श्रीनगर गढ़वाल। एक ओर जहां केंद्र सरकार का स्वच्छ भारत अभियान देशभर में स्वच्छता और जनभागीदारी का संदेश दे रहा है,वहीं दूसरी ओर श्रीनगर में कुछ असामाजिक तत्व इस मुहिम को चोट पहुंचाने से बाज नहीं आ रहे। खिर्सू-बुघाणी रोड पर रतूड़ा बैण्ड के समीप श्रीनगर नगर निगम द्वारा लगाए गए स्टील के दो कूड़ेदान शरारती तत्वों द्वारा सड़क के नीचे फेंक दिए गए हैं,जिससे नगर की स्वच्छता व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग गया है। नगर निगम द्वारा सूखा कूड़ा संग्रह के लिए डबल कंटेनर वाले स्टैंड लगाए गए थे,ताकि स्थानीय लोग एवं राहगीर स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग कर सकें। यह पहल न केवल कूड़ा प्रबंधन की दिशा में एक सकारात्मक कदम थी,बल्कि पर्यावरण संरक्षण की सोच को भी मजबूती देने वाली थी। किंतु कुछ असामाजिक तत्वों ने इन कंटेनरों को सड़क से नीचे गिराकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। इतना ही नहीं,रतूड़ा बैण्ड क्षेत्र में बुजुर्गों,मॉर्निंग वॉक करने वालों तथा पर्यटकों की सुविधा के लिए लगाई गई बैठने की कुर्सियां भी सड़क के नीचे पड़ी मिलीं। ये कुर्सियां उन लोगों के लिए राहत का साधन थीं,जो प्रतिदिन स्वास्थ्य लाभ के लिए यहां टहलने आते हैं। अब उनका इस तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में मिलना सामाजिक असंवेदनशीलता का परिचायक है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कृत्य न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाला है,बल्कि नगर की छवि को भी धूमिल करता है। रतूड़ा बैण्ड क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है,जहां प्रतिदिन अनेक लोग सैर-सपाटे और स्वास्थ्य लाभ के उद्देश्य से पहुंचते हैं। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं चिंताजनक हैं। सामाजिक दृष्टि से यह अत्यंत गंभीर विषय है। स्वच्छता केवल सरकार या नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। सार्वजनिक सुविधाओं को सुरक्षित रखना,उनका संरक्षण करना और उनका सदुपयोग करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया,तो स्वच्छ और सुंदर श्रीनगर का सपना अधूरा रह जाएगा। स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा क्षतिग्रस्त कूड़ेदानों और कुर्सियों को शीघ्र पुनः स्थापित किया जाए। साथ ही,ऐसे स्थानों पर निगरानी की व्यवस्था भी सुदृढ़ की जानी चाहिए,ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। स्वच्छता और नागरिक चेतना का संदेश तभी सार्थक होगा,जब हम सभी मिलकर सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेंगे और अपने नगर को स्वच्छ,सुंदर और सुरक्षित बनाए रखने में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।






