक्षक के रूप में इस बौद्धिक प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। कार्यक्रम को तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है प्रारंभिक परिचय,संरचित बहस और समापन सत्र,जिसमें ठोस सिफारिशें और नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए जाएंगे। उत्कृष्ट वक्ताओं को उनके प्रभावशाली तर्क और प्रस्तुति के आधार पर सम्मानित किया जाएगा तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। यह पहल न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक मजबूत कदम है,बल्कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महिलाओं की अग्रणी भूमिका को भी रेखांकित करती है। साथ ही,यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप समावेशी और समानतापूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास है। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के संरक्षण में किया जा रहा है,जबकि संयोजक के रूप में प्रो.सीमा धवन एवं उनकी समर्पित टीम इस आयोजन को सफल बनाने में जुटी हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन को पूर्ण विश्वास है कि यह बौद्धिक संगोष्ठी न केवल प्रतिभागियों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगी,बल्कि समाज में महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक नई सोच और सकारात्मक बदलाव की नींव भी रखेगी। जहां विचार बनते हैं परिवर्तन की शक्ति,वहीं से शुरू होता है सशक्त भारत का निर्माण।








