मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर श्रीनगर में सजा भव्य गढ़भोज,काफी लोगों ने चखा पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद

 

श्रीनगर गढ़वाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उत्तराखंड में आयोजित गढ़भोज दिवस के तहत बुधवार को श्रीनगर गढ़वाल के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में भव्य गढ़भोज कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहाड़ की मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक खान-पान की महक से रामलीला मैदान सराबोर रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद लिया और अपनी समृद्ध लोक-संस्कृति से जुड़ने का अनुभव किया। गढ़भोज में पहाड़ की पारंपरिक रसोई को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया। स्थानीय कृषि उत्पादों से तैयार 22 से अधिक पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन लोगों के लिए परोसे और प्रदर्शित किए गए। मंडुवे की रोटी,झंगोरे की खीर,काफली,फाणु,भट्ट की चुड़काणी सहित अनेक पारंपरिक व्यंजनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आयोजन में 30 हजार से अधिक लोगों ने भोजन एवं प्रसाद ग्रहण किया। गढ़भोज में पहुंचने वाले लोगों ने पहाड़ी खान-पान के स्वाद के साथ-साथ इसके पीछे छिपी पारंपरिक जीवनशैली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी करीब से महसूस किया। पहाड़ की थाली बनी आकर्षण का केंद्र गढ़भोज की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल भोजन परोसने तक सीमित न रहकर उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्यान्नों और स्थानीय कृषि उत्पादों को पहचान दिलाने का प्रयास किया गया। मंडुवा,झंगोरा,भट्ट सहित पहाड़ में सदियों से उत्पादित होने वाले अनाजों से तैयार व्यंजनों ने लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया। कार्यक्रम स्थल पर लोगों में पारंपरिक व्यंजनों को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। नई पीढ़ी के लोगों ने भी पहाड़ी भोजन के पारंपरिक स्वाद को जाना और समझा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि स्थानीय अनाज और पारंपरिक भोजन केवल हमारी विरासत नहीं,बल्कि स्वस्थ जीवन और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार भी हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार में विद्यालयी शिक्षा,संस्कृत शिक्षा,उच्च शिक्षा,तकनीकी शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत रहे। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत,नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज अध्यक्ष सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त,बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी तथा लैंसडौन विधायक महंत दिलीप रावत सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं भी दीं। रसिक महाराज ने कहा कि गढ़भोज केवल भोजन का आयोजन नहीं,बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति,पारंपरिक कृषि,स्थानीय उत्पादों और पहाड़ी जीवनशैली के संरक्षण का अभियान है। उन्होंने कहा कि सदियों से पहाड़ के गांवों में तैयार होने वाले पारंपरिक खाद्यान्न और व्यंजन हमारी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्थानीय परंपराओं,संस्कृति,स्थानीय उत्पादों और आत्मनिर्भरता को नई पहचान मिल रही है। उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्यान्नों को बढ़ावा देकर पहाड़ के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किया जा सकता है। गढ़भोज के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने,पारंपरिक अनाजों की मांग बढ़ाने और पर्वतीय किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य दिलाने का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि पहाड़ के पारंपरिक खाद्यान्नों को भोजन की मुख्यधारा से जोड़ा जाए तो इससे कृषि को प्रोत्साहन मिलने के साथ पलायन की समस्या से निपटने में भी मदद मिल सकती है। आयोजन में स्थानीय भोजन,समृद्ध किसान,स्वस्थ समाज और सशक्त उत्तराखंड का संदेश प्रमुखता से सामने आया। गढ़भोज ने यह भी रेखांकित किया कि उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं हैं,बल्कि इनके साथ पहाड़ की कृषि,संस्कृति,पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पूरी कहानी जुड़ी हुई है। कार्यक्रम का आयोजन हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान जाड़ी उत्तरकाशी एवं पर्वतीय विकास शोध केंद्र श्रीनगर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले जनप्रतिनिधियों,सामाजिक संगठनों,भाजपा कार्यकर्ताओं,स्थानीय नागरिकों एवं सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों,सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों,भाजपा कार्यकर्ताओं तथा क्षेत्रीय नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ.अरविंद दरमोडा एवं द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने किया। भव्य गढ़भोज के माध्यम से श्रीनगर की धरती से उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति,स्थानीय कृषि और पहाड़ी खान-पान को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने का मजबूत संदेश दिया गया।