बल,बुद्धि,विद्या का संगम हैं,,, वीर हनुमान जीराम भक्त हनुमानजी का जीवन निराभिमान, संवाद कौशल, आदर्शवादिता, संकटमोचन,वीरता, चारित्रिक दृढ़ता, विनम्रता में, निःस्वार्थ सेवाभाव शामिल है ये गुण उन्हें आदर्श सेवक व महाबली बनाते हैं उनके जीवन से प्रबंधन और सफलता की शिक्षा मिलती है उनका जीवन सेवा, न्याय, भक्ति, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है उनका जीवन हमें गुरु भक्ति,मातृ -पितृभक्ति अपने इष्ट प्रभु श्रीराम व माता सीताजी की निःस्वार्थ सेवा व निश्चल भक्ति करने की सीख देता है वह अपने इष्टदेव की प्रसन्नता व भक्ति के लिए निरभिमान व निर्मल मन से किसी भी हद तक जा सकते थे वह प्रेम व करूणा के सागर हैं वह प्रभु श्रीराम के चरित्र को सुनने के रसिया है वह अपनी बड़ाई से प्रसन्न न होकर सभी कार्यों को प्रभुराम के चरणों का प्रताप व आशीर्वाद मानते थे जो उनकी विनम्रता को दर्शाता है उनका चरित्र हमें अन्याय व अधर्म के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देता हैं उन्हें सकल गुण निधानम,,,, अर्थात उन्हें सभी गुणों की खान कहा जाता है वह ज्ञानियों में अग्रगण्य है उनकी भक्ति से जीवन में मानसिक शान्ति मिलती है डर,चिन्ताए दूर होकर एक सुरक्षा कवच प्राप्त होता है जीवन की दुखों ,रोगो व नकारात्मक ऊर्जा व बाधाओं का नाश होता है वह अष्टनिधि और नवनिधि के दाता हैं उनके पूजन से आत्मविश्वास व एकाग्रता में वृद्धि होती है हमें अनके जीवन के आदर्शों सेवा भक्ति व गुणो को अपने जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है तभी मनुष्य जीवन की सार्थकता हैप्रस्तुति –नरेश छाबड़ाआ,वा, रूद्रपुर8630769754