श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि श्रीनगर की धार्मिक एवं आध्यात्मिक धरती एक बार फिर गौ सेवा,सनातन संस्कृति और श्रीराम कथा के आध्यात्मिक संदेश से गुंजायमान होने जा रही है। भारतीय गौ क्रांति के तत्वावधान में 12 अगस्त से 18 अगस्त तक सराफा धर्मशाला अपर बाजार श्रीनगर में पूज्य गोपाल मणि महाराज द्वारा श्रीराम कथा धेनु मानस गौ टीका के माध्यम से गौ संरक्षण,गौ संवर्धन और भारतीय संस्कृति में गौ माता के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। कथा आयोजन को लेकर भारतीय गौ क्रांति के सदस्यों ने श्रीनगर,श्रीकोट,चौरास,डांग,पराग,उफल्डा,बिल्लकेदार सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क कर धर्मप्रेमी जनता को कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण बना हुआ है। धार्मिक आयोजन का शुभारंभ 12 अगस्त को सुबह 10 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ होगा। कलश यात्रा शारदा घाट से प्रारंभ होकर श्रीनगर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सराफा धर्मशाला,अपर बाजार पहुंचेगी,जहां इसका विधिवत समापन किया जाएगा। कलश यात्रा में महिलाओं,युवाओं,श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमी नागरिकों के बड़ी संख्या में शामिल होने की उम्मीद है। सिर पर कलश धारण किए मातृशक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत श्रद्धालुओं की सहभागिता शहर के धार्मिक वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बनाएगी। भारतीय गौ क्रांति के पदाधिकारियों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गौ सेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं,बल्कि हमारी सामाजिक,सांस्कृतिक और ग्रामीण जीवन परंपरा से भी गहराई से जुड़ी हुई है। धेनु मानस गौ टीका कथा के माध्यम से गौ माता के महत्व,गौ संरक्षण और सनातन परंपरा में उनके स्थान को लेकर जनजागरण का प्रयास किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य समाज में गौ सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना भी है। आयोजकों का कहना है कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली के बीच नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति,धार्मिक परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। श्रीराम कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज को सत्य,मर्यादा,सेवा,त्याग और सद्भावना का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन मर्यादा और आदर्श का प्रतीक है,वहीं गौ माता भारतीय लोकजीवन और सनातन परंपरा में सेवा एवं करुणा की भावना की प्रतीक रही हैं। ऐसे आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना के साथ सामाजिक समरसता का भाव भी मजबूत होता है। भारतीय गौ क्रांति के महासचिव राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल ने आम जनमानस और सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिकाधिक संख्या में कलश यात्रा और कथा आयोजन में पहुंचकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन तभी सार्थक होते हैं,जब समाज की सामूहिक भागीदारी उसमें दिखाई दे। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे परिवार सहित कलश यात्रा में शामिल होकर गौ सेवा,सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के इस अभियान को मजबूती प्रदान करें। उन्होंने कहा कि श्रीनगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करने वाले इस आयोजन में सभी वर्गों की सहभागिता सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश भी देगी। इस अवसर पर भारतीय गौ क्रांति की अध्यक्ष मंजू मैठाणी,सुंदरी देवी,कांति गुसाईं,रामेश्वरी नैथानी,नीलम पोखरियाल,सावित्री गैरोला,मंजू डोभाल,मुन्नी चमोली,मंजू मरोड़ी,किरन रावत,गैणा देवी पंवार,कमल किशोर भट्ट,प्रचारक कलम सिंह,महासचिव राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल,प्रकाश मैठाणी,विक्रम सिंह रावत सहित अनेक सदस्य एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। श्रीनगर में 12 अगस्त को शारदा घाट से उठने वाली कलश यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं,बल्कि गौ संरक्षण, सनातन संस्कृति,सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश लेकर शहर के बीचों-बीच पहुंचेगी।








