GVarta News
No Result
View All Result
  • Login
  • Home
  • राज्य
  • Viral videos
  • अपराध
  • खेल
  • देश
  • बिजनेस
  • उत्तराखण्ड
  • राजनीति
  • विदेश
  • E-Paper
  • Home
  • राज्य
  • Viral videos
  • अपराध
  • खेल
  • देश
  • बिजनेस
  • उत्तराखण्ड
  • राजनीति
  • विदेश
  • E-Paper
No Result
View All Result
GVarta News
No Result
View All Result
Home उत्तराखण्ड

देवभूमि की देव जागर परंपरा पर संकट के बादल-उपेक्षित लोक कलाकारों के साथ कहीं मौन न हो जाए देव संस्कृति की दिव्य ध्वनि

gvartanews by gvartanews
August 8, 2026
Reading Time: 1 min read
0
देवभूमि की देव जागर परंपरा पर संकट के बादल-उपेक्षित लोक कलाकारों के साथ कहीं मौन न हो जाए देव संस्कृति की दिव्य ध्वनि


श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालय की विराट पर्वत श्रृंखलाओं,चारधाम,प्राचीन मंदिरों और पावन तीर्थों तक सीमित नहीं है,बल्कि इसकी आत्मा यहां की समृद्ध लोक संस्कृति,देव परंपराओं,लोक कलाओं और आध्यात्मिक विरासत में बसती है। इन्हीं अमूल्य धरोहरों में देव जागर एक ऐसी अद्भुत लोक परंपरा है,जो सदियों से देव आस्था,लोक विश्वास,सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना की जीवंत पहचान रही है। किंतु आज यह गौरवशाली परंपरा ऐसे दौर से गुजर रही है,जहां इसके अस्तित्व पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। देव जागर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि लोक आस्था और देव संस्कृति का ऐसा जीवंत माध्यम है,जिसके माध्यम से देवी-देवताओं का आह्वान,लोक इतिहास,पूर्वजों की स्मृतियां,लोकगाथाएं,लोकगीत और लोक जीवन की अमूल्य परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही हैं। जब किसी गांव में देव जागर आयोजित होता है तो ढोल,दमाऊं,हुड़का,रणसिंघा,भंकोरा,मशकबीन,डौंर (डोर),थाली,नगाड़ा,डमरू तथा अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की दिव्य ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। इन वाद्यों की गूंज केवल संगीत नहीं होती,बल्कि इसे देवताओं का आह्वान,लोक आस्था की अभिव्यक्ति और देव संस्कृति की आत्मा माना जाता है। इन वाद्य यंत्रों को बजाने वाले लोक कलाकार वर्षों की कठिन साधना,अनुशासन और अपने पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान के आधार पर इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने बिना किसी बड़े संस्थान,नियमित वेतन या सरकारी संरक्षण के केवल अपनी श्रद्धा,तपस्या और सांस्कृतिक समर्पण के बल पर इस अमूल्य धरोहर को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखा है। यही कलाकार उत्तराखंड की देव संस्कृति के वास्तविक प्रहरी हैं। सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि जिन कलाकारों के कंधों पर सदियों पुरानी देव परंपरा का संरक्षण टिका है,उनकी आर्थिक स्थिति आज अत्यंत दयनीय हो चुकी है। अनेक कलाकार पूरे वर्षभर देव जागरों,धार्मिक आयोजनों,शादी-विवाह,लोक नृत्यों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी सेवाएं देने के बावजूद इतना भी पारिश्रमिक नहीं कमा पाते कि अपने परिवार का सम्मानपूर्वक भरण-पोषण कर सकें। कई कलाकारों की वार्षिक आय 50 हजार रुपये से भी कम रह जाती है। जब किसी कलाकार को अपनी कला से सम्मानजनक जीवनयापन ही न मिल सके,तब उसके सामने अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी देव जागर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की साधना से दूर होती जा रही है और आधुनिक रोजगार की ओर आकर्षित हो रही है। यदि वर्तमान स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की यह अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर केवल स्मृतियों तक सीमित रह जाएगी। वाद्य यंत्र तो संग्रहालयों और घरों में सुरक्षित रह सकते हैं,लेकिन उन्हें साधने वाले कुशल हाथ,उनकी लय,उनकी साधना और उनकी आत्मा धीरे-धीरे विलुप्त होने लगेगी। समय ऐसा भी आ सकता है जब गुरु तो होंगे,लेकिन शिष्य नहीं और देव जागर केवल पुस्तकों और वीडियो तक सिमट कर रह जाएगा। सम्मान की सबसे बड़ी कमी विडंबना यह भी है कि जब किसी परिवार या गांव में देव जागर आयोजित होता है तो श्रद्धालु बड़ी आस्था से देव दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं,लेकिन पूरी रात जागकर अपनी कला,तपस्या और भक्ति से देव संस्कृति को जीवंत रखने वाले कलाकारों के सम्मान और उचित पारिश्रमिक पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। यह केवल कलाकारों की उपेक्षा नहीं,बल्कि उत्तराखंड की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की भी उपेक्षा है। देव जागर उत्तराखंड की सामाजिक,सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का आधार है। इसके माध्यम से समाज में एकता,पारिवारिक सौहार्द,लोक इतिहास,धार्मिक आस्था,नैतिक मूल्य और सांस्कृतिक परंपराएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती हैं। यह परंपरा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं,बल्कि लोकजीवन के हर महत्वपूर्ण अवसर धार्मिक अनुष्ठान,विवाह,मांगलिक कार्य,मेले,उत्सव और लोक नृत्यों का अभिन्न हिस्सा है। आज समय की सबसे बड़ी मांग है कि उत्तराखंड सरकार संस्कृति विभाग,धार्मिक संस्थाएं,विश्वविद्यालय,विद्यालय,सामाजिक संगठन और समाज के जागरूक नागरिक मिलकर इस दिशा में ठोस पहल करें। लोक कलाकारों को आर्थिक सुरक्षा,नियमित मानदेय,सम्मानजनक पारिश्रमिक,पेंशन,बीमा,छात्रवृत्ति,प्रशिक्षण केंद्र तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में देव जागर,लोक वाद्य यंत्रों और उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर विशेष पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं,ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सके। साथ ही राज्य स्तर पर लोक कलाकारों का पंजीकरण,पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संरक्षण,निर्माण और प्रशिक्षण के लिए विशेष अकादमियों की स्थापना की जाए। सांस्कृतिक महोत्सवों में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता मिले और उन्हें उचित सम्मान तथा पारिश्रमिक प्रदान किया जाए। देवभूमि की पहचान उसकी देव संस्कृति है और देव संस्कृति की आत्मा उसके लोक कलाकार हैं। यदि इन कलाकारों का सम्मान,संरक्षण और सहयोग आज नहीं किया गया,तो आने वाली पीढ़ियां केवल पुस्तकों,चित्रों और स्मृतियों में देव जागर की गौरवशाली परंपरा को खोजेंगी। शायद वे यह प्रश्न भी करेंगी कि जब यह अमूल्य सांस्कृतिक विरासत संकट में थी,तब समाज और शासन ने इसे बचाने के लिए क्या किया। आज आवश्यकता केवल चिंता व्यक्त करने की नहीं,बल्कि सामूहिक संकल्प लेने की है कि ढोल-दमाऊं की गूंज,रणसिंघा की पुकार,हुड़के की थाप,भंकोरे की अनुगूंज,मशकबीन की मधुर धुन,डौंर-थाली की मंगल ध्वनि तथा डमरू का दिव्य नाद आने वाली पीढ़ियों तक उसी गरिमा और श्रद्धा के साथ पहुंचता रहे। यही देवभूमि उत्तराखंड की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान है और यही हमारी सबसे अमूल्य धरोहर भी।

RELATED POSTS

एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में खेलों को मिलेगी नई उड़ान

डॉ.सीएमएस.रावत ने संभाली श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की कमान-उत्तराखंड का मॉडल मेडिकल कॉलेज बनाने का लिया संकल्प

प्रेस नोटविशेष स्वच्छता अभियान में डीएम एवं सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण ने किया प्रतिभाग, 100 से अधिक लोग बने इस अभियान का हिस्सा

Buy JNews
ADVERTISEMENT
ShareTweetSend
gvartanews

gvartanews

Related Posts

एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में खेलों को मिलेगी नई उड़ान
उत्तराखण्ड

एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में खेलों को मिलेगी नई उड़ान

August 8, 2026
डॉ.सीएमएस.रावत ने संभाली श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की कमान-उत्तराखंड का मॉडल मेडिकल कॉलेज बनाने का लिया संकल्प
उत्तराखण्ड

डॉ.सीएमएस.रावत ने संभाली श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की कमान-उत्तराखंड का मॉडल मेडिकल कॉलेज बनाने का लिया संकल्प

August 8, 2026
प्रेस नोटविशेष स्वच्छता अभियान में डीएम एवं सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण ने किया प्रतिभाग, 100 से अधिक लोग बने इस अभियान का हिस्सा
उत्तराखण्ड

प्रेस नोटविशेष स्वच्छता अभियान में डीएम एवं सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण ने किया प्रतिभाग, 100 से अधिक लोग बने इस अभियान का हिस्सा

August 8, 2026
नानकमत्ता में युवक से मारपीट, लूटपाट व कथित यौन उत्पीड़न के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, दो आरोपी गिरफ्तार
उत्तराखण्ड

नानकमत्ता में युवक से मारपीट, लूटपाट व कथित यौन उत्पीड़न के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, दो आरोपी गिरफ्तार

August 6, 2026
मानव सेवा की मिसाल बना रोटरी क्लब-पुलिसकर्मियों और जरूरतमंद व्यापारियों को वितरित किए स्टैंड वाले छाते
उत्तराखण्ड

मानव सेवा की मिसाल बना रोटरी क्लब-पुलिसकर्मियों और जरूरतमंद व्यापारियों को वितरित किए स्टैंड वाले छाते

August 5, 2026
जनता की चौखट पर पहुंचा प्रशासन-जिलाधिकारी की सख्ती से शिकायतों का त्वरित समाधान
उत्तराखण्ड

जनता की चौखट पर पहुंचा प्रशासन-जिलाधिकारी की सख्ती से शिकायतों का त्वरित समाधान

August 4, 2026
Next Post
स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा आर्थिक संबल-11 से 27 अगस्त तक लगेंगे विशेष बैंक ऋण शिविर

स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा आर्थिक संबल-11 से 27 अगस्त तक लगेंगे विशेष बैंक ऋण शिविर

खड़गे के रुद्रपुर पहुंचने पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने किया स्वागत, अंगवस्त्र व तलवार भेंट कर किया अभिनंदन

खड़गे के रुद्रपुर पहुंचने पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने किया स्वागत, अंगवस्त्र व तलवार भेंट कर किया अभिनंदन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

Weather Forecast

天気 予報 ホームページ 埋め込み weatherwidget.org

Panchang

Free Kundli Software
Powered by Astro-Vision
Live Cricket Scores

404 Not Found

404 Not Found



nginx



Recent Posts

  • अगस्त क्रांति दिवस पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला बोले—‘भारत छोड़ो आंदोलन ने रखी आजादी की मजबूत नींव’
  • वंदे मातरम् के 150 वर्ष-राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम की गाथा पर एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में निबंध प्रतियोगिता
  • बेस अस्पताल श्रीनगर में व्यवस्थाओं के कायाकल्प की कवायद तेज-प्राचार्य डॉ.सीएमएस रावत ने ओपीडी से वार्डों तक किया गहन निरीक्षण

Categories

  • Viral videos
  • अपराध
  • अमरोहा
  • अल्मोड़ा
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तराखण्ड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • काठगोदाम
  • कालाढूंगी
  • काशीपुर
  • किच्छा
  • कुमाऊँ
  • क्राइम
  • खटीमा
  • गाज़ियाबाद
  • गढ़वाल
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जसपुर
  • झांसी
  • दिल्ली
  • दुर्घटना
  • देश-विदेश
  • देहरादून
  • नई दिल्ली
  • नानकमत्ता
  • नैनीताल
  • न्यूज
  • पंतनगर
  • पौड़ी
  • प्रयागराज
  • बरेली
  • बागेश्वर
  • बाजपुर
  • भवाली
  • भीमताल
  • मेरठ
  • राजनीति
  • राजनीति
  • रानीखेत
  • रामनगर
  • रामपुर
  • रुद्रपुर
  • रुद्रप्रयाग
  • रुड़की
  • रोज़गार/JOBS
  • लालकुआं
  • शिक्षा
  • सितारगंज
  • सियासत
  • सीतापुर
  • हरिद्वार
  • हल्दुचौड़
  • हल्द्वानी
  • ज़रा हटके

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • Terms & Conditions
  • Privacy Policy

© 2023 The Daily Bharat Express - All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • Home
  • राज्य
  • Viral videos
  • अपराध
  • खेल
  • देश
  • बिजनेस
  • उत्तराखण्ड
  • राजनीति
  • विदेश
  • E-Paper

© 2023 The Daily Bharat Express - All Rights Reserved

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
error: Content is protected !!