अलविदा नाना एक युग का अवसान-नाना पाटेकर के निधन पर स्वामी रसिक महाराज ने दी भावांजलि

 

 

 

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता,संवेदनशील व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के लिए सदैव समर्पित रहे नाना पाटेकर के निधन से कला-जगत में शोक की लहर है। उनके निधन को एक युग का अवसान बताते हुए सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने नृसिंह वाटिका आश्रम से उन्हें भावांजलि एवं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि आज व्यथित हृदय और नम आंखों से प्रिय नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं। मां गंगा के पावन तट पर उनके साथ बिताए आत्मीय क्षण आज स्मृतियों में और अधिक जीवंत होकर सामने आ रहे हैं। उनका सहज अपनापन,सरल व्यवहार और बिना किसी आडंबर के हृदय से जुड़ जाने वाली आत्मीयता सदैव स्मरणीय रहेगी। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर उन विरल कलाकारों में थे,जिन्होंने अभिनय को केवल किया नहीं,बल्कि उसे जिया। पांच दशकों से अधिक की उनकी कला-यात्रा में उन्होंने अनेक विविध और चुनौतीपूर्ण किरदारों को जीवंत किया। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि पर्दे पर चरित्र दिखाई देता था और कलाकार पीछे छूट जाता था। उनकी प्रभावशाली आवाज,संवादों की गहराई और आंखों की अभिव्यक्ति बिना शब्दों के भी बहुत कुछ कह जाती थी। स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि नाना पाटेकर का अभिनय केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था। उनके किरदारों में समाज की सच्चाई, मानवीय संघर्ष,रिश्तों की जटिलता और जीवन की कठोर वास्तविकताएं दिखाई देती थीं। उन्होंने दर्शकों को हंसाया और रुलाया ही नहीं,बल्कि उन्हें सोचने और समाज को संवेदनशील दृष्टि से देखने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर की पहचान केवल अभिनेता के रूप में नहीं थी। वे सरल,संवेदनशील और अपनी जड़ों से जुड़े हुए इंसान थे। सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। नाम फाउंडेशन के माध्यम से सूखे से प्रभावित किसान परिवारों की सहायता करना तथा देश की सीमाओं पर जाकर सैनिकों के बीच उनका मनोबल बढ़ाना उनके सामाजिक दायित्वबोध और राष्ट्र के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंचने के बावजूद नाना अपनी मिट्टी,अपने लोगों और समाज की वास्तविकताओं से जुड़े रहे। उनकी आवाज,उनके अमर किरदार,उनकी कला और सामाजिक सेवा की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि कुछ कलाकार पर्दे से विदा होते हैं,लेकिन हृदय से कभी विदा नहीं होते। नाना पाटेकर भी उन्हीं विरल कलाकारों में से एक हैं। उनका निधन भारतीय कला-जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनके परिवार,प्रशंसकों और देशवासियों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें।