देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में उत्तराखण्ड राज्यस्तरीय शास्त्रीय स्पर्धाएं आरंभ हो गई हैं। दो दिवसीय इस कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो.भोलानाथ झा पूर्व आचार्य श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय,हरिद्वार तथा विशिष्ट अतिथि प्रो.अशोक थपलियाल,लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,नई दिल्ली विराजमान थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक प्रो.पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने की। कुल 31 प्रतियोगिताओं के पारदर्शी आयोजन के लिए विभिन्न संस्थानों से विषय विशेषज्ञ आए हुए हैं। उद्घाटन अवसर पर प्रो.भोलानाथ झा ने कहा कि प्रतियोगिता में केवल प्रथम,द्वितीय,तृतीय स्थान प्राप्त करने वाला ही सफल नहीं होता है,अपितु स्पर्धा में भाग लेने वाला हर प्रतिभागी सफलता प्राप्त करता है,क्योंकि वह शास्त्र का निरंतर अभ्यास कर स्वयं को उस कसौटी पर खरा उतारने को प्रयासरत रहता है। प्रो.झा ने कहा कि शास्त्रों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए ऐसी स्पर्धाओं का होना आवश्यक है। परंपराओं की रक्षा करने में शास्त्र और शास्त्रकारों की ही बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि आक्रांताओं ने हमारे देश पर लंबे समय तक शासन किया,परंतु हमारे शास्त्रों और शास्त्रकारों के कारण हमारा प्राचीन ज्ञान सुरक्षित रहा और आज फिर से उसकी गंगा बह रही है। संस्कृत वांग्मय विश्व के सभी भाषाओं के वांग्मय से श्रेष्ठ है। इसमें शब्दों की विस्तृत व्याख्यायें और उनके अनेक पर्यायवाची हैं। अन्य भाषाओं में ऐसा नहीं है। प्रो.अशोक थपलियाल ने कहा कि स्पर्धाएं प्रतिभागी को शास्त्र में निष्णात बनाने में बडी़ भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के आरंभ अवसर पर संयोजक डॉ.ब्रह्मानंद मिश्रा ने स्पर्धाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कुल 31 स्पर्धाएं आयोजित हो रही हैं। इनमें भारतीय विज्ञान भाषण,वेद भाष्य भाषण,वेदांत भाष्य भाषण,आयुर्वेद भाषण आदि शामिल हैं। इन स्पर्धाओं में उत्तराखण्ड के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सौ से अधिक विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। धन्यवाद ज्ञापन प्रो.चंद्रकला आर कोंडी और संचालन डॉ.गणेश्वरनाथ झा ने किया। इस अवसर पर डॉ.दिनेश चंद्र पांडेय,डॉ.रघु बी राज,डॉ.वैथी सुब्रह्मण्यम,डॉ.सुशील बडोनी,प्रो.अनीता,डॉ.सुधांशु वर्मा आदि उपस्थित थे।








