भाजपा सरकार ने बीरोंखाल को गड्ढे और बदहाल सड़कें दीं–धीरेंद्र प्रताप

 

 

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बदहाल सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर जनाक्रोश एक बार फिर सामने आया है। पौड़ी जनपद के बीरोंखाल में सड़कों की दुर्दशा के विरोध में आयोजित सत्याग्रह में कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने बीरोंखाल क्षेत्र को गड्ढों से भरी और बदहाल सड़कें दी हैं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन की कठिनाइयां स्थानीय जनता के लिए गंभीर समस्या बनी हुई हैं और सरकार को इन समस्याओं के समाधान के लिए जवाबदेही तय करनी चाहिए। 31 सूत्रीय मांगों को लेकर सत्याग्रह सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को धीरेंद्र प्रताप धुमाकोट से बीरोंखाल पहुंचे और राज्य आंदोलनकारी नंदकिशोर नौटियाल के नेतृत्व में आयोजित सत्याग्रह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर उठाई गई आवाज केवल बीरोंखाल तक सीमित नहीं है,बल्कि यह प्रदेश के अनेक पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों के सामने आ रही समस्याओं को भी उजागर करती है। उन्होंने कहा कि नंदकिशोर नौटियाल के नेतृत्व में 31 सूत्रीय मांगों को लेकर किया जा रहा सत्याग्रह क्षेत्रीय जनता की बुनियादी समस्याओं को सामने लाने का प्रयास है। मांगों में विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न सड़कों की स्थिति का विस्तृत विवरण देते हुए उनके सुधार की आवश्यकता उठाई गई है। धीरेंद्र प्रताप ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें गगन विहारी कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से यात्रा करने के बजाय सड़कों की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण करें,तो उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों को हो रही परेशानियों का बेहतर अनुभव होगा। उन्होंने सड़क परिवहन मंत्री पर भी प्रदेश में सड़कों की स्थिति सुधारने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं,बल्कि शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार,कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं। सड़कों की खराब स्थिति का सीधा असर ग्रामीणों,विद्यार्थियों,मरीजों,किसानों और व्यापारियों पर पड़ता है। ऐसे में सड़क सुधार के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर समयबद्ध ढंग से काम किया जाना चाहिए। सत्याग्रह को संबोधित करते हुए धीरेंद्र प्रताप ने प्रदेश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि गांवों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव पलायन की प्रमुख वजहों में शामिल है। जब ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को अच्छी शिक्षा और मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता,तो परिवारों को मजबूरी में शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। उन्होंने बेरोजगारी और महंगाई को लेकर भी सरकार की आलोचना की तथा कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। सत्याग्रह के दौरान महंगाई,बेरोजगारी,अस्पतालों की स्थिति,महिलाओं के सम्मान और जंगली जानवरों से बढ़ते खतरे जैसे मुद्दे भी उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ों में बाघ,भालू और बंदरों सहित वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता से ग्रामीणों की सुरक्षा,खेती और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहे हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। धीरेंद्र प्रताप ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आमजन से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। सत्याग्रह के संयोजक एवं राज्य आंदोलनकारी नंदकिशोर नौटियाल ने क्षेत्र की सड़कों की स्थिति को लेकर सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय जनता की समस्याओं और आकांक्षाओं को सामने रखते हुए 31 सूत्रीय मांगपत्र तैयार किया गया है। इसमें विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न सड़कों की बदहाल स्थिति का विवरण शामिल है। नौटियाल ने स्पष्ट किया कि जब तक आंदोलन के माध्यम से उठाई गई मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती,तब तक सत्याग्रह जारी रखा जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों से सड़कों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कार्य शुरू करने की मांग की। सत्याग्रह को रघुवीर सिंह बिष्ट,पोखड़ा के पूर्व प्रमुख बलवंत सिंह सहित सुरेंद्र रावत,रविंद्र सिंह रावत और अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने सड़क,स्वास्थ्य,शिक्षा,रोजगार और ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल उठाते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। बीरोंखाल में आयोजित यह सत्याग्रह पर्वतीय क्षेत्रों की आधारभूत समस्याओं को लेकर चल रही आवाज को सामने लाने वाला कार्यक्रम रहा। अब आंदोलनकारियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 31 सूत्रीय मांगपत्र पर संबंधित विभाग और शासन किस प्रकार की कार्रवाई करते हैं तथा क्षेत्र की बदहाल सड़कों को सुधारने के लिए धरातल पर कब तक काम शुरू होता है।