श्रीनगर गढ़वाल। वीर बाल दिवस के पावन अवसर पर श्रीनगर स्थित श्री गुरुद्वारा दरबार साहिब में एक गरिमामय एवं भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर धर्म,संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह एवं बाबा फतेह सिंह को श्रद्धा,सम्मान और विनम्रता के साथ भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वीर बाल दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि त्याग,आस्था और अदम्य साहस को आत्मसात करने का दिन है। साहिबजादों ने बाल अवस्था में भी जिस दृढ़ता,धैर्य और वीरता के साथ अत्याचार का सामना किया,वह मानव इतिहास में अद्वितीय एवं प्रेरणास्रोत है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि धर्म,सत्य और राष्ट्र की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होता। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि गुरु परंपरा में साहिबजादों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को नैतिक साहस,आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति की सीख देता है। यह आयोजन समाज को अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने और युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेने का संदेश देता है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत गुरुद्वारा दरबार साहिब पहुंचे और उन्होंने वीर साहिबजादों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनका त्याग भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अमूल्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि साहिबजादों का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष कमल किशोर रावत,खिर्सू ब्लाक प्रमुख अनिल भण्डारी,जिला महामंत्री गणेश भट्ट,पूर्व राज्य मंत्री अतर सिंह असवाल,श्रीनगर भाजपा मंडल अध्यक्ष विनय घिल्डियाल,मंडल महामंत्री दिनेश पटवाल,शुभम प्रभाकर,जिला व्यापार मंडल के अध्यक्ष बासुदेव कंडारी,देवेंद्र मणि मिश्रा,गुरुद्वारा कमेटी के प्रबंधक सरदार हरविंदर सिंह लकी,श्रीनगर व्यापार मंडल अध्यक्ष दिनेश असवाल सहित अनेक क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि,सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। गुरुद्वारा परिसर में पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा,अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। संगत ने एक स्वर में साहिबजादों के बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कुल मिलाकर श्रीनगर गुरुद्वारा दरबार साहिब में आयोजित यह वीर बाल दिवस कार्यक्रम इतिहास,आस्था और राष्ट्र चेतना का सशक्त संगम बनकर उभरा,जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को भीतर तक प्रेरित किया।








