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सितारगंज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर नगर पालिका में श्रद्धांजलि, ‘अंत्योदय’ के संकल्प के साथ जनसेवा का लिया प्रण

gvartanews by gvartanews
September 25, 2026
Reading Time: 1 min read
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सितारगंज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर नगर पालिका में श्रद्धांजलि, ‘अंत्योदय’ के संकल्प के साथ जनसेवा का लिया प्रण

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मसूरी में वंदे मातरम के 150 गौरवशाली वर्ष पर गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वरमसूरी, में वंदे मातरम के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुक्रवार को महात्मा योगेश्वर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मसूरी में सामूहिक वंदे मातरम गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं और अतिथियों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम का गायन कर मातृभूमि के प्रति सम्मान और राष्ट्रभावना का संदेश दिया। कार्यक्रम का आयोजन विद्या भारती उत्तराखंड के तत्वावधान में किया गया।कार्यक्रम में रिटायर्ड कर्नल अनिल कुमार, निधि बहुगुणा और मनोज रायल ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रचेतना से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। वंदे मातरम ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लोगों में देशप्रेम और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वक्ताओं ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशवासियों के बीच राष्ट्रभावना का प्रमुख स्वर बना। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसका गायन किया था। इसके बाद वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरणों में जनजागरण का महत्वपूर्ण माध्यम बना।रिटायर्ड कर्नल अनिल कुमार ने कहा कि सैनिकों के लिए मातृभूमि सर्वाेच्च होती है और वंदे मातरम शब्दों में इसी भावना की अनुभूति होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से देश की एकता, अखंडता और संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।निधि बहुगुणा ने कहा कि नई पीढ़ी को देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रतीकों की जानकारी होना जरूरी है। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ विद्यार्थियों को राष्ट्र और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर है। मनोज रायल ने कहा कि विद्यालयों में इस तरह के आयोजन बच्चों में राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम की भावना केवल कार्यक्रम तक सीमित न रहकर दैनिक जीवन में भी दिखाई देनी चाहिए।

जिलाधिकारी ने जनपद स्तर पर संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की, पार्किंग के लिए उपयुक्त स्थल चिह्नित करने के निर्देश

सितारगंज में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। नगर पालिका परिषद परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान उनके जीवन, विचारों और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के पावन अवसर पर नगर पालिका परिषद परिसर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया गया।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुंच और जनकल्याण के विचारों को समर्पित रहा। उनका ‘अंत्योदय’ का सिद्धांत आज भी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान की प्रेरणा देता है पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने एक ऐसे समाज और राष्ट्र की कल्पना की, जिसमें विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी व्यक्ति स्वयं को विकास की मुख्यधारा से अलग महसूस न करे। उनके विचारों ने भारतीय राजनीति और सामाजिक चिंतन को एक अलग दिशा देने का काम किया।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जीवन केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी जनसेवा और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके विचारों को आत्मसात कर समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्ग तक विकास और जनकल्याण की योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी इस दौरान सभी ने उनके आदर्शों और विचारों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्र की प्रगति तभी सार्थक है, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचे। उनके विचार और ‘अंत्योदय’ का मंत्र आने वाली पीढ़ियों को भी जनसेवा और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को कोटि-कोटि नमन।

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  • मसूरी में अंत्योदय के विचारों को याद कर दीनदयाल जयंती पर श्रद्धासुमनअंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का लिया संकल्प में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर शुक्रवार को मसूरी स्थित पंडित दीनदयाल पार्क में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने उनके विचारों को याद करते हुए श्पंडित दीनदयाल उपाध्याय अमर रहें के नारे लगाए। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान और अंत्योदय का विचार सामने रखा। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद और वंचित वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना ही उनके विचारों को वास्तविक रूप से आगे बढ़ाना है। पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष मोहन पेटवाल ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद की अवधारणा को आगे बढ़ाया और उनका जीवन सादगी, राष्ट्रसेवा तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को उनके विचारों और जीवन से परिचित कराना जरूरी है।पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था। भारत सरकार के आधिकारिक विवरणों में उन्हें अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, लेखक और पत्रकार के रूप में वर्णित किया गया है तथा एकात्म मानववाद और अंत्योदय को उनके प्रमुख विचारों में शामिल किया गया है। इस अवसर पर मसूरी भाजपा मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल, कुषाल राणा, अनिता धनाई, अमित भट्ट, अनिल गोयल, रणबीर कंडारी, सुनील रतूडी, विजय विंदवाल, सहित कई लोग मौजूद थे।

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