चमोली/गैरसैंण/श्रीनगर गढ़वाल। देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद कंडारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर पंचायत प्रतिनिधियों सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं,आशा कार्यकर्ताओं और भोजनमाताओं के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि किए जाने की मांग उठाई। इस दौरान उन्होंने संबंधित वर्गों की जिम्मेदारियों,उनके योगदान और मौजूदा आर्थिक चुनौतियों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए अलग-अलग मांगपत्र सौंपे। विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि इन वर्गों के कार्यों की महत्ता और उनकी जिम्मेदारियों को देखते हुए मानदेय में उचित बढ़ोतरी के लिए सकारात्मक निर्णय लिया जाए। विधायक विनोद कंडारी की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों और कर्मियों की आर्थिक स्थिति तथा उनके सम्मान से जुड़े महत्वपूर्ण विषय को सामने लाती है। पंचायत प्रतिनिधि हों या महिला एवं बाल विकास,स्वास्थ्य और विद्यालयों में भोजन व्यवस्था से जुड़ी कार्यकर्ता-ये सभी समाज के विभिन्न वर्गों तक सरकारी योजनाओं और आवश्यक सेवाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण कड़ी
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान विधायक विनोद कंडारी ने पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि का विषय प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान,ग्राम पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के क्रियान्वयन,स्थानीय समस्याओं के समाधान तथा सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। गांवों में सड़क,पेयजल,स्वच्छता,विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के समाधान से लेकर ग्रामीणों की आवश्यकताओं को प्रशासन तक पहुंचाने तक पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियां व्यापक हैं। उन्हें लगातार जनता के बीच रहकर स्थानीय समस्याओं का समाधान कराने के लिए प्रयासरत रहना पड़ता है। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों के दायित्वों और उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि किया जाना आवश्यक है। विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि ग्रामीण विकास की आधारशिला माने जाने वाले इन जनप्रतिनिधियों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में उचित कदम उठाए जाएं। विधायक विनोद कंडारी ने मुख्यमंत्री के समक्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं,आशा कार्यकर्ताओं और भोजनमाताओं के मानदेय में वृद्धि की मांग भी रखी। उन्होंने पत्रों के माध्यम से इन वर्गों की जिम्मेदारियों और समाज के प्रति उनके योगदान को रेखांकित किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मातृ एवं शिशु कल्याण,बच्चों के पोषण,प्रारंभिक देखभाल और जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान देती हैं। वहीं आशा कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने,गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न गतिविधियों में सहयोग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी प्रकार भोजनमाताएं विद्यालयों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं। उनके कार्य का सीधा संबंध बच्चों के पोषण और विद्यालयों में बेहतर वातावरण बनाए रखने से है। इन सभी वर्गों की भूमिका को देखते हुए विधायक ने उनके मानदेय में उचित वृद्धि की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज के हित में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले इन कर्मियों के आर्थिक हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए,ताकि वे बेहतर परिस्थितियों में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। विधायक द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष रखे गए मांगपत्रों में यह विषय भी उठाया गया कि संबंधित कार्यकर्ताओं और भोजनमाताओं की ओर से लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही है। सीमित मानदेय और कार्यों की व्यापक जिम्मेदारियों के बीच उन्हें परिवार के भरण-पोषण सहित विभिन्न आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि होने से उन्हें आर्थिक संबल मिलने के साथ-साथ उनके कार्यों के प्रति सम्मान की भावना भी मजबूत होगी। विधायक विनोद कंडारी ने सरकार से अपेक्षा जताई कि इन वर्गों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए उनकी जिम्मेदारियों और योगदान के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। विधायक विनोद कंडारी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह किया कि पंचायत प्रतिनिधियों,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं,आशा कार्यकर्ताओं और भोजनमाताओं के मानदेय में यथोचित एवं सम्मानजनक वृद्धि के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने रेखांकित किया कि ग्रामीण विकास,स्वास्थ्य,पोषण और शिक्षा से जुड़े इन वर्गों की सेवाएं समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनके आर्थिक हितों की अनदेखी किए बिना ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए,जिससे उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में आवश्यक आर्थिक सहयोग मिल सके। अब इन मांगों पर प्रदेश सरकार के स्तर से होने वाले निर्णय पर संबंधित वर्गों की निगाहें रहेंगी। यदि मानदेय वृद्धि के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जाता है,तो इससे प्रदेशभर के पंचायत प्रतिनिधियों,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं,आशा कार्यकर्ताओं और भोजनमाताओं को राहत मिलने की उम्मीद की जा सकेगी।