पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। सुरक्षित बचपन किसी भी स्वस्थ और संवेदनशील समाज की पहली पहचान है।बच्चों को केवल शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं,बल्कि उन्हें अपने अधिकारों,व्यक्तिगत सुरक्षा और विपरीत परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी देना भी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य को लेकर मिशन शक्ति के तहत इंटर कॉलेज ढामकेश्वर,खिर्सू में छात्र-छात्राओं के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विद्यार्थियों को बाल एवं महिला सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते हुए उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग और किसी भी अनुचित परिस्थिति का साहसपूर्वक सामना करने के लिए प्रेरित किया गया। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को लैंगिक अपराधों,घरेलू हिंसा,बाल संरक्षण,महिला सुरक्षा,व्यक्तिगत अधिकारों तथा संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ उन्हें यह भरोसा दिलाना रहा कि किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर वे अकेले नहीं हैं और उचित सहायता के लिए संबंधित तंत्र से संपर्क कर सकते हैं। कार्यशाला में वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासिका लक्ष्मी रावत ने विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच के बारे में सरल और व्यवहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने शरीर की सुरक्षा के प्रति जागरूक होना चाहिए और किसी भी ऐसे व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए,जिससे उन्हें असहजता,डर या असुरक्षा महसूस हो। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें अनुचित तरीके से छूने का प्रयास करता है,डराता है,धमकाता है अथवा किसी घटना को किसी से न बताने के लिए दबाव बनाता है तो ऐसी स्थिति में चुप रहना उचित नहीं है। बच्चों को अपने माता-पिता,शिक्षक,अभिभावक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को तत्काल इसकी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों में जागरूकता और आत्मविश्वास पैदा करना बाल सुरक्षा की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है। बच्चों को यह समझना जरूरी है कि उनके साथ होने वाली किसी भी गलत घटना के लिए वे स्वयं जिम्मेदार नहीं हैं और उन्हें बिना डर के अपनी बात सामने रखनी चाहिए। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को महिला हेल्पलाइन 181 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।बताया गया कि जरूरत और संकट की स्थिति में संबंधित सहायता सेवाओं से संपर्क किया जा सकता है। साथ ही वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सहायता और सहयोग के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि यदि किसी महिला या बच्चे के साथ हिंसा,उत्पीड़न,शोषण अथवा किसी प्रकार का अपराध होता है तो उसे छिपाने के बजाय उचित माध्यम से शिकायत दर्ज कराना आवश्यक है। समय पर सूचना मिलने से संबंधित संस्थाएं और विभाग पीड़ित को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठा सकते हैं। कार्यशाला में यह संदेश भी दिया गया कि बाल एवं महिला सुरक्षा केवल किसी एक विभाग अथवा परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसके प्रति संवेदनशील और सजग रहना होगा। विद्यालय बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र है,इसलिए विद्यालय स्तर पर सुरक्षा एवं अधिकारों को लेकर होने वाले जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं।वक्ताओं ने विद्यार्थियों को अपने आसपास होने वाली गतिविधियों के प्रति सजग रहने,किसी भी संदिग्ध अथवा अनुचित व्यवहार की जानकारी जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता तंत्र का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार के अपराध या उत्पीड़न की स्थिति में डरने अथवा चुप रहने के बजाय साहस के साथ अपनी बात सामने रखनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार,विद्यालय और समाज के बीच बेहतर संवाद और विश्वास का वातावरण बनाना आवश्यक है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके अधिकारों,व्यक्तिगत सुरक्षा,शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक किया गया। विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में रुचि लेते हुए बाल एवं महिला सुरक्षा से जुड़े विषयों को गंभीरता से समझा। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अमर शाह सहित आशीष रावत,पूजा,रुचिता,रेखा आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल जानकारी देना ही नहीं,बल्कि उन्हें इतना जागरूक और आत्मविश्वासी बनाना रहा कि वे स्वयं की सुरक्षा के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों की सुरक्षा के प्रति भी संवेदनशील भूमिका निभा सकें।