श्रीनगर गढ़वाल। ईद मिलाद-उन-नबी और रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मुस्लिम समाज श्रीनगर ने कुछ ऐसा ही मानवीय संदेश दिया। बेस अस्पताल श्रीकोट के ब्लड बैंक में रक्त की कमी को देखते हुए आयोजित तीसरे विशाल रक्तदान शिविर में युवाओं और युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर इंसानियत की मिसाल कायम की। मस्जिद परिसर में सुबह से ही रक्तदान करने वालों की कतार लग गई। किसी के चेहरे पर खुशी थी तो किसी के मन में किसी अनजान जिंदगी को बचाने का संकल्प। देखते ही देखते रक्तदान के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या बढ़ती गई और शिविर सामाजिक एकता तथा भाईचारे का संदेश देने वाला मंच बन गया। शिविर में 105 युवा एवं युवतियों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। रक्तदान के प्रति लोगों के उत्साह का आलम यह रहा कि ब्लड बैंक में रक्त भंडारण की क्षमता पूरी हो जाने के कारण करीब 20 इच्छुक रक्तदाता चाहकर भी रक्तदान नहीं कर सके। यह स्थिति अपने आप में इस अभियान की सफलता और लोगों की सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता को बयां करती है। रक्तदान की सबसे खूबसूरत बात यही है कि रक्त देने वाला और रक्त पाने वाला अक्सर एक-दूसरे को जानते तक नहीं हैं। इसके बावजूद एक व्यक्ति अपना रक्त दूसरे अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए देता है। यही तो इंसानियत है-जहां न मजहब देखा जाता है,न जाति,न पहचान,सिर्फ इंसान की जिंदगी मायने रखती है। इसी मानवीय भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से मुस्लिम समाज श्रीनगर की ओर से समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते रहे हैं। ईद मिलाद-उन-नबी और रक्षाबंधन जैसे पावन अवसर पर आयोजित इस शिविर ने श्रीनगर की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर भी सामने रखी। आयोजकों ने कहा कि त्योहारों की वास्तविक खुशी केवल अपने घर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यदि हमारे छोटे से प्रयास से किसी परिवार के घर का चिराग जलता है,किसी मां की आंखों का आंसू रुकता है या किसी बहन की राखी की डोर सुरक्षित रहती है,तो इससे बड़ी सेवा और क्या हो सकती है। शिविर में शहर की सामाजिक संस्थाओं,वरिष्ठ नागरिकों और प्रशासन का भी सहयोग मिला। सुबह से शाम तक मस्जिद परिसर में उत्साह का माहौल बना रहा। युवाओं में रक्तदान को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। बेस अस्पताल श्रीकोट के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ.सतीश के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम सुबह से शाम तक रक्तदान शिविर को सफल बनाने में जुटी रही। रक्तदाताओं की आवश्यक जांच से लेकर रक्त संग्रहण तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा किया गया। इस अवसर पर परवेज अहमद,जामीन अंसारी,नजमुल राव,इस्लाम,वासिम,जावेद अंसारी,जावेद अहमद,वकील अहमद,अकील,मुकीम,गुलफाम,लक्की,शाकिर,फरमान, पप्पू,शाह आलम,इरशाद,शमीम अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। 105 यूनिट रक्त से जगी उम्मीद की नई किरण शिविर में हुआ रक्तदान आने वाले समय में जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है। आयोजकों का कहना है कि रक्तदान को किसी एक दिन या अवसर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। स्वस्थ लोगों को नियमित रूप से रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए,क्योंकि आपके शरीर से निकला रक्त किसी के लिए जिंदगी की आखिरी उम्मीद बन सकता है। ईद मिलाद-उन-नबी की खुशी और रक्षाबंधन के प्रेम के बीच आयोजित यह रक्तदान शिविर श्रीनगर में सामाजिक सौहार्द,भाईचारे और इंसानियत की ऐसी तस्वीर छोड़ गया,जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।








