श्रीनगर गढ़वाल। नूतन वर्ष 2026 के आगमन बेला को साहित्य और संस्कृति के रंगों में रंगते हुए हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् श्रीनगर द्वारा एक भव्य कवि सम्मेलन एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद कार्यक्रम स्थल देर रात तक साहित्य प्रेमियों,कलाकारों और बुद्धिजीवियों से गुलजार रहा और श्रोता कविता,गीत,गजल एवं लोक गायन की सुरमयी प्रस्तुतियों में पूरी तरह डूबे रहे। कार्यक्रम में प्रो.मोहन पंवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे,जबकि प्रो.आर.एन.गैरोला एवं सर्जन डॉ.एम.एन.गैरोला विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे। वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा,संस्था के प्रमुख संरक्षक कृष्णानंद मैठाणी तथा प्रो.सम्पूर्ण सिंह रावत ने भी अतिथि मंच की शोभा बढ़ाई। साहित्य,संगीत और लोक-संस्कृति का अद्भुत संगम कार्यक्रम में कविता,गीत,गजल एवं लोक गायन की विविध प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। वीरेन्द्र रतूड़ी के हारमोनियम वादन एवं जैनेन्द्र गोसाई के ढोलक वादन ने प्रस्तुतियों को विशेष प्रभाव प्रदान किया। साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के इस वैविध्यपूर्ण संगम ने नववर्ष के स्वागत को स्मरणीय बना दिया। कार्यक्रम में प्रो.महेश नौडियाल,प्रो.आर.पी.थपलियाल,प्रो.उमा मैठाणी,प्रो.डी.एस.नेगी,डॉ.प्रदीप अणथ्वाल,डॉ.प्रकाश चमोली,मीनाक्षी चमोली,जय कृष्ण पैन्यूली,अजय चौधरी,आर.पी.कपरुवाण,डॉ.दीपक द्विवेदी,माधुरी नैथानी,कामनी नैथानी,अनीता नौडियाल,मेनका सुशांत मिश्रा,पार्षद प्रवेश चमोली,डॉ.राजेश जैन,शुभम जैन,रेणू जैन,सुरेश मैठाणी अध्यक्ष सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन,दिनेश असवाल अध्यक्ष व्यापार सभा श्रीनगर,उम्मेद सिंह मेहरा,आचार्य भास्करानंद अणथ्वाल,मोहन सिंह रावत सभासद नगर पंचायत कीर्तिनगर सहित अनेक साहित्यकारों,कलाकारों एवं समाजसेवियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी मंच संचालन प्रो.सम्पूर्ण सिंह रावत द्वारा किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार नीरज नैथानी ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत करते हुए हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया और संस्था की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला। देर रात तक जमे रहे श्रोता भावपूर्ण काव्य पाठ,मधुर गीतों,प्रभावशाली गजलों और लोकधुनों की प्रस्तुति ने ऐसा सम्मोहन रचा कि कड़कड़ाती ठंड के बावजूद दर्शक देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे और नववर्ष के स्वागत का आनंद साहित्य-संस्कृति के साथ लेते रहे।








