कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय इंटर कॉलेज नागराजाधार कड़ाकोट में कार्यरत जीव विज्ञान के प्रवक्ता मानवेंद्र सिंह कठैत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सशक्त शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होते,बल्कि वे समाज और राष्ट्र की चेतना को दिशा देने वाले विचार-स्तंभ भी होते हैं। शाहिद नागेंद्र सकलानी मोलू भरदारी स्मृति विकास मेला 2026 के अवसर पर उनके ओजस्वी,विचारोत्तेजक और भावप्रवण उद्बोधन ने उपस्थित जनसमूह को गहराई तक प्रभावित किया और पूरे पंडाल को राष्ट्रबोध की ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही मानवेंद्र सिंह कठैत ने मंच से संबोधन प्रारंभ किया,वातावरण में एक विशेष गंभीरता और ऊर्जा का संचार हो गया। उनकी ओजस्वी वाणी,सटीक शब्द चयन,प्रभावी उदाहरण और भावनात्मक अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को शुरू से अंत तक बांधे रखा। शहीद नागेंद्र सकलानी मोलू भरदारी के बलिदान,सामाजिक चेतना,युवाओं की जिम्मेदारी और शिक्षा की भूमिका पर उनके विचार न केवल प्रेरक रहे,बल्कि आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करते दिखाई दिए। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा शहीदों की स्मृतियां केवल मंचों पर पुष्प अर्पण तक सीमित न रहें,बल्कि उनके आदर्श हमारे आचरण,हमारे निर्णय और हमारे जीवन की दिशा तय करें। यह कथन विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों के लिए संदेश बनकर उभरा और श्रोताओं के मन में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को और सुदृढ़ कर गया। मानवेंद्र कठैत की वाणी में जहां एक ओर बौद्धिक प्रखरता स्पष्ट झलक रही थी,वहीं दूसरी ओर संवेदनशील मानवीय भावनाओं की गहराई भी महसूस की गई। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम न मानते हुए,उसे समाज परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का सशक्त औजार बताया। उनके विचारों ने युवाओं को आत्मचिंतन,अनुशासन और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित किया। पूरा जनसमूह उनके वक्तव्य को अत्यंत मनोयोग से सुनता रहा और अनेक अवसरों पर तालियों की गड़गड़ाहट से उनके विचारों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के समापन के पश्चात कई गणमान्य नागरिकों,शिक्षकों,बुद्धिजीवियों एवं स्थानीय लोगों ने मानवेंद्र सिंह कठैत की वक्तृत्व कला और वैचारिक स्पष्टता की मुक्तकंठ से सराहना की। निस्संदेह मानवेंद्र सिंह कठैत जैसे शिक्षक समाज के लिए प्रेरणा-स्तंभ हैं,जो कक्षा की चार दीवारी से बाहर निकलकर भी जनमानस को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। शाहिद नागेंद्र सकलानी मोलू भरदारी स्मृति विकास मेला 2026 में उनका यह प्रेरणादायी और ओजपूर्ण उद्बोधन लंबे समय तक श्रोताओं की स्मृतियों में जीवंत बना रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा।








