श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की देवभूमि की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने की दिशा में श्रीनगर गढ़वाल के भक्तियाना में जय शक्ति रामलीला का भव्य एवं विधिवत शुभारंभ धार्मिक रीति-रिवाजों,श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में हुआ। रामलीला के प्रथम दिवस कैलाश लीला तथा रावण,कुंभकर्ण और विभीषण की कठिन तपस्या के बाद वरदान प्राप्त करने के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय,आकर्षक संवादों और धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रामायण के पौराणिक प्रसंगों से जोड़ दिया। रामलीला के शुभारंभ के साथ ही भक्तियाना क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक उल्लास का वातावरण दिखाई दिया। मंच पर प्रस्तुत प्रत्येक दृश्य ने दर्शकों के मन में भगवान शिव,माता पार्वती और प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा का भाव जागृत किया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रामलीला का आनंद लिया और कलाकारों के अभिनय की सराहना की। प्रथम दिवस की लीला का आरंभ कैलाश लीला से हुआ। मंच पर भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य स्वरूप का आकर्षक चित्रण किया गया। भगवान शिव एवं माता पार्वती की भव्य आरती के दौरान वातावरण भक्तिमय हो उठा। धार्मिक प्रसंगों की प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति,आस्था और आध्यात्मिक परंपराओं की याद दिलाई। इसके बाद कैलाश पर्वत पर रावण के पहुंचने और अपने अहंकार तथा शक्ति के प्रदर्शन के लिए पर्वत को उठाने के प्रयास का सजीव मंचन किया गया। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने रावण के अद्भुत बल,उसके अहंकार और भगवान शिव की महिमा को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। दर्शकों ने पूरे ध्यान और उत्साह के साथ इस दृश्य का आनंद लिया। रामलीला के प्रथम दिन का प्रमुख आकर्षण रावण,कुंभकर्ण और विभीषण की कठिन तपस्या तथा ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करने का प्रसंग रहा। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से तीनों भाइयों के अलग-अलग स्वभाव,उनकी साधना और वरदान प्राप्त करने की घटनाओं को मंच पर जीवंत किया। रावण के पात्र में शक्ति,महत्वाकांक्षा और अहंकार का चित्रण देखने को मिला,वहीं कुंभकर्ण के पात्र ने अपनी विशिष्ट छवि से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। विभीषण के चरित्र के माध्यम से धर्म,सद्बुद्धि और मर्यादा के महत्व को रेखांकित किया गया। इन प्रसंगों ने रामायण की कथा को आगे बढ़ाने के साथ ही दर्शकों के सामने अच्छाई,विवेक और अहंकार के बीच के अंतर को भी उजागर किया। कलाकारों के संवाद,भाव-भंगिमाओं और मंच पर उनकी प्रस्तुति ने लीला को प्रभावशाली बनाया। रामलीला देखने पहुंचे लोगों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। प्रथम दिवस की प्रस्तुति ने आगामी दिनों में होने वाले मंचनों के प्रति भी दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाई। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं,बल्कि भारतीय धार्मिक परंपराओं,आदर्शों और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त मंच भी है। भगवान श्रीराम के जीवन,उनके आदर्शों,मर्यादा,कर्तव्य और धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में रामलीला का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भक्तियाना में जय शक्ति रामलीला का आयोजन इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। स्थानीय स्तर पर ऐसे आयोजन लोगों को अपनी धार्मिक जड़ों से जोड़ने के साथ ही सामूहिक सहभागिता,सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकजुटता को भी मजबूत करते हैं। रामलीला के मंच पर स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा मिलती है। रामलीला के सफल शुभारंभ में समिति के पदाधिकारियों,कलाकारों और आयोजन से जुड़े सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। रामलीला के डायरेक्टर हिमांशु बहुगुणा के निर्देशन तथा अध्यक्ष दिनेश उनियाल के नेतृत्व में आयोजन को व्यवस्थित रूप देने के प्रयास किए गए। इस अवसर पर कमलेश नैथानी,प्रकाश सती,सूर्य प्रकाश नौटियाल,विष्णु नौटियाल,रोहित बहुगुणा,राजीव,गजेंद्र मैठाणी,रघुनंदन चमोली,ललित मोहन नैथानी,जगदंबा पोखरियाल,कुंदन बिष्ट,सुमित,अमित सहित जय शक्ति रामलीला की पूरी टीम उपस्थित रही। आयोजन से जुड़े सदस्यों ने रामलीला के सफल संचालन और आगामी प्रस्तुतियों को भव्य बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आगामी दिनों में प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों और दिव्य लीलाओं का मंचन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रीय जनता और श्रद्धालुओं से रामलीला में पहुंचकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करने तथा इस धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की। प्रथम दिवस की लीला के दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं की अच्छी उपस्थिति रही। रामायण के प्रसंगों के मंचन के बीच पूरा वातावरण धार्मिक उत्साह से सराबोर दिखाई दिया। भगवान श्रीराम के जयकारों से आयोजन स्थल गुंजायमान रहा और भक्तियाना में रामलीला की शुरुआत ने क्षेत्र में भक्ति,संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया। जय शक्ति रामलीला का यह शुभारंभ इस बात का प्रतीक बना कि आधुनिक समय में भी रामायण के आदर्श और भारतीय लोकनाट्य परंपराएं समाज में अपनी महत्वपूर्ण जगह बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में होने वाली लीलाओं को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है।