नेशनल हाईवे पर अवैध विज्ञापन पड़े भारी, एफआईआर से मचा हड़कंपहरिद्वार। नेशनल हाईवे की दीवारों, पिलरों और फ्लाईओवर पर बिना अनुमति पोस्टर-बैनर लगाने और अवैध रूप से लिखकर प्रचार करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। जिला प्रशासन के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कनखल थाने में नौ फर्म स्वामियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर साफ संदेश दिया है कि सार्वजनिक संपत्ति से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजमार्ग की संरचना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में की गई। एसडीएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि नेशनल हाईवे-334 पर निर्माण पूरा होने के बाद कुछ निजी संस्थानों द्वारा अवैध रूप से विज्ञापन और प्रचार सामग्री प्रदर्शित की जा रही थी, जो कानूनन दंडनीय अपराध है।प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद डॉ. करन, सांची क्लीनिक, सदाशिव इंफ्रा, डॉ. भारत, भगंदर क्लीनिक, डॉ. सिंघला, गुरु कृपा, एएफआई पशु आहार और जेके मैक्स ने अपना प्रचार बंद नहीं किया। इसके बाद एनएचएआई ने सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोप में नौ फर्म स्वामियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।एफआईआर दर्ज होते ही नेशनल हाईवे पर अवैध विज्ञापन लगाने वालों में हड़कंप मच गया है। एनएचएआई के अनुसार, एफआईआर के तुरंत बाद डॉ. करन ने अपने विज्ञापन हटाने शुरू कर दिए हैं, जबकि अन्य को भी अपने-अपने प्रचार तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बाकी अवैध विज्ञापनदाताओं की भी पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय है।एनएचएआई ने लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि इस तरह की अवैध लिखावट और प्रचार न केवल शहर की सुंदरता और स्वच्छता को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि वाहन चालकों का ध्यान भटकाकर दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकता है। नियमों के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर एक वर्ष तक की कैद और दस हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।प्रशासन और एनएचएआई ने आमजन और व्यापारियों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का विज्ञापन राष्ट्रीय राजमार्ग या सार्वजनिक संपत्ति पर न लगाएं, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।