बैठक को सम्बोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि 1 अक्टूबर से शासन-प्रशासन ने धान खरीद की घोषणा तो कर दी परंतु मंडियों में धान खरीद की तैयारियां बिल्कुल भी नहीं है। इससे किसानों में रोष है। सरकार की फसल खरीद नीति किसानों को हतोत्साहित करने की है। ताकि किसान अपनी फसल प्राइवेट खरीददारों को सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर हो जाएं।
किसानों ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार अखबारों में सुनहरी-सुनहरी घोषणाएं कर रही है परन्तु जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। सरकार ने राइस मिलों का पिछला 500 करोड़ बकाया ही नही चुकाया है। इस वजह से राइस मिलें मंडी में किसानों से धान नही खरीद रही है। ऐसे में किसानों की धान की फसल बर्बाद होने का पूरा खतरा है।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार व प्रशासन 3 अक्टूबर से धान खरीद नहीं करती है तो किसानों को आन्दोलन के लिए विवश होना पड़ेगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
सभा के उपरान्त मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में गीघ्र धान खरीद की गारंटी करने, मिल मालिकों का बकाया भुगतान करने, बटाई व ठेके पर जमीन जोत रहे किसानों के दस्तावेज देखकर उनकी फसल खरीद करने , समर्थन मूल्य की गारंटी करने, गन्ने का गारन्टेड मूल्य 600 रुपए प्रति क्विंटल करने , गांवों में नशा तस्करी पर रोक लगाने आदि मांगे की गई।
इस दौरान अखिल भारतीय किसान सभा (लोकतंत्र) के जिलाध्यक्ष गुरनाम सिंह, जिला संयोजक जगीर सिंह, भाकियू (टिकैत) के मलूक सिंह खिंडा , भाकियू(चढूनी) के अमरीक सिंह, अखिल भारतीय किसान महासभा के संयोजक ललित मटियाली सहित लोहर सिंह, त्रिलोक सिंह, अरूढ़ सिंह , दिनेश सिंह, मनखुशी राणा, बलबीर राणा, ध्यान सिंह, सुरसेवक सिंह, दलबीर सिंह, कुलदीप सिंह, सहित दर्जनों किसान नेता उपस्थित थे।








