श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की शांत वादियों में बसे पर्यटन स्थल खिर्सू तक पहुंचने वाली मुख्य सड़क आज खुद ही संकट का कारण बन गई है। श्रीनगर से खिर्सू होते हुए बुघाणी तक जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग इन दिनों भूस्खलन,टूटी सड़क और गहरे गड्ढों की वजह से यात्रियों के लिए खतरे का पर्याय बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि हर मोड़ पर हादसे की आशंका बनी रहती है। यह मार्ग न केवल पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है,बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक रूप से भी इसकी बड़ी भूमिका है। इसी मार्ग पर खिर्सू में ब्लॉक मुख्यालय,विभिन्न सरकारी कार्यालय और कई गांव जुड़े हुए हैं। साथ ही यह सड़क उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के पैतृक गांव बुघाणी को जोड़ते हुए खिर्सू जाती है,जिससे इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता भी जुड़ी हुई है। सड़क पर भूस्खलन का मलबा,सफर बना जोखिम भरा तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जगह-जगह पहाड़ियों से पत्थर और मलबा सड़क पर आकर जमा हो गया है। कई स्थानों पर तो आधी सड़क मलबे में दब चुकी है,जिससे वाहनों का आवागमन बेहद कठिन और खतरनाक हो गया है। बरसात या हल्की नमी के बाद यह खतरा और बढ़ जाता है। गड्ढों से छलनी सड़क,वाहन चालकों की बढ़ी परेशानी मार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं,जिनमें पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। दोपहिया और छोटे वाहनों के लिए यह सड़क किसी परीक्षा से कम नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन वाहन फंसने और फिसलने की घटनाएं सामने आ रही हैं। खिर्सू अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण एक प्रमुख पर्यटन स्थल है,लेकिन सड़क की बदहाली के चलते पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर स्थानीय व्यवसाय और रोजगार पर भी पड़ रहा है। विभाग का दावा दो सप्ताह में सुधरेगी स्थिति इस संबंध में लोक निर्माण विभाग श्रीनगर डिवीजन के अधिशासी अभियंता किशोर कुमार ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए बताया कि अगले दो सप्ताह के भीतर सड़क से भूस्खलन का मलबा हटा दिया जाएगा। साथ ही सड़क पर बने गड्ढों को भरने का कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष अस्थायी मरम्मत के बजाय इस सड़क का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए,ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से निजात मिल सके। श्रीनगर-खिर्सू-बुघाणी मार्ग की वर्तमान स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए,तो यह न केवल पर्यटन बल्कि स्थानीय जनजीवन के लिए भी गंभीर संकट बन सकता है। अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्यवाही पर टिकी हैं कि कब यह महत्वपूर्ण सड़क अपने पुराने स्वरूप में लौटेगी।






