श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पुण्यभूमि,चमोली जनपद के आदिबद्री क्षेत्र के निकट ग्राम कांसुवा में स्थित मां भगवती नंदा राजराजेश्वरी देवी मंदिर आगामी 19 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ के माध्यम से आस्था,संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का विराट केंद्र बनने जा रहा है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि उत्तराखंड की लोक-आस्था,सनातन परम्परा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव होगा। हिमालय की गोद में बसे इस पावन धाम में ज्योर्तिमठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज तथा स्वामी मुकुंदानंद महाराज की गरिमामयी उपस्थिति आयोजन को अलौकिक दिव्यता प्रदान करेगी। वैदिक मंत्रोच्चार,यज्ञ,हवन,पूजन एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ मां नंदा राजराजेश्वरी देवी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न होगी। इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक अवसर पर देश-विदेश में निवासरत प्रवासी उत्तराखंडी,चमोली जनपद सहित दूर-दराज के पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीणजन,नगरवासी तथा मायके की धरती को नमन करने वाली महिला ध्याणियां बड़ी संख्या में कांसुवा पहुंचेंगी। वर्षों बाद ऐसा अवसर आएगा जब मां नंदा के दरबार में लोक-संस्कृति,पारिवारिक भावनाएं और धार्मिक श्रद्धा एक साथ साकार होंगी। आयोजन समिति के अनुसार महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भक्ति संगीत,प्रवचन एवं लोक-आस्था से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे,जिससे संपूर्ण क्षेत्र मां भगवती की आराधना में डूब जाएगा। मां नंदा राजराजेश्वरी देवी उत्तराखंड की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं और उनके प्रति जन-जन की अटूट श्रद्धा इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करेगी। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष जय विक्रम सिंह कुंवर तथा नंदा राजजात यात्रा समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर साथ ही भूपेंद्र सिंह कुंवर,विशन सिंह कुंवर,नरेंद्र कुंवर,मनवर सिंह कुंवर,विजय सिंह कुंवर एवं रघुनाथ कुंवर ने समस्त श्रद्धालुओं से सपरिवार पधारकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया है। समिति पदाधिकारियों का कहना है कि यह आयोजन धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा,जिससे न केवल क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान सुदृढ़ होगी,बल्कि स्थानीय संस्कृति,लोक परम्पराओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलेगा। यह जानकारी जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अनुयायी एवं वरिष्ठ समाजसेवी भोपाल सिंह चौधरी द्वारा प्रदान की गई। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर मां भगवती नंदा राजराजेश्वरी देवी के दर्शन कर देवभूमि की दिव्य ऊर्जा का अनुभव करें और अपने जीवन को धर्म,संस्कृति व आध्यात्मिक चेतना से आलोकित करें।








